G-23 के नेता भी जानते हैं कि गांधी परिवार कांग्रेस का पहला और आखिरी विकल्प है

सोनिया गांधी इस वक्त कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष हैं. (फाइल फोटो)

सोनिया गांधी इस वक्त कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष हैं. (फाइल फोटो)

G-23 के नेता जानते हैं कि वो सोनिया (Sonia Gandhi) या राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के नेतृत्व को चुनौती नहीं दे सकते. उनकी समस्या राहुल गांधी की तथाकथित नई टीम से है. ऐसे में इस रस्साकस्सी में वो ही नेता आखिरी तक बचेगा जिसके पास जनाधार होगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 10, 2021, 10:20 PM IST
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नई दिल्ली. कांग्रेस (Congress) के अंदर चल रहे अन्तर्कलह का मामला बार-बार हाल के दिनों में मीडिया की सुर्खियां बनता रहता है. बुधवार को कांग्रेस के लिए बुरी खबर केरल से आई. पार्टी के वरिष्ठ नेता पीसी चाको (P.C. Chako) ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया. जाते-जाते चाको ने ये भी कह दिया कि G-23 के नेताओं ने जो सवाल उठाए हैं वो ठीक हैं. लेकिन बात यहीं नहीं थमी. किसान बिल और तेल की कीमतों को लेकर संसद में हंगामा कर रही कांग्रेस की तरफ प्रेस कांफ्रेंस करने की जिम्मेदारी मल्लिकार्जुन खड़गे और आनंद शर्मा को दी गई.

जब से G-23 बना और जम्मू में इस ग्रुप ने अपना शक्ति प्रदर्शन किया, उसके बाद पहला मौका था, जब आनंद शर्मा कांग्रेस मुख्यालय में प्रेस वार्ता करने आए. जैसी कि उम्मीद थी पत्रकारों ने कांग्रेस की गुटबाजी को लेकर सवाल पूछना शुरू किया. चाको के इस्तीफे और आरोपों ने कांग्रेस के जख्म को और हरा कर दिया.

आनंद शर्मा के जवाब से साफ हुआ कि कांग्रेस टूटने वाली नहीं

लेकिन पत्रकार वार्ता खत्म होते-होते आनंद शर्मा ने जो जवाब दिया उस से साफ हो गया कि पार्टी में गुटबाजी और मतभिन्नता तो है और आगे भी रहेगी लेकिन पार्टी टूटने वाली नहीं है. आनंद शर्मा ने अपने जवाब में कहा- कांग्रेस में मतभिन्नता का इतिहास आजादी से भी पुराना है. उस दौर में भी गांधी, नेहरू, पटेल और सुभाष के भी विचारों को लेकर कई बार मतभिन्नता होती थी. शर्मा ने ये भी कहा कि कांग्रेस एक है, सोनिया गांधी इसकी राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और हम सभी की अभी पहली जिम्मेदारी बीजेपी को हराने की है.
अब सवाल ये उठता है कि आनंद शर्मा के इस बयान का मतलब क्या है?

जब हमने इस बारे में वरिष्ठ पत्रकार मंजरी चतुर्वेदी से पूछा तो उन्होंने कहा कि वैचारिक मतभिन्नता को लेकर अतीत में भी कांग्रेस कई बार टूटी है. अतीत में शरद पवार, पीए संगमा और तारिक अनवर के पार्टी छोड़ने का मामला हो या फिर और बाद में हेमंत बिस्वा सरमा, YSR कांग्रेस के अलग होने का, या फिर हाल में ज्योतिरादित्य सिंधिया, अशोक तंवर, बिहार के अशोक चौधरी के पार्टी से बाहर जाने का. कई बार ऐसा होता है कि व्यक्तिगत राजनीतिक महत्वाकांक्षा को वैचारिक विभाजन के तौर पर दिखाया जाता है. आनद शर्मा ने अपने बयान से कई संदेश दिए हैं.

-एक तो वो कांग्रेस नेतृत्व को ये याद दिला रहे है. कांग्रेस जैसी लोकतांत्रिक पार्टी में वैचारिक मतभिन्नता को बगावत न माना जाए.



-दूसरा उन्होंने ये भी साफ कर दिया कि अलग-अलग राय तो अब भी है, पर पांच राज्यों के चुनाव को देखते हुए फिलहाल बीजेपी के खिलाफ पूरी पार्टी एकजुट है.

आखिरी में G-23 के नेता भी जानते है कि गांधी परिवार कांग्रेस का पहला और आखिरी विकल्प हैं. ऐसे में वो सोनिया या राहुल गांधी के नेतृत्व को चुनौती नहीं दे सकते. उनकी समस्या राहुल गांधी की तथाकथित नई टीम से है. ऐसे में इस रस्साकस्सी में वो ही नेता आखिरी तक बचेगा जिसके पास जनाधार होगा.
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