जी- 4 के सदस्य देशों ने UNRC में सुधारों पर ठोस नतीजे नहीं निकलने पर जताई चिंता

जी- 4 के सदस्य देशों ने UNRC में सुधारों पर ठोस नतीजे नहीं निकलने पर जताई चिंता
प्रतीकात्मक फोटो.

जी -4 में शामिल भारत के विदेश मंत्री (External Affairs Minister) एस जयशंकर ब्राजील के विदेश मंत्री (Brazilian Foreign Minister)अर्नेस्टो अराउजो, जर्मनी (Germany)के विदेश मंत्री हीको मास और जापान (Japan) के विदेश मंत्री मोटेगी तोशीमित्सू ने बुधवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 74वें सत्र से इतर मुलाकात की.

  • भाषा
  • Last Updated: September 26, 2019, 11:43 PM IST
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संयुक्त राष्ट्र. भारत ( India) और जी- 4 के अन्य सदस्य देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार पर कोई ठोस नतीजा ना निकलने पर चिंता जताई है. सदस्य दशों ने कहा कि संस्था में अंतर-सरकारी बातचीत में आवश्यक खुलापन नहीं है और यह त्रुटिपूर्ण कार्यशैली से जूझ रही है.

जी -4 में शामिल भारत के विदेश मंत्री (External Affairs Minister) एस जयशंकर ब्राजील के विदेश मंत्री (Brazilian Foreign Minister)अर्नेस्टो अराउजो, जर्मनी (Germany)के विदेश मंत्री हीको मास और जापान (Japan) के विदेश मंत्री मोटेगी तोशीमित्सू ने बुधवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 74वें सत्र से इतर मुलाकात की.

पारर्शिता की कमी की और किया इशारा
बैठक के बाद जारी संयुक्त प्रेस वक्तव्य के अनुसार जी- 4 के विदेश मंत्रियों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (United Nations Security Council) की अंतर सरकारी वार्ता (आईजीएन) में हाल ही में किये गये प्रयासों की समीक्षा की.
इसमें कहा गया, "उन्होंने तथ्य के मद्देनजर अपनी चिंता व्यक्त की कि आईजीएन शुरू होने के 10 साल से ज्यादा बाद अफ्रीकी साझा रुख बेहतर तरीके से जरूर झलका है, लेकिन कोई ठोस परिणाम नहीं निकला है." उन्होंने रेखांकित किया कि आईजीएन के हालिया सत्र में एक बार फिर यह बात सामने आई है कि वार्ता प्रक्रिया में जरूरी खुलेपन और पारदर्शिता की कमी है और यह त्रुटिपूर्ण कार्यशैली से जूझ रही है.



जी-4 के विदेश मंत्रियों ने कहा कि महज सामान्य वक्तव्यों पर आधारित बहसों को पीछे छोड़ने का समय आ गया है. उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के अधिकतर सदस्य सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार के पक्षधर हैं. साथ ही आईजीएन को और अधिक परिणामोन्मुखी प्रक्रिया बनाने की अपेक्षा रखते हैं.

नीति निर्णायक इकाइयों को उन्नत बनाने की अपील
मंत्रियों ने सुरक्षा परिषद के जल्द और व्यापक सुधार के लिए अपनी पुरजोर प्रतिबद्धता जताई. इस बारे में 2005 में संयुक्त राष्ट्र के सम्मेलन में भी सरकार प्रमुखों और शासनाध्यक्षों ने विचार किया था. बयान के अनुसार जी- 4 के विदेश मंत्रियों ने समकालीन वास्तविकताओं को बेहतर तरीके से प्रदर्शित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र में सुधार करने और इसकी प्रमुख नीति निर्णायक इकाइयों को उन्नत बनाने के प्रयासों के महत्व को रेखांकित किया.

मंत्रियों ने इस बात पर भी जोर दिया कि सुरक्षा परिषद में प्रतिनिधित्व बढ़ाने, इसे और अधिक विधिसम्मत और प्रभावशाली बनाने व दुनिया के सामने मौजूद जटिल चुनौतियों से निपटने की इसकी क्षमता बढ़ाने के लिए इसका दोनों श्रेणियों में विस्तार अत्यावश्यक है.

वर्ष 2020 में संयुक्त राष्ट्र के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर को ध्यान में रखते हुए जी-4 देशों के मंत्रियों ने यह उम्मीद जताई कि महासभा का मौजूदा सत्र सुरक्षा परिषद (security Council) के जल्द सुधार की ओर बढ़ने का मार्ग प्रशस्त करेगा. उन्होंने कहा, "सुधार में केवल सदस्यता की स्थाई और गैर-स्थाई श्रेणियों का विस्तार ही शामिल नहीं होना चाहिए, बल्कि सुरक्षा परिषद के कामकाज की पारदर्शिता और प्रभाव को बढ़ाने के कदम भी शामिल होने चाहिए."

अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा की अपील की
विदेश मंत्रियों ने अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाये रखने के संबंध में प्रमुख जिम्मेदारियों को स्वीकारने की क्षमता और आकांक्षा को देखते हुए सुरक्षा परिषद में नये स्थाई सदस्यों के तौर पर एक-दूसरे की उम्मीदवारी का भी समर्थन किया.

उन्होंने कहा, "विकासशील देशों और संयुक्त राष्ट्र में प्रमुख रूप से योगदान करने वालों की भूमिका में विस्तार की स्पष्ट रूप से जरूरत है, ताकि परिषद और अधिक विधिसम्मत, प्रभावशाली एवं ज्यादा प्रतिनिधित्व वाली बने."

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