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चीन की बढ़ेगी मुश्किल, G-7 बैठक में फिर उठेगी कोरोना पर जांच की मांग?

भारत ने पहली बार 28 मई को आगे की जांच के लिए हो रही मांग का समर्थन किया था (सांकेतिक फोटो)

G7 Summit: लीक मसौदे के अनुसार जी-7 में शामिल होने वाले नेता कोरोना महामारी कहां से फैली, इसे लेकर जांच की मांग कर सकते हैं.

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    नई दिल्ली. ब्रिटेन में 11-13 जून को होने वाली जी7 समिट (G7 Summit) की बैठक से पहले एक सरकारी मसौदे के लीक होने की खबर है. इस लीक मसौदे के अनुसार, बैठक में चीन के खिलाफ G-7 के नेता कोरोना की उत्पत्ति को लेकर मोर्चा खोल सकते हैं. मसौदे में इस बात का जिक्र है कि सम्मेलन के दौरान नेता विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से कोरोना कहां से फैला? इसकी फिर से जांच करने की मांग कर सकते हैं. बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ब्रिटेन के पीएम बोरिस जॉनसन ने विशेष तौर पर आमंत्रित किया था लेकिन कोरोना वायरस महामारी के चलते पीएम मोदी ब्रिटेन नहीं जा रहे हैं. पीएम मोदी वर्चुअली इस बैठक में हिस्सा लेंगे.

    ब्लूमबर्ग न्यूज को मिले इस लीक डॉक्यूमेंट के मुताबिक जी-7 नेताओं ने कोरोना वायरस के उद्भव को लेकर डब्लूएचओ की ओर से नए और पारदर्शी अध्ययन की मांग कर सकते हैं. पिछले साल कोविड -19 कैसे फैला, यह निर्धारित करने और आगे के अध्ययन के लिए भारत और अमेरिका सहित कई देशों ने जांच की मांग की थी. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने गुरुवार को सीधे तौर पर चीन का नाम लिए बिना कहा कहा "मुझे लगता है कि हम बहुत स्पष्ट हैं कि हम कोविड -19 की उत्पत्ति और आगे के अध्ययन के लिए WHO की रिपोर्ट के फॉलो अप का समर्थन करते हैं और हमने इस संबंध में सभी की समझ और सहयोग का आह्वान किया है."

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    पहले भी जांच के लिए समर्थन करता रहा है भारत
    भारत ने पहली बार 28 मई को आगे की जांच के लिए हो रही मांग का समर्थन किया था, जब अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने खुफिया एजेंसियों को कोरोनवायरस की उत्पत्ति पर एक निश्चित निष्कर्ष इकट्ठा करने के अपने प्रयासों को दोगुना करने के लिए कहा और इस मुद्दे पर एक नई रिपोर्ट 90 दिन के अंदर प्रस्तुत करने के लिए कहा था. बाइडन की कार्रवाई से चीन नाराज हो गया, चीन ने इस पर कहा था कि अमेरिका राजनीति कर रहा है.

    अमेरिका की एक खुफिया रिपोर्ट में पाया गया कि चीन के वुहान विषाणु विज्ञान संस्थान में कई अनुसंधानकर्ता नवंबर 2019 में बीमार पड़ गए थे और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था. इस नये ब्योरे से बाइडन प्रशासन पर घातक वायरस की उत्पत्ति को लेकर विस्तृत जांच का आदेश देने का नये सिरे से दबाव बना है.

    वहीं अमेरिका और ब्रिटेन कोविड-19 की संभावित उत्पत्ति की गहराई से जांच करने को लेकर पहले से ही विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) पर लगातार दबाव बना रहे हैं. दोनों देशों का मानना है कि कोरोना वायरस की उत्पत्ति का पता लगाने के लिए WHO की टीम को चीन का नये सिरे से दौरा करना चाहिए.

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    WHO और चीनी विशेषज्ञों ने मार्च में एक रिपोर्ट जारी करके इस महामारी के उत्पन्न होने की चार संभावनाओं के बारे में जानकारी दी थी. इस संयुक्त टीम का मानना है कि इस बात की प्रबल आशंका है कि कोरोना वायरस चमगादड़ों से किसी अन्य जानवर के माध्यम से लोगों में प्रवेश कर गया. संयुक्त टीम ने कहा कि इसकी संभावना ‘‘बेहद कम’’ है कि यह वायरस किसी प्रयोगशाला में तैयार किया गया.

    कोविड-19 का पहली बार 2019 के अंतिम महीनों में चीन के मध्य में स्थित शहर वुहान में पता चला था. विश्व भर में वायरस की पहुंच की पुष्टि होने के बाद से संक्रमण के 16.8 करोड़ से ज्यादा मामलों की दुनिया भर में पुष्टि हुई है और करीब 35 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हुई है.
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