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Goa Elections: उत्पल पर्रिकर की राजनीति अब क्या होगी? पिता मनोहर पर्रिकर अंतिम दिनों तक रहे थे सीएम

उत्पल पर्रिकर (ANI)

उत्पल पर्रिकर (ANI)

Goa Elections : गोवा की पणजी सीट से पूर्व सीएम मनोहर पर्रिकर के बेटे उत्पल पर्रिकर बीजेपी के उम्मीदवार आतानासियो मोन्से ...अधिक पढ़ें

पणजी. गोवा की पणजी सीट से राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी के कद्दावर नेताओं में शुमार रहे मनोहर पर्रिकर के बेटे उत्पल पर्रिकर बीजेपी के उम्मीदवार आतानासियो मोन्सेरात से चुनाव में हार गए हैं. मामूली अंतर से चुनाव हारने वाले उत्पल पर्रिकर ने पहले बीजेपी से पणजी सीट से टिकट मांगा था. भाजपा ने उनको टिकट देने से मना कर दिया और इसके बाद उत्पल पर्रिकर ने पार्टी से बगावत करके निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया. चुनाव में अपनी हार के बाद उत्पल पर्रिकर ने मतगणना स्थल से बाहर निकलते हुए कहा कि वे अपनी लड़ाई से संतुष्ट हैं. लेकिन नतीजे से थोड़ा हताश हैं. बीजेपी से बगावत करने वाले उत्पल पर्रिकर का राजनीतिक भविष्य अब दांव पर है.

मनोहर पर्रिकर का शुमार बीजेपी के ऐसे नेताओं में होता था, जिनका सम्मान और समर्थन बीजेपी के साथ ही हर दल में था. गोवा में उनकी राजनीतिक विरासत का सबसे प्रमुख दावेदार उनके बेटे उत्पल पर्रिकर को समझा जा रहा था. ये अलग बात है कि मनोहर पर्रिकर ने जीवित रहते अपने बेटे उत्पल के लिए कोई राजनीतिक मंच बनाने का काम नहीं किया. उनकी मौत के बाद गोवा में प्रमोद सावंत को मुख्यमंत्री पद दिया गया. जो पर्रिकर के काफी करीबी माने जाते थे.

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इस बात की उम्मीद थी इस बार के विधानसभा चुनाव में उत्पल पर्रिकर की इच्छा को देखते हुए बीजेपी का नेतृत्व उनको चुनावी राजनीति में उतरने का मौका दे सकता है. लेकिन बीजेपी के गोवा और केंद्र के नेताओं ने उत्पल पर्रिकर की मांग को नकार कर उनके लिए बगावत या चुप रहने के केवल दो ही विकल्प छोड़े थे. उत्पल पर्रिकर ने बगावत करके निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया. अब नतीजे के सामने आने के बाद उत्पल को भविष्य में खुद को राजनीति में स्थापित करने का कोई और रास्ता खोजना होगा. बीजेपी से बगावत करके उत्पल ने एक तरह से अपने राजनीतिक भविष्य को अंधेरे में डाल दिया है. अब अगर बीजेपी में उनकी वापसी होती है तो ये उनके लिए किसी नए जीवनदान से कम नहीं होगा. मनोहर पर्रिकर के शुभचिंतकों की बीजेपी में कमी नहीं है. अब ये देखना दिलचस्प होगा कि कौन उत्पल के लिए बीजेपी में जगह बनाता है या उत्पल को किसी दूसरे दल की शरण में जाना होगा.

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