अल्‍पसंख्‍यक कल्‍याण योजनाओं पर केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा- यह कानूनन वैध, इससे अधिकारों का हनन नहीं

सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया जवाब. (File pic)

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने पिछले हफ्ते सरकार से मामले पर जवाब दाखिल करने को कहा था. अब इस मामले पर 23 जुलाई को अगली सुनवाई हो सकती है.

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    नई दिल्‍ली. अल्‍पसंख्‍यकों (Minority) की बेहतरी और विकास के लिए केंद्र सरकार की ओर से दिए जाने वाले अनुदान का मामला सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) जा पहुंचा है. हालांकि सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से इस अनुदान को जायज ठहराया गया है. अल्‍पसंख्‍यकों को दिए जाने वाले इन अनुदान के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी. जिसके जवाब में सरकार ने हलफनामा दाखिल करते हुए कहा है कि इन योजनाओं का मुख्‍य मकसद सभी वर्गों का संतुलित विकास है. ये योजनाएं बहुसंख्यकों के अधिकारों का हनन नहीं करती हैं. सुप्रीम कोर्ट ने पिछले हफ्ते सरकार से मामले पर जवाब दाखिल करने को कहा था. अब इस मामले पर 23 जुलाई को अगली सुनवाई हो सकती है.

    सुप्रीम कोर्ट में इन योजनाओं के खिलाफ दाखिल की गई याचिका में कहा गया है कि इनके लिए 2019-20 में सरकारी खजाने से 4,700 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया था. इसका कोई प्रावधान संविधान में नहीं है. यह भी कहा गया कि संविधान का अनुच्छेद 29 और 30 अल्पसंख्यकों को उनके लिए शैक्षणिक संस्थान और दूसरी संस्थाएं बनाने का अधिकार देता है. लेकिन संविधान में यह नहीं लिखा है कि उसके लिए सरकार पैसा देगी. याचिका में सरकारी खजाने से पैसा देने पर आपत्ति जताते हुए कहा गया कि संस्थाएं बनाना और उनको चलाना अल्पसंख्यकों को खुद करना चाहिए.

    यह याचिका वकील विष्णु जैन के जरिये दाखिल की गई है. इसमें कहा गया है कि संविधान का अनुच्छेद 27 इस बात की इजाजत नहीं देता कि देश के करदाताओं से लिया गया पैसा सरकार किसी धर्म विशेष को बढ़ावा देने के लिए खर्च करे. लेकिन सरकार वक्फ संपत्ति के निर्माण से लेकर अल्पसंख्यक वर्ग के छात्रों, महिलाओं के उत्थान के नाम पर हजारों करोड़ रुपये खर्च कर रही है. यह बहुसंख्यक वर्ग के छात्रों और महिलाओं के समानता के मौलिक अधिकार का भी हनन है.

    वकील ने पिछले हफ्ते कोर्ट को जानकारी दी थी कि याचिका पर पहली सुनवाई को डेढ़ साल बीत गया है. इसके बावजूद सरकार ने अभी तक जवाब नहीं दाखिल किया है. इस पर एटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने 1 हफ्ते में जवाब दाखिल करने की बात कही थी.

    हालांकि अब सरकार ने कोर्ट में जवाब दाखिल करके कहा है कि यह योजनाएं समानता के मौलिक अधिकार के खिलाफ नहीं हैं. इसके तहत अल्पसंख्यकों में पिछड़े या कमजोर तबकों को प्रोत्साहित किया जा रहा है. गरीब छात्रों को आर्थिक मदद दी जा रही है. महिलाओं को रोजगार देने वाली ट्रेनिंग दी जा रही है.

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