विजय माल्या का भारत में प्रत्यर्पण टला, केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया- ब्रिटेन में चल रहा कोई 'गोपनीय केस'

विजय माल्‍या के प्रत्‍यर्पण पर सरकार ने दी जानकारी.
विजय माल्‍या के प्रत्‍यर्पण पर सरकार ने दी जानकारी.

Vijay Mallya case: गृह मंत्रालय ने अवमानना मामले में दायर हलफनामे में कहा है कि यह कानूनी मुद्दा प्रत्यर्पण प्रक्रिया से इतर है. यह गोपनीय है और हमसे इसका खुलासा नहीं किया गया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 6, 2020, 7:00 AM IST
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नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) को बताया कि भगोड़े कारोबारी विजय माल्या (Vijay Mallya) का उस समय तक भारत में प्रत्यर्पण नहीं हो सकता जब तक ब्रिटेन में चल रही एक अलग गोपनीय कानूनी प्रक्रिया का समाधान नहीं हो जाता. सरकार ने कहा कि उसे ब्रिटेन में विजय माल्या के खिलाफ चल रही इस गोपनीय कार्यवाही की जानकारी नहीं है. ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि कहीं विजय माल्‍या वहां शरण न ले ले.

गृह मंत्रालय ने अवमानना मामले में दायर हलफनामे में कहा है कि यह कानूनी मुद्दा प्रत्यर्पण प्रक्रिया से इतर है. यह गोपनीय रखा गया है और हमसे इसका खुलासा नहीं किया गया. अवमानना मामले में कोर्ट माल्या को पहले ही दोषी ठहरा चुका है. माल्या पर अब बंद हो चुकी किंगफिशर एयरलाइंस से संबंधित नौ हजार करोड़ रुपए से अधिक का बैंक कर्ज अदा नहीं करने का आरोप है. माल्या मई 2016 से ब्रिटेन में है और वह स्काटलैंड यार्ड द्वारा 18 अप्रैल, 2017 को प्रत्यर्पण वारंट की तामील के बाद से जमानत पर है.

जस्टिस उदय यू ललित और जस्टिस अशोक भूषण की पीठ ने वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से इस मामले पर सुनवाई की और माल्या के वकील से कहा कि वह दो नवंबर तक उसे इस बात की जानकारी दें कि उसे प्रत्यर्पित करने के लिए किस तरह की गोपनीय कार्यवाही चल रही है. विजय माल्या के वकील अंकुर सैगल से कोर्ट ने कहा कि चूंकि भारत सरकार का कहना है कि उसे कार्यवाही के बारे में कोई जानकारी नहीं है तो उसे कोर्ट को इस बारे में जानकारी देनी होगी और बताना होगा कि वह न्यायलय के समक्ष कब पेश होगा.



इससे पहले शुरू में ही सरकार की ओर से वकील रजत नायर ने पीठ से कहा कि न्यायालय के निर्देशानुसारही प्रत्यर्पण का अनुरोध किया गया है. उन्होंने कहा कि कोई गोपनीय प्रत्यर्पण कार्यवाही चल रही है जिसके बारे में उन्हें जानकारी नहीं है. उन्होंने कहा कि ब्रिटेन की सर्वोच्च अदालत ने माल्या के प्रत्यर्पण की कार्यवाही को बरकरार रखा है लेकिन अभी ऐसा नहीं हो रहा है. शीर्ष अदालत ने इससे पहले माल्या की 2017 की पुनर्विचार याचिका खारिज करते हुए उसे पांच अक्टूबर को न्यायालय में पेश होने का निर्देश दिया था.

कोर्ट ने विजय माल्या को अदालत के आदेशों का उल्लंघन करके अपने बच्चों के खातों में चार करोड़ अमेरिकी डालर हस्तांतरिक करने के मामले में 2017 में उसे अवमानना का दोषी ठहराया था. कोर्ट ने इस मामले को दो नवंबर के लिये सूचीबद्ध करते हुये निर्देश दिया कि विजय माल्या की उपस्थिति सुनिश्चित करने के प्रयास किये जाने चाहिए.
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