भारत के VIPs की जासूसी से हैरानी नहीं, डेटा का गलत इस्तेमाल कर सकता है चीन- अधिकारी

भारत के VIPs की जासूसी से हैरानी नहीं, डेटा का गलत इस्तेमाल कर सकता है चीन- अधिकारी
इस खुलासे से ये साफ हो गया है कि चीन सिर्फ सीमा पर नहीं बल्कि साइबर की दुनिया में भी एक जंग लड़ रहा है. (PTI)

अंग्रेजी वेबसाइट 'इंडियन एक्सप्रेस' ने अपनी रिपोर्ट में रियल टाइम डेटा लीक की जानकारी दी है. इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (Chinese Communist Party) की झेनझुआ डेटा इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी करीब 10 हजार भारतीयों का डेटा इकट्ठा (Real Time Data) कर रहा है. इसमें सोशल मीडिया पर हरकत से लेकर लाइक और कमेंट तक, उनकी होने वाली उपस्थिति तक शामिल है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 14, 2020, 4:33 PM IST
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(अरुणिमा)

नई दिल्ली. भारत-चीन के बीच (India-China Standoff) लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (Ladakh LAC) पर जारी तनावपूर्ण माहौल के बीच एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, चीन की जासूसी कंपनी राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कम से कम 10 हजार भारतीयों का रियल टाइम डेटा (Real Time Data) कलेक्ट कर रही है. चीनी कंपनी ये डेटा कलेक्ट कर अपनी सरकार को सौंपती है, जो भारत के लिए एक बड़ा खतरा साबित हो सकता है. सरकार ने इस रिपोर्ट पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. एक टॉप अधिकारी ने बताया कि इसमें कोई शक या हैरानी वाली बात नहीं है कि चीन ने ऐसा किया होगा? क्योंकि चीन हाइब्रिड वॉर को लेकर पहले भी ऐसी हिमाकत कर चुका है.

दरअसल, अंग्रेजी वेबसाइट 'इंडियन एक्सप्रेस' ने अपनी रिपोर्ट में रियल टाइम डेटा लीक की जानकारी दी है. इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन की झेनझुआ डेटा इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी करीब 10 हजार भारतीयों का डेटा इकट्ठा कर रहा है. इसमें सोशल मीडिया पर हरकत से लेकर लाइक और कमेंट तक, उनकी होने वाली उपस्थिति तक शामिल है. चीनी कंपनी की नजर देश के प्रधानमंत्री से लेकर बड़े बिजनेसमैन, कई राज्यों के मुख्यमंत्रियो, नेताओं, सांसद और खिलाड़ियों पर टिकी है.



ये भी पढ़ें: राष्ट्रपति कोविंद और पीएम मोदी से लेकर उद्योगपति-पत्रकारों तक, इन सभी की निगरानी करा रहा चीन: रिपोर्ट
रिपोर्ट के मुताबिक, ये कंपनी हाइब्रिड वॉरफेयर (Hybrid Warfare) और चीनी राष्ट्र के विस्तार के लिए बिग डेटा के इस्तेमाल में खुद को सबसे बेस्ट बताती है. निगरानी में इन लोगों से जुड़ी हर छोटी से छोटी जानकारी को शामिल किया जा रहा है. जिन लोगों की निगरानी की जा रही है, उनमें पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी, राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत, पंजाब के सीएम कैप्टन अमिरंदर सिंह, महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे, मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान और ओडिशा के सीएम नवीन पटनायक का नाम भी शामिल है.



News18 से बात करते हुए सरकार के एक सीनियर अधिकारी ने बताया, 'सरकार को कहीं न कहीं चीन की इस हरकत के बारे में पता था. इसलिए ही चीनी ऐप्स पर बैन लगाने का फैसला लिया गया, क्योंकि इससे डेटा लीक हो रहा था. चीन की टेक कंपनियां इस डेटा को लीक कर जानकारियां चीनी कम्युनिस्ट पार्टी और एजेंसियों के साथ साझा कर रही थी.'


हालांकि, अधिकारी ने माना कि भारत के वीआईपी जैसे राष्ट्रपति कोविंद, पीएम मोदी, सीजेआई का डेटा भले ही ओपन सोर्स से उठाया गया हो, लेकिन चीन जैसा दुश्मन देश इसका गलत इस्तेमाल कर सकता है. अधिकारी आगे बताते हैं, 'पहली नजर में इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट से ये पता चलता है कि चीन ने इन सभी का डेटा ओपन सोर्स से लिया है. लेकिन, इसमें बड़ी बात ये है कि स्क्रैपिंग सॉफ्टवेयर इन ओपन सोर्स डेटा को डोजियर में बदल सकता है. जिससे एजेंट्स का काम आसान हो जाएगा.'

चीन के मामलों में डील करने वाले एक अन्य अधिकारी ने कहा, 'LAC पर मौजूदा तनाव के संदर्भ में ये मामला बेहद महत्वपूर्ण है. अगर ओपन डेटा का ठीक से एनालिसिस किया जाए, तो चीन को काफी मदद मिल सकती है. इन डेटा का ठीक से एनालिसिस कर चीन भारत के संबंध में अपने तमाम सवालों का करीब 80 फीसदी जवाब पा सकता है, जो भारत के लिए चिंता की बात है.'

इस खुलासे से ये साफ हो गया है कि चीन सिर्फ सीमा पर नहीं बल्कि साइबर की दुनिया में भी एक जंग लड़ रहा है. इसे ही हाइब्रिड वॉरफेयर के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है, जो कि चीनी सेना यानी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के द्वारा तैयार की गई नीति है. इस नई दुनिया में चीन ने अपना फोकस मिलिट्री से हटाकर आम आदमी को साधने पर शुरू कर दिया है, जिसके तहत दूसरे देश के लोगों पर अपनी पकड़ बनाई जा रही है.


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अधिकारी कहते हैं कि वैसे खुद की सुरक्षा के लिए ज्यादातर देश एक दूसरे का डेटा कलेक्ट करते हैं, लेकिन चीन ने इसे नेक्स्ट लेवल पर पहुंचा दिया है. चीन की ओर से ऐसी नीति का इस्तेमाल सिर्फ भारत नहीं बल्कि अमेरिका समेत अन्य देशों में भी किया जा रहा है. अधिकारी का कहना है कि भारत ने हाल ही में कई चीनी ऐप को बैन किया है, लेकिन ये संकट उससे कई बड़ा और अलग है. जो दूसरे देश के राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक ढांचे में घुसकर उसको प्रभावित करता है और अपने लिए इस्तेमाल करता है.
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