ट्रांसफर के विरोध में याचिका, SC ने सैन्‍य अधिकारियों को याद दिलाई ज्‍वॉनिंग की शपथ

कोर्ट ने सेना के जवानों को उनकी शपथ 'जल, थल या नभ जहां भी जाने का आदेश मिले वहां जाएंगे' की याद दिलाई. कोर्ट ने आगे कहा कि सेना में कोई भी अधिकारी लड़ाई के काम से इतर नहीं होता है.

Utkarsh Anand | News18Hindi
Updated: September 7, 2018, 7:17 PM IST
ट्रांसफर के विरोध में याचिका, SC ने सैन्‍य अधिकारियों को याद दिलाई ज्‍वॉनिंग की शपथ
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Utkarsh Anand | News18Hindi
Updated: September 7, 2018, 7:17 PM IST
सुप्रीम कोर्ट ने सेना के एक विभाग से दूसरे विभाग में ट्रांसफर को चुनौती दिए जाने की याचिकाओं को खारिज कर दिया. इस मौके पर कोर्ट ने सेना के जवानों को उनकी शपथ 'जल, थल या नभ जहां भी जाने का आदेश मिले वहां जाएंगे' की याद दिलाई. कोर्ट ने आगे कहा कि सेना में कोई भी अधिकारी लड़ाई के काम से इतर नहीं होता है. केवल मेडिकल संगठन से जुड़े अधिकारियों को ही छूट होती है क्‍योंकि उनका काम अंतरराष्‍ट्रीय मानवता कानून के तहत आता है.

आर्मी सर्विस कॉर्प्‍स (एएससी) के एक मेजर व एक लेफ्टिनेंट कर्नल सहित तीन अधिकारियों ने ऑपरेशनल यूनिट और ऑपरेशनल क्षेत्रों में पोस्टिंग को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. इन तीनों की दलील थी कि एएसी नॉन ऑपरेशनल विभाग है और यह केवल प्रमोशन के लिए बना है. इसलिए उन्‍हें ऑपरेशनल इलाकों में तैनात नहीं किया जा सकता.

केंद्र सरकार ने इस याचिका का विरोध किया था. उसकी ओर से कहा गया कि ट्रांसफर न केवल नौकरी की जरूरी घटना है बल्कि नौकरी की एक आवश्‍यक शर्त भी है. साथ ही यह भी कहा गया कि पोस्टिंग उनकी रेजिमेंटल ड्यूटी का हिस्‍सा है और यह उनकी इच्‍छा पर आधारित नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के जवाब को माना और बताया कि एक मजबूत संगठन बनाने के लिए सभी विभाग साथ मिलकर काम करते हैं. जस्टिस इंदु मल्‍होत्रा और रोहिंटन एफ नरीमन की बैंच ने कहा, 'केवल इस आधार पर याचिकाकर्ताओं की दलीलों को मानना कि एएससी नॉन ऑपरेशनल है और यह प्रमोशन है के लिए बनाई गई तो इससे सेना का पूरा ऑपरेशन और ढांचा गड़बड़ा जाएगा.'

इसके बाद कोर्ट ने सेना में शामिल होने के वक्‍त ली गई शपथ याद दिलाई और कहा, 'यह शपथ सभी अधिकारियों पर लागू होती है फिर चाहे वे किसी भी विभाग में हो या सेवा में हो. शपथ के अनुसार अधिकारी जब भी कहा जाए तब ड्यूटी पर जाने को बाध्‍य हैं.'
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