आजादी के बाद सबसे निचले स्तर पर आ सकती है GDP, राहुल गांधी ने कहा- मोदी है तो मुमकिन है

आजादी के बाद सबसे निचले स्तर पर आ सकती है GDP, राहुल गांधी ने कहा- मोदी है तो मुमकिन है
राहुल गांधी ने इकॉनमी के मुद्दे पर टिप्पणी की है.

राहुल गांधी (Rahul Gandi) ने कोरोना के चलते प्रभावित हुई अर्थव्यवस्था (Indian Economy) के मुद्दे पर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) पर निशाना साधा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 12, 2020, 12:13 PM IST
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नई दिल्ली. कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandi) ने इकोनॉमी (Indian Economy) के मुद्दे पर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  (Narendra Modi) पर निशाना साधा है. यह बात दीगर है कि कोरोना वायरस के चलते देश भर में आर्थिक गतिविधियां अब भी पूरी तरह से नहीं चल पाई हैं. कई राज्यों में वायरस के प्रकोप के चलते सीमित संख्या में फैक्ट्रियां काम कर रही हैं और कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए एक समय में फुल स्ट्रेंथ के साथ कर्मचारी काम नहीं कर पा रहे हैं जिसका असर इकोनॉमी पर भी पड़ रहा है. वहीं कोरोना वायरस के चलते करीब 50 दिनों के सख्त लॉकडाउन (Coronavirus Lockdown) और उस दौरान औद्योगिक शहरों से मजदूरों के पलायन का भी असर देखने को मिल रहा है. इन सबके बीच आशंका जाहिर की जा रही है कि देश की जीडीपी यानी ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट में आजादी के बाद सबसे बड़ी गिरावट आ सकती है. इसी आशंका के मद्देनजर वायनाड सांसद ने सरकार और मोदी पर निशाना साधा है.

राहुल ने एक खबर का स्क्रीनशॉट शेयर कर लिखा- 'मोदी है तो मुमकिन है.' कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने जो खबर शेयर की है उसमें इन्फोसिस के संस्थापक एन आर नारायणमूर्ति ने मंगलवार को आशंका जताई की 'कोरोना वायरस के चलते इस वित्त वर्ष में देश की आर्थिक गति आजादी के बाद सबसे खराब स्थिति में होगी.' उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था को जल्द से जल्द पटरी पर लाया जाना चाहिए.


जीडीपी में आजादी के बाद की सबसे बड़ी गिरावट के आसार : नारायणमूर्ति
मूर्ति ने आशंका जताई कि इस बार सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में स्वतंत्रता के बाद की सबसे बड़ी गिरावट दिख सकती है. नारायणमूर्ति ने ऐसी एक नई प्रणाली विकसित करने पर भी जोर दिया जिसमें देश की अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र में प्रत्येक कारोबारी को पूरी क्षमता के साथ काम करने की अनुमति हो.



मूर्ति ने कहा, ‘भारत की जीडीपी में कम से कम पांच प्रतिशत संकुचन का अनुमान लगाया जा रहा है. ऐसी आशंका है कि हम 1947 की आजादी के बाद की बससे बुरी जीडीपी वृद्धि (संकुचन) देख सकते हैं.’ साफ्टवेयर क्षेत्र में बड़ी पहचान रखने वाले मूर्ति यहां ‘भारत की डिजिटल क्रांति का नेतृत्व’ पर आयोजित एक परिचर्चा में भाग ले रहे थे. वीडियो कन्फ्रेंसिंग के जरिये हुई यह परिचर्चा इंस्टीट्यूट आफ इंजीनियरिंग एण्ड टेक्नालॉजी के ‘इंडिया डिजिटल कन्वर्सेशन के 16वें संस्करण के तहत आयोजित की गई थी. (भाषा इनपुट के साथ)
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