सरकार का राम मंदिर बनाने का ये है मास्टर प्लान!

दरअसल, ये फैसला सरकार ने नवंबर के पहले हफ्ते में ही ले लिया था, जिसकी ख़बर न्यूज़ 18 ने 10 नवंबर को पब्लिश की थी.

Anil Rai | News18Hindi
Updated: January 29, 2019, 5:10 PM IST
Anil Rai
Anil Rai | News18Hindi
Updated: January 29, 2019, 5:10 PM IST
सुप्रीम कोर्ट में लगातार टल रही सुनवाई के बाद सरकार ने अयोध्या में राम मंदिर को बनाने के लिए अपना मास्टर प्लान चल दिया है. सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से अधिगृहीत भूमि में गैर विवादित भूमि राम मंदिर न्यास को लौटाने की अपील की है. दरअसल, ये फैसला सरकार ने नवंबर के पहले हफ्ते में ही ले लिया था, जिसकी ख़बर न्यूज़ 18 ने 10 नवंबर को पब्लिश की थी.

सूत्रों की मानें तो सरकार ने जो कानूनी सलाह ली है, उसमें एक बात तो साफ है कि सरकार को सुप्रीम कोर्ट में चल रहे किसी मुकदमें में अध्यादेश लाने का पूरा अधिकार है, लेकिन देश की आजादी के बाद से कभी ऐसा नहीं हुआ है. ऐसे में अगर सरकार अध्यादेश लाती है तो उस पर न्यायपालिका के काम में हस्तक्षेप करने का आरोप लगेगा. लेकिन यदि सरकार गैर-विवादित ज़मीन को न्यास को सौंप देती है तो उसमें न्यास मंदिर के निर्माण का काम शुरू कर सकता है. बाकी की विवादित जमीन के लिए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार किया जा सकता है.



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सूत्रों की मानें तो कानून मंत्रालय ने जो रिपोर्ट सरकार को सौंपी है उसके अनुसार सुप्रीम कोर्ट यदि जमीन न्यास को सौंप देता है तो उस पर जल्द से जल्द निर्माण कार्य शुरू किया जा सकता है. हालांकि, यह रास्ता इतना आसान नहीं है. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य जफरयाब जिलानी सरकार की ओर से होने वाले इस तरह के किसी फैसले का विरोध करने की तैयारी में हैं.

न्यूज18 से जिलानी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड सरकार की इस तरह की किसी भी पहल का विरोध करेगी, क्योंकि अधिगृहीत जमीन में कुछ जमीन मुसलमानों की भी है. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने 2003 में अधिगृहीत जमीन के बारे में जो सलाह दी थी उसके अनुसार वहां किसी भी हालत में सरकार मंदिर का निर्माण नहीं कर सकती. जिलानी ने साफ किया एक बार सुप्रीम कोर्ट सरकार की अपील स्वीकार कर ले तो उसके बाद वह अपने कानूनी दांव खोलेंगे.

बता दें कि अयोध्या में बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि विवाद पर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगाई थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि अयोध्या में सिर्फ 2.77 एकड़ जमीन पर विवाद है और बाकी जमीन पर कोई विवाद नहीं है, इसलिए जमीन का कुछ हिस्सा राम जन्मभूमि न्यास को दे दिया जाए.

दरअसल, सरकार के एक धड़े का मानना है कि बिना अध्यादेश के भी मंदिर का काम शुरू किया जा सकता है, जिसका सीधा फायदा बीजेपी को चुनाव में मिलेगा. संविधान विशेषज्ञ भी सरकार के इस धड़े की बात से सहमति जता रहे हैं.
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संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप की मानें, तो सरकार गैर विवादित जमीन पर जब चाहे मंदिर का निर्माण शुरू करा सकती है. इसके लिए सरकार को सिफ गैर-विवादित जमीन को मंदिर निर्माण करने वाले ट्रस्ट को स्थानांतरित करनी है. निर्माण का काम शुरू होने के बाद सरकार चाहे तो अध्यादेश ला सकती है या सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार कर सकती है.

हालांकि, अध्यादेश के मामले में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील एमएल लोहाटी की राय थोड़ी अलग है. लोहाटी का मानना है कि जब कोई मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा हो, तो ऐसे में सरकार को अध्यादेश लाने से बचना चाहिए. हालांकि, वो मान रहे हैं कि सरकार के पास अध्यादेश लाने का पूरा अधिकार है और सरकार जब चाहे अध्यादेश ला सकती है.
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