‘सिख फॉर जस्टिस’ पर प्रतिबंध के लिए सरकार ने कमेटी का किया गठन

इस तरह के न्यायाधिकरण का गठन गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) कानून के तहत किया जाता है ताकि प्रतिबंधित इकाई को अपना पक्ष रखने के लिए एक मौका दिया जा सके.

भाषा
Updated: August 8, 2019, 6:08 PM IST
‘सिख फॉर जस्टिस’ पर प्रतिबंध के लिए सरकार ने कमेटी का किया गठन
प्रतीकात्मक तस्वीर
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Updated: August 8, 2019, 6:08 PM IST
केंद्र सरकार ने यह फैसला करने के लिए एक न्यायाधिकरण की स्थापना की है कि खालिस्तान समर्थक समूह ‘सिख फॉर जस्टिस’ पर प्रतिबंध लगाने के लिए पर्याप्त कारण हैं या नहीं. पिछले महीने इस संगठन को गैर-कानूनी घोषित किया गया था.

प्रतिबंध लगाते समय गृह मंत्रालय ने कहा था कि समूह का प्राथमिक उद्देश्य पंजाब में एक स्वतंत्र और संप्रभु देश की स्थापना करना है और यह खुले आम खालिस्तान के विचार का समर्थन करता है. इस प्रक्रिया में, भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को चुनौती देता है.

चीफ जस्टिस के अगुवाई में बनाई कमेटी

गृह मंत्रालय द्वारा जारी एक अधिसूचना के अनुसार गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) कानून 1967 की धारा 5 की उप-धारा (1) द्वारा प्रदत्त शक्तियों के तहत केंद्र सरकार गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) न्यायाधिकरण का गठन करती है. इसमें दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डीएन पटेल होंगे.

इस तरह के न्यायाधिकरण का गठन गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) कानून के तहत किया जाता है ताकि प्रतिबंधित इकाई को अपना पक्ष रखने के लिए एक मौका दिया जा सके.

इन देशों में गैरकानूनी घोषित

अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन आदि देशों में विदेशी राष्ट्रीयता वाले कुछ कट्टरपंथी सिखों द्वारा संचालित इस संगठन को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) कानून 1967 की धारा 3 (1) के प्रावधानों के तहत गैरकानूनी घोषित किया गया था.
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First published: August 8, 2019, 5:31 PM IST
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