कई बार राज्यसभा से निलंबित किए जा चुके हैं सांसद, 1962 में पहली बार हुआ था ऐसा

1962 में पहली बार गोडे मुरहरि को निलंबित किया गया था.
1962 में पहली बार गोडे मुरहरि को निलंबित किया गया था.

rajya sabha suspend MPs: राज्यसभा से निलंबन के मामले में राजनारायण (Raj Narain) का रिकॉर्ड सबसे बड़ा है. वे राज्यसभा से चार बार निलंबित हुए थे. राजनारायण 1966, 1967, 1971 और 1974 में चार बार राज्यसभा से निलंबित हो चुके है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 21, 2020, 10:22 PM IST
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नई दिल्ली. राज्यसभा (Rajya sabha) से 8 सांसदों के निलबंन से सदन के बाहर और भीतर जमकर हंगामा मचा हुआ है. लेकिन आज हम बताते है कि संसद के ऊपरी सदन में निलंबन का रिकॉर्ड क्या है. कब-कब किन किन सांसदों को राज्यसभा से निलंबन का सामना करना पड़ा है.

राज्यसभा संसद का ऊपरी सदन है और इस हाउस में सांसद पार्टी से सीधे चुनकर आते है. जनता की भूमिका भले ही सांसदों को भेजने में नही होती है, लेकिन इस सदन के सांसदों की भूमिका काफी अहम मानी जाती है. हालांकि इस सदन में सांसदों के निलंबन का अपना अलग रिकॉर्ड है.

राज्यसभा से निलंबन का रिकॉर्ड
राज्यसभा से निलंबन के मामले में राजनारायण (Raj Narain) का रिकॉर्ड सबसे बड़ा है. वे राज्यसभा से चार बार निलंबित हुए थे. राजनारायण 1966, 1967, 1971 और 1974 में चार बार राज्यसभा से निलंबित हो चुके है.
दूसरे नंबर पर गोडे मुरहरि का नाम है. वे राज्यसभा से सस्पेंड होने वाले पहले सांसद थे और वे कुल तीन बार राज्यसभा से अपने आचरण के लिए निलंबित हुए. वे 1962 में एक बार और 1966 में दो बार निलंबित हुए. सबसे गौर करने वाली बात है कि की गोड़े मुरहरी बाद में राज्यसभा के उपसभापति भी चुने गए.



महिला आरक्षण बिल के विरोध में यूपीए ने 2010 में सात सांसदों को निलंबित किया था. उस समय जिन सांसदों को निलंबित किया गया था वे है, कमल अख्तर, वीर पाल सिंह यादव, अंजाज़ अली, साबिर अली, सुभाष प्रसाद यादव, आमिर आलम खान और नन्द किशोर यादव.

इस बार राज्यसभा में इन सांसदों पर हुई कार्रवाई
राज्यसभा में कृषि विधेयक के पारित किए जानें के बाद हंगामा करने के कारण डेरेक ओ ब्रायन(तृणमूल कांग्रेस), संजय सिंह(आप), रिपुन बोरा(कांग्रेस), नजीर हुसैन (कांग्रेस), केके रागेश(सीपीएम), ए करीम (कांग्रेस), राजीव साटव (कांग्रेस) और डोला सेन(तृणमूल) पर कार्रवाई हुई है.

राज्यसभा में विपक्ष ने व्यवहार को लेकर केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि यह संसद के लिए एक शर्मनाक दिन था. माइक टूट गया, तार टूट गया, नियम पुस्तिका फाड़ दी गई. अगर मार्शल नहीं आते तो उपसभापति पर शारीरिक हमला भी हो सकता था.
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