एक्सपर्ट्स की रायः सबसे बड़ी पार्टी को 'बेवजह' फायदा नहीं दे सकते राज्यपाल

अगर गवर्नर किसी को मुख्यमंत्री नियुक्त करता है और वह बहुमत साबित नहीं कर पाते तो भी किसी अन्य पार्टी के गठजोड़ किया जा सकता है. यह संवैधानिक रूप से सही है.


Updated: May 18, 2018, 2:32 PM IST
एक्सपर्ट्स की रायः सबसे बड़ी पार्टी को 'बेवजह' फायदा नहीं दे सकते राज्यपाल
कर्नाटक के राज्यपाल विजुभाई वाला (फाइल फोटो)

Updated: May 18, 2018, 2:32 PM IST
PDT Achary

क्या गवर्नर के पास त्रिशंकु विधानसभा में मुख्यमंत्री चुनने का अधिकार है? इसमें कोई शक नहीं कि गवर्नर के पास यह अधिकार है. आर्टिकल 164 (1) के मुताबिक, गवर्नर मुख्यमंत्री की नियुक्ति कर सकते हैं और मुख्यमंत्री की सलाह पर वे अन्य मंत्रियों की नियुक्ति कर सकते हैं. आर्टिकल 164 में इसका उल्लेख नहीं है कि वे यह कैसे, क्यों और किन परिस्थितियों में करेंगे.

लेकिन आर्टिकल 164(2) के एक अनुच्छेद में कहा गया है कि गवर्नर द्वारा मंत्री चुने जाने में 'कलेक्टिव असेंबली' का योगदान होना चाहिए. आसान शब्दों में कहें कि 'कलेक्टिव असेंबली' का मतलब है सदन का बहुमत. इसका मतलब है कि मुख्यमंत्री या अन्य मंत्रियों की नियुक्ति सदन के बहुमत के निर्देश पर होनी चाहिए.

इस आधार पर यह सवाल नहीं उठता कि गवर्नर परंपरागत तरीके से काम कर रहे हैं या नहीं. उन्हें संवैधानिक व्यवस्था से चलना होगा. जब वे सरकार नियुक्त करें तो उन्हें देखना होगा कि पार्टी संवैधानिक बहुमत को पूरा कर रही है या नहीं.

जब कोई नेता गवर्नर के पास आता है तो वे उनके विधायकों की संख्या देखते हैं और उसके बाद ही नियुक्ति करते हैं. सीएम को सदन में बहुमत साबित करना होता है. बहुमत सबसे ज़रूरी है.

लेकिन आप यह कैसे सोच सकते हैं कि त्रिशंकु विधानसभा होगी और बहुमत नहीं होगा? गवर्नर को यह सुनिश्चित करना होता है कि कोई भी पार्टी बहुमत साबित कर सकती है या नहीं. फिर चाहे इसके लिए किसी पार्टी के साथ गठबंधन ही क्यों न करना पड़े. यह सभी पर लागू होता है, फिर चाहे वो सिंगल लार्जेस्ट पार्टी हो या दूसरे नंबर की पार्टी.

पार्टी बहुमत साबित कर पाएगी या नहीं, गवर्नर को खुद इसकी संतुष्टि होनी चाहिए. ऐसा नहीं है कि गवर्नर किसी को भी सीएम बना दे और उसे बाद में बहुमत साबित करने को कहे. संविधान इसे लेकर काफी स्पष्ट है कि जब भी किसी पार्टी को सरकार बनाने का निमंत्रण मिले, वो बहुमत साबित कर पाए. इस संबंध में आर्टिकल 164 काफी साफ है और इस संवैधानिक व्यवस्था को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता.

हालांकि, इस मामले में संवैधानिक जानकारों के बीच भी काफी कन्फ्यूजन है. किसी पार्टी की मर्जी से संविधान को बदला या तोड़ा-मरोड़ा नहीं जा सकता.

अगर गवर्नर किसी को मुख्यमंत्री नियुक्त करता है और वह बहुमत साबित नहीं कर पाते तो भी किसी अन्य पार्टी के गठजोड़ किया जा सकता है. यह संवैधानिक रूप से सही है.
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