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कश्मीर में सरकार 'नए नेताओं की फौज' लाने को तैयार, बीडीसी चुनाव से होगी शुरुआत

News18Hindi
Updated: October 8, 2019, 11:15 PM IST
कश्मीर में सरकार 'नए नेताओं की फौज' लाने को तैयार, बीडीसी चुनाव से होगी शुरुआत
जम्मू कश्मीर में 24 अक्टूबर को बीडीसी चुनाव प्रस्तावित हैं.

जम्मू कश्मीर (Jammu and Kashmir) में एक नई राजनीतिक पंक्ति खड़े होने के लिए तैयार है. जम्मू एंड कश्मीर और लद्दाख के केंद्रशासित प्रदेश बनने के बाद पहली बार ब्लॉक डेवलपमेंट काउंसिल/बीडीसी (BDC) चुनाव 24 अक्टूबर को होने वाले हैं.

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  • Last Updated: October 8, 2019, 11:15 PM IST
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आकाश हसन
श्रीनगर. केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) का विशेष राज्य का (Special Status) दर्जा 5 अगस्त को खत्म कर दिया. उसके बाद से अब तक ज्यादातर नेता अपने घरों में नजरबंद हैं. लेकिन इस बीच जम्मू कश्मीर (Jammu and Kashmir) में एक नई राजनीतिक पंक्ति खड़े होने के लिए तैयार है. जम्मू एंड कश्मीर और लद्दाख के केंद्रशासित प्रदेश बनने के बाद पहली बार ब्लॉक डेवलपमेंट काउंसिल/बीडीसी (BDC) चुनाव 24 अक्टूबर को होने वाले हैं.

बीडीसी चुनाव के जरिए ब्लॉक के चेयरपर्सन चुने जाते हैं. इसमें पंच और सरपंच ही वोट डालते हैं. पंचायत चुनावों की तरह ही पिछले चुनावों में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) और नेशनल कॉन्फ्रेंस ने इशारा कर दिया था कि वह इन चुनावों से भी दूर रहेंगे. ये चुनाव जम्मू कश्मीर और लद्दाख में एक राजनीति की नई जमात खड़ी करने वाले साबित हो सकते हैं.

इन चुनावों के जरिए विकास को जमीनी स्तर पर ले जाने की कवायद है. 2012-14 में ब्लॉक डेवलपमेंट काउंसिल चुनाव कराए जाने की कवायद की गई थी. लेकिन उस समय के विधायकों को इससे असुरक्षा महसूस हुई और उस समय ये चुनाव नहीं हो सके. विधायकों का मानना था कि यदि बीडीसी चुनाव हुए तो उनकी अथॉरिटी को चुनौती मिलेगी.

अब जम्मू-कश्मीर में पिछले साल से चुनी हुई सरकार नहीं है. ऐसे में पहली बार बीडीसी चुनाव हो रहे हैं. इन चुनावों में पंच और सरपंच भाग लेंगे, जो एक तरह से एमएलए की भूमिका में होंगे. दक्षिण कश्मीर में पुलवामा के एक पंच निसार अहमद भट्ट ने कहा, नेताओं ने जम्मू कश्मीर को लूटा और अब वह सब जेल में हैं. ऐसे में अब एक नई लीडरशिप आएगी. ये सब कश्मीर के विकास के लिए है. अधिकारियों को भरोसा है कि ये चुनाव लोगों के लिए राहत लेकर आएगा. उनके पास चुने हुए प्रतिनिधि होंगे. इस समय कोई भी चुने हुए प्रतिनिधि नहीं हैं.

होटलों में पंच सरपंच
सोपोर के पंच अब्दुल मजीद मीर इस समय श्रीनगर के एक होटल में अपने परिवार के साथ रह रहे हैं. उनके अलावा दर्जनों सरपंच भी इसी तरह अपने परिवार के साथ होटलों में हैं. इन पंच और सरपंचों के लिए ये व्यवस्था सरकार की ओर से की गई है. क्योंकि इनके घर पर इनकी जान को खतरा था. अब्दुल मजीद का कहना है कि मेरे लिए ये संभव नहीं था कि मैं इन परिस्थितियों में घर पर रहूं. जब तक हालात अच्छे नहीं होते, मैं यहां पर हूं. हालात कब तक अच्छे होंगे, इस पर वह कुछ नहीं कह पाते, लेकिन उनका कहना है कि हो सकता है सालों लग जाएं. इस समय ये होटल ही कश्मीर की राजनीति के नए पावर सेंटर बने हुए हैं.60 फीसदी वार्ड्स में वोटर्स नहीं
पंचायती राज विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, जम्मू कश्मीर में पिछले साल पंचायत चुनाव हुए थे. इसमें घाटी के 60 फीसदी वार्ड कोरम पूरा न होने के कारण गठित नहीं हो सके थे. घाटी में 1057 पंचायत कोरम पूरा न होने के कारण गठित नहीं हो सकीं. अधिकारी के मुताबिक, संविधान के अनुसार, पंचायत तभी गठित हो सकती है, जब कम से कम या तो एक पंच या सरपंच हो.

जिन पंचायतों का कोरम पूरा नहीं हुआ है, वहां पर चुना हुआ सरपंच शपथ नहीं ले सकता. अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी रूप से वे पंचायत सदस्य बनना बंद कर देते हैं. पुलवामा के पंचायत सदस्य साजिद रैना ने कहा, हमने अपने परिवार को छोड़ दिया. हम अपनी जिंदगी से खेल रहे हैं. हम सिर्फ इसलिए चुनाव लड़ रहे हैं ताकि जमीनी स्तर पर लोकतंत्र मजबूत हो. लेकिन हम सिर्फ बलि के बकरे बन कर रह गए हैं.

कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म हुए 65 दिन हो गए हैं. अभी भी घाटी में आम जीवन सामान्य नहीं हुआ है. मोबाइल, टेलिफोन और इंटरनेट सर्विस अभी भी बाधित हैं. घाटी की सभी पार्टियों ने केंद्र सरकार के इस फैसले का पुरजोर विरोध किया है. ऐसे में बीडीसी के चुनाव कितने कारगर होंगे, इस पर लोगों के अपने सवाल हैं. कॉलेज के छात्र मोहम्मद खुबैब ने कहा, ज्यादातर नेता जेल में हैं. पूर्व मुख्यमंत्री भी नजरबंद हैं. इनके कारण लोगों का केंद्र सरकार पर भरोसा कम ही हुआ है.

इलेक्शन चेयरपर्सन के अनुसार, इस चुनाव के लिए बैलट बॉक्स का इस्तेमाल किया जाएगा. हर काउंसिल के लिए एक पोलिंग स्टेशन होगा. राज्य में 310 पोलिंग स्टेशन होंगे. 9 अक्टूबर को नॉमिनेशन की आखिरी तारीख है.

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First published: October 8, 2019, 11:13 PM IST
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