किसानों के अच्छे दिन, खेती-किसानी से जुड़ा है हर चौथा सांसद!

पढ़ाई लिखाई से कामकाज तक...17वीं लोक सभा के सदस्यों के बारे में जानिए सबकुछ!

ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: May 25, 2019, 2:57 PM IST
किसानों के अच्छे दिन, खेती-किसानी से जुड़ा है हर चौथा सांसद!
नए सदस्यों के स्वागत को तैयार है संसद!
ओम प्रकाश
ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: May 25, 2019, 2:57 PM IST
मोदी सरकार तो किसानों पर फोकस कर ही रही है, जनता ने 17वीं लोकसभा के लिए जिन नेताओं को अपना सांसद चुना है उनमें से करीब 38 फीसदी ने खुद को किसान बताया है. जबकि 2014 में सिर्फ 28.29 फीसदी (146) सांसद ही किसान थे. तो उम्मीद कीजिए कि इस बार कृषि से जुड़ी समस्याओं को ये सांसद देश की सबसे बड़ी पंचायत में बहुत मजबूती से उठाएंगे और किसानों के अच्छे दिन आएंगे. 17वीं लोकसभा में और क्या खास है? इस बार 39 फीसदी सांसदों ने अपना पेशा राजनीति और सामाजिक कार्य बताया है. जबकि पिछली बार सिर्फ 7.36 परसेंट ही ऐसे सांसद थे. इस बार 23 फीसदी ने खुद को व्यापारी, चार-चार फीसदी ने वकील और तीन फीसदी ने खुद को आर्टिस्ट बताया है. 2014 में 10.47 फीसदी वकील चुने गए थे.

17वीं लोकसभा में तीन सौ सांसद पहली बार चुनकर पहुंचे हैं. जबकि 16वीं लोकसभा यानी 2014 में 314 नेता पहली बार सांसद चुने गए थे. जबकि 17वीं लोकसभा में सबसे अनुभवी सांसद संतोष गंगवार और मेनका गांधी हैं. दोनों ने आठवीं बार जीत दर्ज की है. (ये भी पढ़ें: बीजेपी ने सबसे अधिक सुरक्षित लोकसभा सीटों पर यूं ही नहीं किया कब्जा!)

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पढ़ाई-लिखाई और उम्र  

इस बार 394 सांसद ग्रेजुएट या उससे ज्यादा जबकि 27 फीसदी 12वीं से कम पढ़े-लिखे हैं. जबकि 2014 में 20 फीसदी सांसद ही ऐसे थे. जबकि पीएचडी सिर्फ चार फीसदी ही चुने गए हैं. इस बार सांसदों की औसत उम्र 54 साल है. देश के 12 फीसदी नए सांसदों की उम्र 40 साल से कम है. जबकि 2014 में आठ फीसदी सांसद ही इस उम्र वर्ग के थे.

महिला सांसद

2014 के लोकसभा चुनाव में 62 महिलाएं चुनी गईं थीं जबकि इस बार 78 महिलाएं संसद पहुंचेंगी. एक तरह से महिलाओं का प्रतिनिधित्व पांच फीसदी बढ़ गया है. 2009 में 59 थीं, 1952 में 22, 1971 में 21 और 1977 में सिर्फ 19 महिलाएं ही चुनकर आई थीं,  पहली लोकसभा में 24 महिला सांसद थीं
मुस्लिम सांसद बढ़े

2014 में यूपी से एक भी मुस्लिम सांसद नहीं चुना गया था जबकि 2019 में 6 सांसद बन गए हैं. पिछली बार देश में 23 मुस्लिम सांसद ही थे जबकि इस बार 27 चुने गए हैं. 2009 में 34 सांसद चुने गए थे. 2004 में 34 सांसद चुने गए थे. सबसे ज्यादा 49 मुस्लिम सांसद 1980 में संसद पहुंचे थे.

निर्दलीय सांसद

इस बार चार निर्दलीय सांसद चुने गए हैं, जबकि 2014 से एक ज्यादा. 1951 में हुए पहले चुनाव में 533 निर्दलीय लड़े और 37 जीते थे, 1991-91 में सिर्फ एक निर्दलीय जीता, सबसे ज्यादा 42 निर्दलीय 1957 में जीते थे.

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रिकॉर्ड वोटों से जीत-हार

सबसे कम वोट से यूपी के मछलीशहर के भोलानाथ ने चुनाव जीता. उन्होंने बीएसपी के त्रिभुवन राम को 181 वोटों से हराया. यहां 10,830 वोट नोटा को मिले. जबकि सबसे ज्यादा 6.89 हजार वोट के अंतर से बीजेपी ने गुजरात की नवसारी सीट जीती. यहां बीजेपी के सीआर पाटिल को 9,72, 739 वोट (74.4%) मिले जबकि कांग्रेस के धर्मेश भाई पटेल को 2,83,071 वोट (21.6%) मिले.

रिकॉर्ड वोटों से जीतने वाले दो हरियाणा से  

सबसे ज्यादा वोटों से जीत दर्ज करने वाले अन्य लोगों में करनाल (हरियाणा) से संजय भाटिया ने कांग्रेस के कुलदीप शर्मा को 6,56,142 वोटों से हराया. भाटिया को 9,11,594 वोट मिले. हरियाणा के ही फरीदाबाद से कृष्णपाल गुर्जर ने कांग्रेस के अवतार भड़ाना को 6,38,239 वोट से शिकस्त दी. उन्हें 9,13, 222 वोट मिले.

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