Vikas Dubey Encounter: साढ़े तीन महीने बाद भी गैंगस्टर विकास दुबे के खिलाफ पुलिस के अलावा और कोई गवाह नहीं

गत 10 जुलाई को यूपी पुलिस ने मुठभेड़ में गैंगस्टर विकास दुबे को मार गिराया था. (फाइल फोटो)
गत 10 जुलाई को यूपी पुलिस ने मुठभेड़ में गैंगस्टर विकास दुबे को मार गिराया था. (फाइल फोटो)

Vikas Dubey Encounter Updates: कानपुर के कुख्यात गैंगस्टर विकास दुबे (Vikas Dubey Encounter) और उसके गुर्गों के एनकाउंटर की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की ओर से गठित जस्टिस चौहान आयोग को पुलिस थिअरी के खिलाफ कोई गवाह नहीं मिला है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 21, 2020, 11:44 AM IST
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नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश के कुख्यात गैंगस्टर विकास दुबे (Vikas Dubey Encounter) और उसके गुर्गों के एनकाउंटर की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की ओर से गठित जस्टिस चौहान आयोग को पुलिस थिअरी के खिलाफ कोई गवाह नहीं मिला है. पैनल के सूत्रों का कहना है कि अभी तक किसी भी प्रत्यक्षदर्शी ने अपनी गवाही में पुलिस के बयान का खंडन नहीं किया है. सूत्रों के मुताबिक, 'पैनल ने प्रत्यक्षदर्शियों को सामने आकर बयान देने का काफी प्रचार किया, लेकिन इसमें उन्हें कोई सफलता नहीं मिली है.' जानकारी के लिए बता दें कि इसी साल 10 जुलाई को गैंगस्टर विकास दुबे एनकाउंटर में मारा गया था. विकास के साथ उसके गैंग के कई सदस्य भी मारे गए थे. विकास की मौत के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मुठभेड़ की जांच के लिए एक पैनल का गठन किया था.

सूत्रों का ये भी कहना है कि विकास दुबे के रिश्तेदार भी पैनल को अपना बयान दर्ज करवाने नहीं आए हैं. जिन लोगों ने बयान दर्ज कराया है, उसमें ज्यादातर पुलिस प्रत्यक्षदर्शी हैं जिन्होंने मुठभेड़ से पहले घटनाक्रम का विवरण दिया है.

2 जुलाई को विकास दुबे ने पुलिस पर किया था हमला
पुलिस टीम पर 2 जुलाई को विकास दुबे और उसके गुर्गों ने हमला कर दिया था. इसमें सीओ देवेंद्र मिश्रा समेत 8 पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे. पुलिस ने 1 अक्टूबर को अदालत में चार्जशीट दाखिल की. इसमें 8 सेक्टर के 25 दरोगा और हेड कांस्टेबल सहित 29 सिपाहियों के नाम हैं. इसमें 7 पोस्टमार्टम व अन्य मेडिकल गतिविधियों में शामिल 8 डॉक्टरों का नाम गवाहों की सूची में है. शहीद पुलिसकर्मियों के शवों की जांच के समय बनाए गए 15 गवाह भी शामिल हैं, जिनमें से ज्यादातर पुलिसकर्मियों के परिवार से हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने किया आयोग का गठन


विकास दुबे एनकाउंटर पर पुलिस की थिअरी पर कई सवाल उठने के बाद सुप्रीम कोर्ट में अर्जी भी दाखिल की गई. जिसके बाद कोर्ट ने 22 जुलाई को पूर्व जज बीएस चौहान, इलाहाबाद हाई कोर्ट के पूर्व जस्टिस एसके अग्रवाल और यूपी के पूर्व डीजीपी केएल गुप्ता का एक आयोग का गठन किया और दो महीने के अंदर कोर्ट में रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया था. हालांकि, बाद में कोर्ट ने रिपोर्ट सौंपने की अवधि एक माह और बढ़ा दी.
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