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देश की GDP ग्रोथ घटकर 5.8 फीसदी पर आई, 5 साल में सबसे कम

News18Hindi
Updated: May 31, 2019, 6:35 PM IST
देश की GDP ग्रोथ घटकर 5.8 फीसदी पर आई, 5 साल में सबसे कम
अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर मोदी सरकार की चुनौतियां बढ़ने वाली है. वित्त वर्ष 2018-19 की चौथी तिमाही में देश की आर्थिक विकास दर घटकर 6 प्रतिशत से भी नीचे चली गई है.

अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर मोदी सरकार की चुनौतियां बढ़ने वाली है. वित्त वर्ष 2018-19 की चौथी तिमाही में देश की आर्थिक विकास दर घटकर 6 प्रतिशत से भी नीचे चली गई है.

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अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर मोदी सरकार की चुनौतियां बढ़ने वाली है. वित्त वर्ष 2018-19 की चौथी तिमाही में देश की आर्थिक विकास दर घटकर 6 प्रतिशत से भी नीचे चली गई है. जनवरी-मार्च तिमाही में देश का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) महज 5.8 प्रतिशत की दर से बढ़ा है. सांख्यिकी विभाग ने शुक्रवार को विकास दर के आंकड़े जारी किए हैं. भारत की तिमाही जीडीपी ग्रोथ अब दुनिया में सबसे तेज नहीं रही क्योंकि जनवरी-मार्च तिमाही में चीन की ग्रोथ 6.4% रही थी. आपको बता दें कि नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में निर्मला सीतारमण को वित्त मंत्रालय का कार्यभार सौंपा गया है. ऐसे में उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती देश की आर्थिक ग्रोथ को पटरी पर लाने की हैं.

5 साल में सबसे कम रही GDP ग्रोथ
भारतीय अर्थव्यवस्था की ग्रोथ फिस्कल ईयर 2019 की चौथी यानी मार्च 2019 तिमाही में घटकर 5.8 फीसदी पर आ गई है. इससे पहले दिसंबर 2018 तिमाही में यह 6.6 फीसदी थी. वहीं, ज्यादातर अर्थशास्त्री मार्च 2019 तिमाही में GDP की ग्रोथ रेट के 6.3 फीसदी रहने का अनुमान लगा रहे थे.



भारतीय अर्थव्यवस्था की ग्रोथ चीन से कम रह गई है. मार्च 2019 तिमाही में चीन की आर्थिक ग्रोथ 6.4 फीसदी थी. CSO के मुताबिक, रियल या इनफ्लेशन एडजस्ट करने के बाद फिस्कल ईयर 2018-19 में GDP की ग्रोथ 6.8 फीसदी रही है. पिछले साल GDP की ग्रोथ रेट 7.2 फीसदी थी.

वित्त वर्ष 2013-14 के बाद पहली बार भारतीय की सालाना GDP ग्रोथ घटकर इस स्तर पर आई है. मार्च तिमाही के GDP डाटा की बात करें तो यह अप्रैल-जून 2018 के बाद सबसे कम है.

कोटक महिंद्रा बैंक की इकॉनमिस्ट कहती हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था इस समय मुश्किल वित्तीय स्थितियों के साथ-साथ कमजोर ग्लोबल और डोमेस्टिक डिमांड के अलावा प्राइवेट कंजम्प्शन में सुस्ती का सामना कर रही है.क्यों हैं सुस्ती
अमेरिका और चीन व्यापार के मामले में अपने मतभेद दूर नहीं कर पाए हैं और एक-दूसरे के यहां से आने वाले माल पर उन्होंने टैरिफ बढ़ा दिए हैं. नई एनडीए सरकार के सामने कन्ज्यूमर डिमांड तेजी से बढ़ाने की चुनौती है, जिससे ग्रोथ में जान डाली जा सके.

उसे प्राइवेट इन्वेस्टमेंट बढ़ाने के लिए ज्यादा स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स भी करने होंगे. ग्राहकों की मांग में गिरावट और निवेश में सुस्ती के कारण वित्त वर्ष 2019 की दूसरी छमाही में ग्रोथ सुस्त होने की आशंका पहले से थी. आईआईपी वित्त वर्ष 2019 में 3.6 प्रतिशत ही बढ़ा और पूरे साल में मैन्युफैक्चरिंग की ग्रोथ 3.5 प्रतिशत की रही.

ऑटोमोबाइल सेल्स, रेल फ्रेट, पेट्रोलियम प्रॉडक्ट कंजम्प्शन, डोमेस्टिक एयर ट्रैफिक और इंपोर्ट्स (नॉन-ऑइल, नॉन-गोल्ड, नॉन-सिल्वर, नॉन-प्रेशस और सेमी-प्रेशस स्टोन) जैसे कई दूसरे इंडिकेटर्स भी कंजम्पशन, खासतौर से प्राइवेट कंजम्प्शन में सुस्ती का पता दे रहे हैं.

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First published: May 31, 2019, 6:17 PM IST
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