भारत को सबसे बड़ा मानवजनित सल्फर डाइऑक्साइड उत्सर्जक बताने वाली रिपोर्ट सरकार ने की खारिज

मंत्रालय ने बताया कि फ्लू-गैस के डि-सल्फाराइजेशन के लिए देश में 18 इकाइयां स्थापित की गई हैं (सांकेतिक फोटो)
मंत्रालय ने बताया कि फ्लू-गैस के डि-सल्फाराइजेशन के लिए देश में 18 इकाइयां स्थापित की गई हैं (सांकेतिक फोटो)

कांग्रेस सांसद (Congress MP) रिपुन बोरा ने राज्यसभा (Rajya Sabha) में मंत्रालय (Ministry) से जानना चाहा था कि क्या भारत विश्व का सबसे बड़ा मानवजनित सल्फइर डाइऑक्साइड उत्सर्जक देश (sulfur dioxide emitting country) बन गया है.

  • भाषा
  • Last Updated: September 19, 2020, 9:09 PM IST
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नई दिल्ली. केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय (Union Ministry of Environment) ने शनिवार को उस रिपोर्ट (report) को खारिज कर दिया जिसमें दावा किया गया था कि भारत विश्व का सबसे बड़ा (biggest in the world) मानवजनित (Man made) सल्फर डाइऑक्साइड (एसओटू) उत्सर्जक देश (SO2 Emitting Country) बन गया है. मंत्रालय ने यह भी बताया कि फ्लू-गैस (Flue gas) के डि-सल्फाराइजेशन (De-sulfurisation) के लिए देश में 18 इकाइयां स्थापित की गई हैं.

कांग्रेस सांसद (Congress MP) रिपुन बोरा ने राज्यसभा (Rajya Sabha) में मंत्रालय (Ministry) से जानना चाहा था कि क्या भारत विश्व का सबसे बड़ा मानवजनित सल्फर डाइऑक्साइड उत्सर्जक देश (sulfur dioxide emitting country) बन गया है. इसके जवाब में पर्यावरण राज्यमंत्री बाबुल सुप्रीयो (Minister of State for Environment Babul Supriyo) ने लिखित जवाब में कहा, ‘‘जी नहीं. पर्यावरणीय गैर सरकारी संगठन (NGO), ग्रीनपीस (Greenpeace) के एक अध्ययन में बताया गया है कि भारत, विश्व का सबसे बड़ा मानवजनित सल्फयर डाइऑक्साइड उत्सर्जक बन गया है और इसमें कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्रों (Coal Based Thermal Power Plants) का बड़ा योगदान है.’’ उन्होंने कहा कि सरकार इससे सहमत नहीं है.

मंत्रालय ने 2015 में एक अधिसूचना के जरिए एसओटू उत्सर्जन के मानक निर्धारित किए
उन्होंने बताया कि पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 2015 में एक अधिसूचना के माध्यम से अन्य प्रदूषकों के अलावा ताप विद्युत संयंत्रों से एसओटू के उत्सर्जन के लिए मानक निर्धारित किए हैं.
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उन्होंने कहा, ‘‘इस अधिसूचना से पूर्व कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्रों के लिए एसओटू उत्सर्जन मानक मौजूद नहीं थे और इन्हें चिमनी की ऊंचाई को निर्धारित करने के माध्यरम से उत्सर्जन की ऊचाई के निर्धारण के माध्य्म से विनियमित किया जाता था.’’
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