Ghaziabad Video मामले में अब तक पांच लोग हो चुके हैं गिरफ्तार, एक और शिकायत हुई दर्ज, जानें खास बातें

लोनी वायरल वीडियो मामला: पुलिस ने ट्विटर के खिलाफ दर्ज किया मुकदमा. File Photo

गाजियाबाद (Ghaziabad Video Case) में पुलिस ने एक मुस्लिम बुजुर्ग पर हमले में कथित रूप से शामिल 5 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है. यहां जानें अब तक पूरे मामले में क्या क्या हुआ है.

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    गाजियाबाद/नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश स्थित गाजियाबाद (Ghaziabad Video Case) में पुलिस ने एक मुस्लिम बुजुर्ग पर हमले में कथित रूप से शामिल 5 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. पुलिस ने कहा कि हमले में शामिल जिन पांच लोगों की वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी, उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है जबकि अन्य की तलाश जारी है.

    वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अमित पाठक ने बुधवार को कहा, 'अब्दुल समद पर हमले में शामिल इंतजार और सद्दाम उर्फ बौना दोनों को आज गिरफ्तार कर लिया गया है.' गुरुवार को ही इस मामले में दिल्ली में एक शिकायत दर्ज हुई है.

    यहां जानें अब तक पूरे मामले में क्या क्या हुआ है. 
    दिल्ली पुलिस को गाजियाबाद में एक बुजुर्ग मुसलमान पर हमले से जुड़ी वीडियो साझा करने के मामले में अभिनेत्री स्वरा भास्कर, ट्विटर इंडिया के प्रबंध निदेशक मनीष माहेश्वरी और अन्य के खिलाफ शिकायत मिली है. शिकायत तिलक मार्ग पुलिस थाने में की गई है. पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘हमें अभिनेत्री स्वरा भास्कर, ट्विटर इंडिया के प्रबंध निदेशक मनीष माहेश्वरी और अन्य के खिलाफ तिलक मार्ग पुलिस थाने में शिकायत मिली है. मामले की जांच जारी है.’ शिकायत से जुड़ी विस्तृत जानकारी अभी मुहैया नहीं कराई गई.
    उत्तर प्रदेश पुलिस ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो प्रसारित करने के सिलसिले में माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर, एक समाचार पोर्टल और छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. पुलिस ने क्लिप साझा करने को लेकर ट्विटर इंक, ट्विटर कम्युनिकेशन्स इंडिया, समाचार वेबसाइट द वायर, पत्रकारों मोहम्मद जुबैर और राणा अय्यूब, कांग्रेस के नेताओं सलमान निजामी, मशकूर उस्मानी, डॉ. शमा मोहम्मद और लेखिका सबा नकवी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की.
    यूपी पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धाराओं 153 (दंगा भड़काने के इरादे से उकसाना), 153ए (धर्म, वर्ग आदि के आधार पर समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना), 295 ए (किसी वर्ग के धर्म या धार्मिक विश्वास का अपमान करके उसकी धार्मिक भावनाओं को आहत करने के इरादे से जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कृत्य करना), 120बी (आपराधिक साजिश) और अन्य के तहत मामला दर्ज किया है.
    दरअसल, सोशल मीडिया पर 14 जून को सामने आए वीडियो क्लिप में बुजुर्ग मुस्लिम व्यक्ति अब्दुल समद सैफी ने आरोप लगाया कि कुछ युवकों ने उनकी पिटाई की और उनसे ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने के लिए कहा, लेकिन गाजियाबाद पुलिस ने घटना के पीछे कोई साम्प्रदायिक कारण होने से इनकार किया और कहा कि आरोपी उस ताबीज से नाखुश थे जो सैफी ने उन्हें बेचा था.
    ट्विटर और अन्य के खिलाफ प्राथमिकी में कहा गया है कि गाजियाबाद पुलिस ने घटना के तथ्यों के साथ एक स्पष्टीकरण बयान जारी किया था, इसके बावजूद आरोपी ने अपने ट्विटर हैंडल से वीडियो नहीं हटाया. इसमें कहा गया है कि पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया था कि सैफी पर हमला करने वालों में हिंदुओं के साथ-साथ मुस्लिम व्यक्ति भी शामिल थे और यह घटना साम्प्रदायिक नहीं थी, बल्कि उनके बीच निजी विवाद का परिणाम थी.
    इस बीच प्रेस क्लब ऑफ इंडिया (पीसीआई) ने भी पुलिसिया कार्रवाई का संज्ञान लिया और मांग की कि पत्रकारों के खिलाफ प्राथमिकी रद्द की जानी चाहिए क्योंकि यह गाजियाबाद पुलिस द्वारा ‘बदले की भावना’ से की गई कार्रवाई प्रतीत होती है ताकि मीडिया एवं समाज में ‘आतंक का माहौल बनाया जा सके.’

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