खुशखबरी : घट गई अल्पसंख्यक छात्राओं के स्कूल छोड़ने की दर, यह है वजह

खुशखबरी : घट गई अल्पसंख्यक छात्राओं के स्कूल छोड़ने की दर, यह है वजह
प्रतीकात्म फोटो.

यह दर कैसे घटी, इसके पीछे कई सारी वजहों का ज़िक्र भी मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी (Mukhtar abbas naqvi) ने किया है. उनका कहना है कि हमारी कोशिश 32 फीसद दर को भी 00 करने की है.

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नई दिल्ली. स्कूल (School) जाने वालीं अल्पसंख्यक छात्राएं (Minority Girls) अब कम संख्या में अपनी पढ़ाई को बीच में छोड़ रही हैं. वो अपनी आगे की पढ़ाई को लगातार जारी रख रही हैं. यह खुशखबरी खुद अल्पसंख्यक मंत्रालय ने शेयर की है. नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) सरकार की 6 साल की कामयाबी को बताते हुए केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी (Mukhtar abbas naqvi) ने यह आंकड़े साझा किए हैं.

उनका कहना है कि 6 साल में ही स्कूल छोड़ने की यह दर 72 फीसद से घटकर 32 फीसदी रह गई है. यह दर कैसे घटी, इसके पीछे कई सारी वजहों का ज़िक्र भी मंत्री नकवी ने किया है. उनका कहना है कि हमारी कोशिश 32 फीसद दर को भी 00 करने की है.

मंत्री नकवी ने दर कम होने की यह बताईं वजह
अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी का कहना है कि स्कूल ड्रॉप आउट रेट कम करने के लिए हमने मुस्लिम क्षेत्रों में शिक्षा के ढांचे पर काम किया. अपनी सरकार के बीते 6 साल में हमने 1512 स्कूल, 22542 एक्सट्रा क्लास रूम, 8820 स्मार्ट क्लास रूम, 630 हॉस्टल, 152 रेजीडेंशियल स्कूल, 32 कॉलेज, 94 आईटीआई, 13 पॉलीटेक्निक और दो नवोदय स्कूल खोले गए. इतना ही नहीं पढ़ाई की जरूरतें बीच में रोड़ा न बनें इसके लिए 6 साल में 3.80 करोड़ अल्पसंख्यकों छात्र-छात्राओं को स्कॉलरशिप दी गई.



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मुख्तार अब्बास नकवी. (फाइल फोटो)




छात्राओं को सरकार पढ़ाई के लिए ऐसे दे रही मदद
बेगम हज़रत महल छात्रवृत्ति योजना के तहत मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, जैन और पारसी समुदाय की छात्राओं को पढ़ाई के लिए प्रतिवर्ष मदद दी जाती है. योजना में कक्षा 9 से 10 के तहत 5 हजार और कक्षा 11 से 12वीं तक के लिए 6 हजार रुपये की मदद दी जाती है. छात्रवृत्ति की रकम सीधे लाभार्थी छात्रा के बैंक खाते में भेजी जाती है.

50 फीसद की हिस्सेदारी दे रही है सरकार
इस बारे में मौलाना आज़ाद एजुकेशन फाउंडेशन, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय, भारत सरकार के उपाध्यक्ष अशफाक सैफी का कहना है कि अल्पसंख्यक लड़कियों के स्कूल ड्रॉप आउट रेट कम होने के पीछे एक सबसे बड़ी वजह यह है कि केंद्र सरकार कुछ छात्रवृत्तियां तो सिर्फ लड़कियों को ही दे रही है. वहीं और दूसरी योजनाओं में लड़कियों की हिस्सेदारी 50 फीसद तय कर दी है.

हालात ने तालीम के लिए जागरूक बनाया अल्पसंख्यकों को
वहीं इस बारे में जब सिविल सर्विस की कोचिंग देने वाले और शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाले समीर सिद्दीकी से बात की गई तो उन्होंने बताया कि यह बदलाव बीते कुछ बरस के हालात से आए हैं. अब अल्पसंख्यकों खासतौर से मुसलमानों को शिक्षा का महत्व समझ आ गया है. उसमें भी लड़कियों की तालीम को लेकर मुसलमान खासे जागरूक हुए हैं. मैं सिविल सर्विस की परीक्षा के आंकड़े देखता हूं तो वहां भी लड़कियों की संख्या बढ़ी है.

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First published: June 2, 2020, 4:12 PM IST
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