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आंदोलन में मारे गए किसानों पर बोले राज्यपाल सत्यपाल मलिक-कुतिया के मरने पर तो नेता...

 मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक  (AP Photo/Mukhtar Khan)

मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक (AP Photo/Mukhtar Khan)

राज्यपाल सत्यपाल मलिक (Satyapal Malik) ने किसान आंदोलन (Kisan Andolan) में मारे गए लोगों को लेकर चिंता जाहिर की है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 17, 2021, 2:42 PM IST
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झुंझनुं. मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक (Satyapal Malik) ने किसान आंदोलन (Kisan Andolan) में मारे गए लोगों को लेकर चिंता जाहिर की है. राज्यपाल ने कहा है कि एक भी किसान की मौत होती है तो दर्द होता है. एक निजी कार्यक्रम में राजस्थान स्थित झुंझनुं पहुंचे राज्यपाल ने मीडिया से बात की. मलिक ने कहा कि किसान आंदोलन का लंबा चलना किसी के भी हित में नहीं है. उन्होंने कहा कि कुतिया मर जाए तो हमारे नेता शोक संदेश जारी कर देते हैं. 250 किसान मर गए तो कोई बोला तक नहीं. यह मुझे दर्द पहुंचाता है.

राज्यपाल ने दावा किया कि यह ऐसा मामला नहीं है जिसका कोई समाधान ना हो. दोनों पक्षों में बहुत दूरी नहीं है. इस मामले का समाधान हो सकता है. राज्यपाल ने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) ही मुद्दा है. अगर एमएसपी को कानूनी रूप दे दें, तो आसानी से यह मुद्दा हल हो जाएगा. उन्होंने कहा कि यह मुद्दा अब देश भर के किसानों तक पहुंच चुका है. ऐसे में जल्द से जल्द समस्या का समाधान हो. उन्होंने कहा कि संवैधानिक पद पर रहते हुए मैं किसानों, नेताओं को सिर्फ सलाह दे सकता हूं. मेरी सिर्फ इतनी ही भूमिका है.

'इन बेचारों की स्थिति आप देखिए'
इससे पहले रविरवार को राज्यपाल ने केंद्र के नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारी किसानों का पक्ष लेते हुए रविवार को कहा कि जिस देश का किसान और जवान असंतुष्ट हो, वह कभी आगे नहीं बढ़ सकता. मलिक ने कहा था कि यदि केंद्र सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को कानूनी मान्यता दे देती है, तो प्रदर्शनकारी किसान मान जाएंगे.





उन्होंने कहा था, 'आज की तारीख में किसानों के पक्ष में कोई भी कानून लागू नहीं है. इस स्थिति को ठीक करना चाहिए. जिस देश का किसान और जवान असंतुष्ट होगा, वह देश आगे बढ़ ही नहीं सकता. उस देश को कोई बचा नहीं सकता. इसलिए, अपनी फौज और किसान को संतुष्ट करके रखिए.'

मलिक ने किसानों की दशा का जिक्र करते हुए कहा था, 'इन बेचारों की स्थिति आप देखिए. वे लोग जो चीज (फसल) उपजाते हैं, उसके दाम हर साल घट जाते हैं और जो चीजें खरीदते हैं, उनके दाम बढ़ते जाते हैं. उन्हें तो पता भी नहीं है कि वे गरीब कैसे होते जा रहे हैं. वे जब (बीज की) बुवाई करते हैं, तब दाम कुछ होता है और जब फसल काटते हैं तब वह 300 रुपये कम हो जाता है.'  (भाषा इनपुट के साथ)
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