एक पंडाल, बारी-बारी से होती है गणपति पूजा और मुहर्रम की मजलिस

आरती और पूजा के मंत्रों के बाद उसी माइक पर वाइज के उपदेश और धार्मिक कहानियां सुनी जा सकती हैं, सौहार्द्र के लिए प्रशासन की आयोजकों को बधाई

News18Hindi
Updated: September 17, 2018, 9:51 PM IST
एक पंडाल, बारी-बारी से होती है गणपति पूजा और मुहर्रम की मजलिस
सांप्रदायिक सौहार्द्र की सराहना करते अधिकारी
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Updated: September 17, 2018, 9:51 PM IST
गणेशोत्सव और मोहर्रम एक साथ पड़ जाने की वजह से मुंबई के कुछ इलाकों में सांप्रदायिक सौहार्द्र के बेहद खूबसूरत उदाहरण देखने को मिल रहे हैं. मुंबई के मुंब्रा इलाके में एक ही पंडाल में गणपति पूजा और मुहर्रम की मजलिस हो रही है.

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मुंब्रा के सैनिक नगर में एक ही पंडाल में एक तरफ गणपति की पूजा हो रही है, तो दूसरी ओर मुहर्रम के वाइज यानी धर्मोपदेशक की मजलिस भी बैठ रही है. यहां हुसैनी कमेटी की ओर से हर साल मुहर्रम में दस दिन के लिए वाइज की मजलिस की जाती है. इसमें धर्मोपोदेशक धर्म की कथा की व्याख्या करता है. जबकि इसी जगह पर हर साल एकता मित्र मंडल की ओर से गणपति की मूर्ति स्थापित की जाती है.

इस साल दोनों त्योहार एक साथ ही पड़ जाने के कारण दोनों धर्मों के लोगों ने एक ही मंडप में मिल कर दोनों के आयोजन करने का फैसला किया. यहां सिर्फ एक ही मंडप का प्रयोग नहीं किया जा रहा है, बल्कि माइक और लाउडस्पीकर समेत दूसरे जरूरी सामानों का भी मिल जुल कर इस्तेमाल किया जा रहा है.

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पूजा और आरती के जयकारों के नारे खत्म होने के तुरंत बाद लाउडस्पीकर से कर्बला की लड़ाई और सच्चाई की राह पर चलने वालों की प्रेरक कथाओं के बारे में वाइज के उपदेश शुरु हो जाते हैं. एक बार मजलिस में वाइज की तकरीर खत्म हो जाती है तो उसी माइक को दुबारा गणपति पूजा के लिए मंडप में रख दिया जाता है. पुलिस और प्रशासन के अफसरों ने आपसी सौहार्द्र के लिए दोनों समुदायों के लोगों की सराहना की है और उन्हें बधाई भी दी है.
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