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CAA के खिलाफ केरल सरकार के कदम पर राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने जताई नाराजगी, कहा- मैं रबर स्टांप नहीं

News18Hindi
Updated: January 16, 2020, 1:00 PM IST
CAA के खिलाफ केरल सरकार के कदम पर राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने जताई नाराजगी, कहा- मैं रबर स्टांप नहीं
राज्यपाल ने कहा कि उन्हें केरल सरकार के सुप्रीम कोर्ट जाने से कोई दिक्कत नहीं है.

संशोधित नागरिकता कानून (CAA 2019) 10 जनवरी को राजपत्र में अधिसूचित किये जाने के साथ ही देश में लागू हो गया है.

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  • Last Updated: January 16, 2020, 1:00 PM IST
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तिरुवनंतपुरम. नागरिकता संशोधन कानून 2019 (Citizenship Amendment Act 2019) के खिलाफ केरल (Kerala) सरकार के सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) पहुंचने पर राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने नाराजगी जाहिर की है. बता दें कि CAA के खिलाफ केरल की पिनराई विजयन (Pinarayi Vijayan) सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. इससे पहले सरकार ने विधानसभा में CAA 2019 और संभावित NRC के खिलाफ भी प्रस्ताव पास किया था.

केरल सरकार के ताजा कदम पर गवर्नर आरिफ मोहम्मद खान ने कहा, 'मेरी इजाजत के बिना ऐसा करना गलत कदम है.' उन्होंने कहा, 'राज्य सरकार को मुझे जानकारी देनी चाहिए थी. इस कानून के खिलाफ पास विधेयक की जानकारी भी मुझे अखबार से मिली.'

खान ने कहा, 'मुझे उनके सुप्रीम कोर्ट जाने से कोई दिक्कत नहीं है लेकिन उन्हें पहले मुझे सूचित करना चाहिए था. मुझे इस बारे में समाचार पत्रों के माध्यम से पता चला. जाहिर है, मैं रबर स्टांप नहीं हूं.'

केरल सरकार ने मंगलवार को संशोधित नागरिकता कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. इस याचिका में केरल सरकार ने अदालत से अनुरोध किया है कि इस कानून को संविधान में प्रदत्त समता, स्वतंत्रता और पंथनिरपेक्षता के सिद्धांतों का उल्लंघन करने वाला करार दिया जाए. संशोधित नागरिकता कानून को अदालत में चुनौती देने वाली मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व वाली केरल सरकार पहली राज्य सरकार है. केरल विधानसभा ने ही सबसे पहले इस कानून के खिलाफ प्रस्ताव भी पारित किया था.

22 जनवरी को होगी सुनवाई
शीर्ष अदालत में दायर अपने वाद में केरल सरकार ने अदालत से अनुरोध किया है कि संशोधित नागरिकता कानून, 2019 को संविधान के अनुच्छेद 14 (समता), अनुच्छेद 21 (जीने का अधिकार और व्यक्तिगत स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 25 (अंत:करण की स्वतंत्रता और धर्म को अबाध रूप से मानने और उसका आचरण करने की स्वतंत्रता) का उल्लंघन करने वाला घोषित किया जाए. शीर्ष अदालत ने संशोधित नागरिकता कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली करीब पांच दर्जन याचिकाओं पर 18 दिसंबर, 2019 को केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया था. अदालत ने केंद्र को इन याचिकाओं पर जनवरी के दूसरे सप्ताह तक अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था.

संशोधित नागरिकता कानून 10 जनवरी को राजपत्र में अधिसूचित किये जाने के साथ ही देश में लागू हो गया है. इस कानून में 31 दिसंबर, 2014 तक पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आये हिंदू, सिख, ईसाई, पारसी, जैन और बौद्ध समुदाय के सदस्यों को भारत की नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान है. शीर्ष अदालत ने इन याचिकाओं पर सुनवाई के लिए 22 जनवरी की तारीख निर्धारित की है.(एजेंसी इनपुट के साथ)

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First published: January 16, 2020, 12:21 PM IST
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