केंद्र सरकार ने कहा-अस्पताल में भर्ती कोरोना मरीज के बारे में परिजनों को बताने का हो इंतजाम

हेल्थ मिनिस्ट्री के मुताबिक राज्यों से गया है कि मरीज की स्थिति के बारे में अटेंडेंट को बताया जाए ताकि भय का माहौल कम हो.(सांकेतिक फोटो)

हेल्थ मिनिस्ट्री के मुताबिक राज्यों से गया है कि मरीज की स्थिति के बारे में अटेंडेंट को बताया जाए ताकि भय का माहौल कम हो.(सांकेतिक फोटो)

Coronavirus Patients: हेल्थ मिनिस्ट्री के मुताबिक राज्यों से गया है कि मरीज की स्थिति के बारे में अटेंडेंट को बताया जाए ताकि भय का माहौल कम हो. ये भी कहा गया है कि अटेंडेंट के बैठने के लिए सुविधा बनाई जाए, जहां पर एक टेलिफोन लाइन हो जो नर्सिंग स्टेशन से कनेक्ट हो.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 30, 2021, 8:53 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. कोरोना मरीज अस्पताल में या कोविड केयर सेंटर में एडमिट है और बाहर मरीजों के परिजन सोचकर परेशान होते हैं कि मरीज की हालत कैसी है. मरीज की स्थिति की जानकारी ने मिलने की वजह से परिजनों को टेंशन बढ़ रही है. अब केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों से कहा है कि वो मरीज की स्थिति के बारे में उनके अटेंडेंट को बताया जाए.केंद्र ने कहा कि वीडियो कॉल या ऑडियो कॉल का इंतजाम करके मरीज की जनाकारी परिजनों को दी जा सकती है.

हेल्थ मिनिस्ट्री के मुताबिक राज्यों से गया है कि मरीज की स्थिति के बारे में अटेंडेंट को बताया जाए ताकि भय का माहौल कम हो. ये भी कहा गया है कि अटेंडेंट के बैठने के लिए सुविधा बनाई जाए, जहां पर एक टेलिफोन लाइन हो जो नर्सिंग स्टेशन से कनेक्ट हो. एक सीनियर डॉक्टर दिन के तय समय में आकर अटेंडेंट को मरीज के बारे में बताएं. साथ ही मरीज की स्थिति के हिसाब से सुनिश्चित करें कि जितने भी अटेंडेंट हैं वो अपने मरीज से ऑडियो या विडियो कॉल के जरिए बात कर सकें.

रिपोर्ट नेगेटिव आने के 2 सप्ताह ले सकते हैं वैक्सीन

एम्स के डायरेक्टर डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा कि अगर कोविड ठीक हो गया है तो उसके कम से कम दो हफ्ते इंतजार करना चाहिए और फिर उसके बाद वैक्सीन लगानी चाहिए.गुलेरिया ने बताया कि कोरोना हुआ है और ठीक हो गया है तब भी वैक्सीन लगानी जरूरी है. उन्होंने कहा कि अगर किसी वजह से वैक्सीन का दूसरा डोज लगाने में देरी हो जाए तो घबराना नहीं चाहिए. दूसरा डोज लगने में कुछ दिन या कुछ हफ्ते की देरी हो जाए तो इसका मतलब ये नहीं है कि वैक्सीन का असर नहीं होगा. तब भी वैक्सीन लगाने के बाद वह बूस्टर इफेक्ट देगा.




ये भी पढ़ेंः- चुनाव खत्म! बंगाल में कोरोना पाबंदियों का ऐलान, मॉडर्न शॉप्स बंद, सुबह 7 से 10 खुलेंगे हाट





डॉ. गुलेरिया ने कहा कि कई लोगों में कंफ्यूजन है कि होम आइसोलेशन कब पूरा माना जाए. उन्होंने कहा कि जब से लक्षण आए उसके 10 दिन बाद या एसिमप्टोमेटिक केस में जब सैंपल दिया गया उसके 10 दिन बाद आइसोलेशन पूरा माना जा सकता है, लेकिन आखिरी तीन दिन बुखार या कोई और लक्षण नहीं होना चाहिए. उन्होंने कहा कि इसके बाद टेस्ट कराने की जरूरत नहीं है. यह गाइडलाइन में इसलिए डाला गया है क्योंकि माइल्ड केस में 7-8 दिन में वायरस डेड हो जाता है. वह फिर किसी को संक्रमित नहीं कर सकता. लेकिन आरटीपीसीआर में कई बार डेड वायरस भी पॉजिटिव होने का संकेत दे देता है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज