सेना में अब महिला अफसरों को भी मिलेगा स्थायी कमीशन, रक्षा मंत्रालय ने दी मंजूरी

सेना में अब महिला अफसरों को भी मिलेगा स्थायी कमीशन, रक्षा मंत्रालय ने दी मंजूरी
केंद्रीय रक्षा मंत्रालय ने गुरुवार को महिलाओं के स्थायी कमीशन को आधिकारिक तौर पर मंजूरी दे दी है. (सांकेतिक तस्वीर)

रक्षा मंत्रालय (Defence Ministry) के आदेश के मुताबिक, शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) की महिला अधिकारियों को भारतीय सेना के जज एंड एडवोकेट जनरल, आर्मी एजुकेशनल कोर में ये सुविधा मिलेगी.

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नई दिल्ली. भारतीय सेना (Indian Army) में अब विभिन्न शीर्ष पदों पर महिलाओं की तैनाती हो सकेगी. केंद्रीय रक्षा मंत्रालय (Defence Ministry) ने गुरुवार को महिलाओं के स्थायी कमीशन को आधिकारिक तौर पर मंजूरी दे दी है. मंत्रालय के आदेश के बाद महिलाओं को भी संगठन में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकेगी. रक्षा मंत्रालय के आदेश के मुताबिक, शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) की महिला अधिकारियों को भारतीय सेना के जज एंड एडवोकेट जनरल, आर्मी एजुकेशनल कोर में ये सुविधा मिलेगी.

इसके अलावा दस हिस्सों में भी स्थायी कमीशन की इजाजत दे दी गई है. यानी अब आर्मी एयर डिफेंस, सिग्नल, आर्मी सर्विस कोर, आर्मी ऑर्डिनेंस कोर, इंजीनियर, आर्मी एविएशन, इलेक्ट्रॉनिक्स, मैकेनिकल इंजीनियरिंग और इंटेलिजेंस कोर में भी स्थायी कमीशन मिल पाएगा. भारतीय सेना के प्रवक्ता ने बताया जैसे ही सभी प्रभावित एसएससी महिला अधिकारी अपने विकल्प का प्रयोग करती हैं और अपेक्षित दस्तावेजीकरण पूरा करती हैं, उनका चयन बोर्ड निर्धारित किया जाएगा.

इस महीने की शुरुआत में, सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सेना में सभी एसएससी महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने के अपने फैसले को लागू करने के लिए केंद्र को एक और महीने की इजाजत दी थी.



अदालत ने 17 फरवरी को केंद्र सरकार को इस संबंध में दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi Highcourt) के 2010 के आदेश का सम्मान करते हुए स्थायी कमीशन देने का आदेश दिया था और यह भी फैसला सुनाया था कि महिला अधिकारी अपने पुरुष समकक्षों के साथ सेना में "कमांड और मानदंड" नियुक्तियां प्राप्त कर सकती हैं.
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अदालत ने कही थीं ये बातें
अदालत ने कहा था, सशस्त्र बलों में महिलाओं की भर्ती एक "विकासवादी प्रक्रिया" है, और महिला अधिकारियों के रोजगार के बारे में केंद्र के नीतिगत निर्णय "बहुत ही अनोखे" थे.

इस आदेश में कोर्ट ने सरकार के उस जवाब को लेकर आलोचना की थी जिसमें कहा गया था कि महिलाएं सेना के "ड्यूटी से परे कॉल" का जवाब देने के लिए शारीरिक रूप से अयोग्य होती हैं. कोर्ट ने कहा था कि केंद्र का ये नोट सेक्स रूढ़िवादिता है.

फैसले में कहा गया था, "केंद्र द्वारा दिया गया तर्क पुरुषों और महिलाओं की शारीरिक शक्ति और मातृत्व, परिवार आदि के आधार पर स्थापित समानता का उल्लंघन करता है." इसके साथ ही कहा गया था, "महिलाओं की क्षमता और सेना में उनकी भूमिका और उपलब्धियों और आकांक्षाओं को पूरा न करना न केवल महिलाओं के लिए बल्कि भारतीय सेना के लिए भी अपमान है."
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