कोर्ट में केस पेंडिंग होने के बावजूद राम मंदिर के लिए कानून बना सकती है सरकार: जस्टिस चेलमेश्वर

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्ती चेलमेश्वर की फाइल फोटो
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्ती चेलमेश्वर की फाइल फोटो

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्ती चेलमेश्वर ने यह टिप्पणी ऐसे समय में की है, जब अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ करने के लिए एक कानून बनाने की मांग संघ परिवार में बढ़ती जा रही है.

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सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्ती चेलमेश्वर ने शुक्रवार को मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि सुप्रीम कोर्ट में केस पेंडिंग होने के बावजूद सरकार राम मंदिर निर्माण के लिए कानून बना सकती है. उन्होंने कहा कि विधायी प्रक्रिया द्वारा अदालती फैसलों में अवरोध पैदा करने के उदाहरण पहले भी रहे हैं.

जस्टिस चेलमेश्वर ने यह टिप्पणी ऐसे समय में की है, जब अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ करने के लिए एक कानून बनाने की मांग संघ परिवार में बढ़ती जा रही है.

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कांग्रेस पार्टी से जुड़े संगठन ऑल इंडिया प्रोफेशनल्स कांग्रेस (एआईपीसी) की ओर से आयोजित एक परिचर्चा सत्र में जस्टिस चेलमेश्वर ने यह टिप्पणी की. जब चेलमेश्वर से पूछा गया कि सुप्रीम कोर्ट में केस पेंडिंग रहने के दौरान क्या संसद राम मंदिर के लिए कानून पारित कर सकती है, इस पर उन्होंने कहा कि ऐसा हो सकता है.
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उन्होंने कहा, ‘यह एक पहलू है कि कानूनी तौर पर यह हो सकता है (या नहीं). दूसरा यह है कि यह होगा (या नहीं). मुझे कुछ ऐसे मामले पता हैं जो पहले हो चुके हैं, जिनमें विधायी प्रक्रिया ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों में अवरोध पैदा किया था.’

चेलमेश्वर ने कावेरी जल विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश पलटने के लिए कर्नाटक विधानसभा द्वारा एक कानून पारित करने का उदाहरण दिया. उन्होंने राजस्थान, पंजाब और हरियाणा के बीच जल विवाद से जुड़ी ऐसी ही एक घटना का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा, ‘देश को इन चीजों को लेकर बहुत पहले ही खुला रुख अपनाना चाहिए था...  यह (राम मंदिर पर कानून) संभव है, क्योंकि हमने इसे उस वक्त नहीं रोका.’

इस साल की शुरुआत में जस्टिस चेलमेश्वर सुप्रीम कोर्ट के उन चार वरिष्ठ न्यायाधीशों में शामिल थे, जिन्होंने संवाददाता सम्मेलन कर तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के कामकाज के तौर-तरीके पर सवाल उठाए थे.

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