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जीडीपी पर सरकार ने कहा- संकेतकों के विश्लेषण पर आधारित है डॉ. अरविंद सुब्रमण्यम की रिपोर्ट

News18Hindi
Updated: June 11, 2019, 10:43 PM IST
जीडीपी पर सरकार ने कहा- संकेतकों के विश्लेषण पर आधारित है डॉ. अरविंद सुब्रमण्यम की रिपोर्ट
सांकेतिक तस्वीर

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने समय-समय पर जीडीपी संकलन में शामिल जटिलताओं को समझाने के लिए विवरण जारी किया है.

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  • Last Updated: June 11, 2019, 10:43 PM IST
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सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने जीडीपी को लेकर अपना स्पष्टीकरण जारी किया है. इस स्पष्टीकरण में मंत्रालय ने कहा है कि डॉ. अरविंद सुब्रमण्यम का हवाला देते हुए मीडिया के एक हिस्से में रिपोर्ट सामने आई है, जो मुख्य रूप से संकेतकों के विश्लेषण पर आधारित है, जैसे कि बिजली की खपत, दोपहिया वाहनों की बिक्री, वाणिज्यिक वाहन बिक्री आदि जैसे अर्थमितीय मॉडल और संबद्ध धारणाओं का उपयोग करना. मंत्रालय द्वारा जारी जीडीपी का अनुमान स्वीकृत प्रक्रियाओं, कार्यप्रणाली और उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित है और यह अर्थव्यवस्था में विभिन्न क्षेत्रों के योगदान को मापता है.

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने साफ किया है कि मंत्रालय की तरफ से समय-समय पर जीडीपी संकलन में शामिल जटिलताओं को समझाने के लिए विवरण जारी किया गया है. किसी भी अर्थव्यवस्था में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की गणना कठिन कार्य है, जहां अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन को बेहतर ढंग से मापने के लिए कई उपाय और मैट्रिक्स विकसित किए जाते हैं. वैश्विक मानकीकरण और तुलनात्मकता के उद्देश्य से, देश में विस्तृत परामर्श के बाद संयुक्त राष्ट्र में विकसित राष्ट्रीय लेखा प्रणाली का पालन करते हैं. राष्ट्रीय खातों के लिए नेशनल अकाउंट्स 2008 (2008 एसएनए) की प्रणाली अंतरराष्ट्रीय सांख्यिकीय मानक का नवीनतम संस्करण है.

मंत्रालय के अनुसार किसी भी अंतर्राष्ट्रीय मानक के लिए डेटा की बहुत अधिक आवश्यकता होती है और भारत जैसी विविध अर्थव्यवस्थाओं को एसएनए आवश्यकताओं के साथ पूरी तरह से जुड़ने से पहले प्रासंगिक डेटा स्रोतों को विकसित करने में समय लगता है. डेटा की अनुपस्थिति में, जीडीपी/जीवीए के लिए विभिन्न क्षेत्रों के योगदान का अनुमान लगाने के लिए वैकल्पिक स्रोतों या सांख्यिकीय सर्वेक्षणों का उपयोग किया जाता है. एसएनए यह भी निर्धारित करता है कि अनुमानों के आधार वर्ष को समय-समय पर संशोधित किया जा सकें ताकि आर्थिक वातावरण में बदलाव, पद्धतिगत अनुसंधान में प्रगति और उपयोगकर्ताओं की आवश्यकताओं पर उचित रूप से कार्य किया जा सके.

अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक परिवर्तन के साथ, सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी), औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी), उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आदि जैसे बड़े आर्थिक संकेतकों के आधार वर्ष को संशोधित करना आवश्यक है, ताकि समय-समय पर यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे प्रासंगिक बने रहें और संरचनात्मक परिवर्तनों को वास्तविक रूप से प्रतिबिंबित करते रहे. इस तरह के संशोधन न केवल सेंसर और सर्वेक्षण से नए डेटा का उपयोग करते हैं, बल्कि उनमें प्रशासनिक डेटा की जानकारी भी शामिल होती है. भारत में, सकल घरेलू उत्पाद श्रृंखला का आधार वर्ष 2004-05 से 2011-12 तक संशोधित किया गया और 30 जनवरी, 2015 को एसएनए 2008 के अनुरूप स्रोतों और विधियों के अनुकूलन के बाद जारी किया गया.

भारत ने अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के विशेष डेटा प्रसार मानक (एसडीडीएस) की सदस्यता ली है और अनुमान जारी करने के लिए एक एडवांस रिलीज कैलेंडर तय किया गया है. आईएमएफ ने भारतीय जीडीपी श्रृंखला में दोहरे अपस्फीति के उपयोग पर कुछ मुद्दे उठाए थे और भारत ने आईएमएफ को सूचित किया था कि मौजूदा डेटा उपलब्धता वर्तमान में भारत में इसके आवेदन की अनुमति नहीं देती है. राष्ट्रीय लेखा सांख्यिकी (ACNAS) की सलाहकार समिति ने इस स्तर पर दोहरे अपस्फीति को अपनाने पर सहमति नहीं दी थी. इसके अलावा दोहरे अपस्फीति का उपयोग केवल कुछ देशों में किया जाता है.

विश्व बैंक के अनुसार, राष्ट्रीय खातों की सटीकता का अनुमान और तुलना का अनुमान डेटा के समय पर संशोधन पर निर्भर करता है. अलग-अलग देशों में जीडीपी की गणना अलग-अलग तरीके-मासिक त्रैमासिक या वार्षिक होती है. इसके अलावा, आईएमएफ के अनुच्छेद IV के तहत एक मिशन सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय, भारतीय रिजर्व बैंक और वित्त मंत्रालय के अधिकारियों के साथ आर्थिक विकास और नीतियों से संबंधित मुद्दों पर सालाना बातचीत करता है. जीडीपी के संकलन के लिए बैक सीरीज सहित विस्तृत कार्यप्रणाली मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध है.

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First published: June 11, 2019, 10:10 PM IST
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