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क्या भारत में बढ़ रही है भुखमरी? ग्लोबल हंगर इंडेक्स को लेकर सरकार ने संसद में दी ये सफाई

क्या भारत में बढ़ रही है भुखमरी? ग्लोबल हंगर इंडेक्स को लेकर सरकार ने संसद में दी ये सफाई

2020 में भारत 107 देशों में 94वें स्थान पर था. (सांकेतिक तस्वीर)

2020 में भारत 107 देशों में 94वें स्थान पर था. (सांकेतिक तस्वीर)

Global Hunger Index: भारत 116 देशों के वैश्विक भुखमरी सूचकांक 2021 में फिसलकर 101वें स्थान पर आ गया है. इस मामले में वह अपने पड़ोसी देश पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल से पीछे है. वर्ष 2020 में भारत 94वें स्थान पर था. सहायता कार्यों से जुड़ी आयरलैंड की एजेंसी कंसर्न वर्ल्डवाइड और जर्मनी का संगठन वेल्ट हंगर हिल्फ द्वारा संयुक्त रूप से तैयार की गई रिपोर्ट में भारत में भूख के स्तर को ‘चिंताजनक’ बताया गया है. वर्ष 2020 में भारत 107 देशों में 94वें स्थान पर था. अब 116 देशों में यह 101वें स्थान पर आ गया है.

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    नई दिल्ली: सरकार ने शुक्रवार को कहा कि वैश्विक भुखमरी सूचकांक (Global Hunger Index) भारत की सही तस्वीर नहीं दिखाता है क्योंकि यह भूख के मापदंड का एक दोषपूर्ण उपाय है. राज्यसभा में खाद्य और उपभोक्ता मामलों की राज्य मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति (Sadhvi Niranjan Jyoti) ने एक लिखित उत्तर में कहा कि आयरलैंड की एजेंसी कंसर्न वर्ल्डवाइड और जर्मनी का संगठन वेल्ट हंगर हिल्फ द्वारा लाए गए ग्लोबल हंगर इंडेक्स (GHI) 2021 में भारत की रैंकिंग 101वीं है.

    ज्योति ने कहा, “जीएचआई की गणना चार संकेतकों पर आधारित है – अल्पपोषण, कुपोषण, बच्चों की वृद्धि दर और और बाल मृत्यु दर. वैश्विक भुखमरी सूचकांक भारत की वास्तविक तस्वीर को नहीं दर्शाता है क्योंकि यह ‘भूख’ को मापने का त्रुटिपूर्ण तरीका है.” उन्होंने कहा कि केवल एक संकेतक ‘अल्पपोषण’ का सीधा संबंध भूख से है.

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    केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा, “दो संकेतक यानी कुपोषण और बच्चों की वृद्धि दर विभिन्न अन्य कारकों जैसे स्वच्छता, आनुवंशिकी, पर्यावरण और भूख के अलावा भोजन के सेवन के जटिल पारस्परिकता के परिणाम हैं, जिसे जीएचआई में कुपोषण और बच्चों की वृद्धि दर के लिए प्रेरक/परिणाम कारक के रूप में लिया जाता है. इसके अलावा, शायद ही कोई सबूत है कि चौथा संकेतक यानी बाल मृत्यु दर भूख का परिणाम है.”

    वैश्विक भुखमरी सूचकांक 2021 में भारत 101वें स्थान पर
    गौरतलब है कि भारत 116 देशों के वैश्विक भुखमरी सूचकांक (जीएचआई) 2021 में फिसलकर 101वें स्थान पर आ गया है. इस मामले में वह अपने पड़ोसी देश पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल से पीछे है. वर्ष 2020 में भारत 94वें स्थान पर था. भूख और कुपोषण पर नजर रखने वाली वैश्विक भुखमरी सूचकांक की वेबसाइट पर बीते 14 अक्टूबर को बताया गया कि चीन, ब्राजील और कुवैत सहित अठारह देशों ने पांच से कम के जीएचआई स्कोर के साथ शीर्ष स्थान साझा किया है.

    भारत का जीएचआई स्कोर भी गिरा
    सहायता कार्यों से जुड़ी आयरलैंड की एजेंसी कंसर्न वर्ल्डवाइड और जर्मनी का संगठन वेल्ट हंगर हिल्फ द्वारा संयुक्त रूप से तैयार की गई रिपोर्ट में भारत में भूख के स्तर को ‘चिंताजनक’ बताया गया है. वर्ष 2020 में भारत 107 देशों में 94वें स्थान पर था. अब 116 देशों में यह 101वें स्थान पर आ गया है. भारत का जीएचआई स्कोर भी गिर गया है. यह साल 2000 में 38.8 था, जो 2012 और 2021 के बीच 28.8 – 27.5 के बीच रहा.

    भारत की तुलना में नेपाल और बांग्लादेश बेहतर स्थिति में
    जीएचआई स्कोर की गणना चार संकेतकों पर की जाती है, जिनमें अल्पपोषण, कुपोषण, बच्चों की वृद्धि दर और बाल मृत्यु दर शामिल हैं. रिपोर्ट के अनुसार, पड़ोसी देश जैसे नेपाल (76), बांग्लादेश (76), म्यांमार (71) और पाकिस्तान (92) भी भुखमरी को लेकर चिंताजनक स्थिति में हैं, लेकिन भारत की तुलना में अपने नागरिकों को भोजन उपलब्ध कराने को लेकर बेहतर प्रदर्शन किया है.

    (इनपुट भाषा से भी)

    Tags: India, Rajya sabha

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