इलेक्ट्रिक वाहनों के जरिए अर्थव्यवस्था को गति देने की तैयारी, ये है मोदी सरकार का लक्ष्‍य

फेम इंडिया स्कीम के तहत केंद्र सरकार देश के 64 शहरों में 5595 इलेक्ट्रिक बसों को उतारने की तैयारी कर चुकी है.

Abhishek Aadha | News18.com
Updated: August 30, 2019, 10:08 PM IST
इलेक्ट्रिक वाहनों के जरिए अर्थव्यवस्था को गति देने की तैयारी, ये है मोदी सरकार का लक्ष्‍य
भारी उद्योग मंत्रालय के अधीन पीएसयू 250 से ज्यादा चार्जिंग स्टेशन लगा चुके हैं.
Abhishek Aadha | News18.com
Updated: August 30, 2019, 10:08 PM IST
केंद्र सरकार (Central Government) देश में इलेक्ट्रिक वाहनों (Electric Vehicles) को बढ़ावा देकर एक तीर से कई निशाने लगाने जा रही है. सरकार की योजना न सिर्फ पेरिस एग्रीमेंट (Paris Climate Agreement) के कमिटमेंट पूरा करने की है, बल्कि ई-व्हीकल के जरिए देश के 150 बिलियन डॉलर बचाने की भी है. केंद्र सरकार की योजना के मुताबिक सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो देश की सड़कों पर डीजल और पेट्रोल से चलने वाले वाहन गुजरे जमाने की बात हो जाएगी.

फेम इंडिया स्कीम के तहत केंद्र सरकार देश के 64 शहरों में 5595 इलेक्ट्रिक बसों को उतारने की तैयारी कर चुकी है. भारी उद्योग मंत्रालय के कई पीएसयू जिस रफ्तार से इस योजना पर काम कर रहे हैं उसे देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि अगले 5 साल में देश में डीजल से चलने वाली बसें ढूंढना भी मुश्किल हो जाएगा.

भारी उद्योग मंत्रालय तैयार कर रहा इंफ्रास्ट्रक्चर
मंत्रालय के पीएसयू न सिर्फ इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने का काम कर रहे हैं, बल्कि योजना के तकनीकी पहलुओं पर भी काम करने में जुटे हुए हैं ताकि कम से कम खर्च में व्हीकल चार्जिंग तेजी से की जा सके. मंत्रालय का पीएसयू राजस्थान इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंस्ट्रूमेंट्स लिमिटेड 250 से ज्यादा चार्जिंग स्टेशन लगा चुका है और वह दिन दूर नहीं जब जयपुर से चंडीगढ़ के बीच 500 किलोमीटर में कुछ दूरी पर व्हीकल चार्जिंग प्वाइंट मिल सकेगा.

भारी उद्योग मंत्रालय के अधीन पीएसयू 250 से ज्यादा चार्जिंग स्टेशन लगा चुके हैं. दिल्ली से जयपुर हाईवे के बीच में औसतन हर 25 से 30 किलोमीटर के बीच की एक व्हीकल चार्जिंग स्टेशन लग चुका है. मुंबई-पुणे हाईवे, अहमदाबाद-बबीता हाईवे, मैसूर-बेंगलुरु हाईवे और जयपुर-चंडीगढ़ हाईवे को इलेक्ट्रिक वाहनों के चार्जिंग के लिए तैयार करने की योजना है.

विदेशी मुद्रा की बचत से मिलेगी आर्थिक समृद्धि
जानकारों की मानें तो 10000 करोड़ के शुरुआती बजट के साथ शुरू की गई फेम इंडिया स्कीम जितनी तेजी से कामयाब होती जाएगी उतनी तेजी से 150 बिलियन डॉलर के तेल आयात पर देश की निर्भरता कम होती जाएगी. इससे न सिर्फ देश में विदेशी मुद्रा की बचत होगी बल्कि अर्थव्यवस्था को अलग स्तर पर गति मिल सकेगी. गौरतलब है कि भारत की विदेशी मुद्रा का बड़ा हिस्सा तेल आयात पर खर्च होता है और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने से तेल पर भारत की निर्भरता तेजी से कम होगी.
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First published: August 30, 2019, 9:29 PM IST
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