चीनी की डेटा जासूसी पर भारत सरकार ने दिए जांच के आदेश, 30 दिनों में रिपोर्ट देगी एक्सपर्ट कमेटी

चीनी की डेटा जासूसी पर भारत सरकार ने दिए जांच के आदेश, 30 दिनों में रिपोर्ट देगी एक्सपर्ट कमेटी
इस खुलासे से ये साफ हो गया है कि चीन सिर्फ सीमा पर नहीं बल्कि साइबर की दुनिया में भी एक जंग लड़ रहा है. (PTI)

China Snooping on VIP: झेनहुआ डेटा लीक मामले में सरकार ने इन रिपोर्टों का अध्ययन करने के लिए नेशनल साइबर सिक्योरिटी कोऑर्डिनेटर के तहत एक एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया है. कमेटी से 30 दिनों में रिपोर्ट मांगी गई है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 17, 2020, 2:28 PM IST
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नई दिल्ली. भारत-चीन के बीच (India-China Standoff) लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (Ladakh LAC) पर जारी तनावपूर्ण माहौल के बीच चीन की जासूसी कंपनी द्वारा 10 हजार भारतीयों का रियल टाइम डेटा (Real Time Data) कलेक्ट करने की खबर ने हर किसी के होश उड़ा दिए हैं. चीनी कंपनी द्वारा डेटा कलेक्ट करने पर भारत सरकार ने चिंता जाहिर की है.

न्यूज एजेंसी ANI ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि झेनहुआ डेटा लीक मामले में सरकार ने इन रिपोर्टों का अध्ययन करने, उनका मूल्यांकन करने, कानून के किसी भी उल्लंघन का आकलन करने के लिए नेशनल साइबर सिक्योरिटी कोऑर्डिनेटर के तहत एक एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया है. कमेटी से 30 दिनों में रिपोर्ट मांगी गई है.





सूत्रों के अनुसार, सरकार ने उस रिपोर्ट पर गहरी चिंता व्यक्त की है, जिसमें बताया गया कि विदेशी सोर्स सहमति के बिना देश के नागरिकों के व्यक्तिगत डेटा तक पहुंच रही है या फिर उसे चुराने की कोशिश कर रही है.विदेश मंत्रालय ने चीन द्वारा भारत की प्रमुख हस्तियों की जासूसी करने को लेकर चीनी राजपूत के सामने मुद्दा उठाया. चीन ने इसके जवाब में कहा कि झेनहुआ एक निजी कंपनी है और अपनी स्थिति को सार्वजनिक रूप से बता चुकी है.



इंडियन एक्सप्रेस' ने अपनी रिपोर्ट में रियल टाइम डेटा लीक की जानकारी दी थी. इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन की झेनझुआ डेटा इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी करीब 10 हजार भारतीयों का डेटा इकट्ठा कर रहा है. इसमें सोशल मीडिया पर हरकत से लेकर लाइक और कमेंट तक, उनकी होने वाली उपस्थिति तक शामिल है. चीनी कंपनी की नजर देश के प्रधानमंत्री से लेकर बड़े बिजनेसमैन, कई राज्यों के मुख्यमंत्रियो, नेताओं, सांसद और खिलाड़ियों पर टिकी है.

इन्हीं कारणों से सरकार ने लगाया चीनी ऐप्स पर बैन
News18 से बात करते हुए सरकार के एक सीनियर अधिकारी ने बताया था, 'सरकार को कहीं न कहीं चीन की इस हरकत के बारे में पता था. इसलिए ही चीनी ऐप्स पर बैन लगाने का फैसला लिया गया, क्योंकि इससे डेटा लीक हो रहा था. चीन की टेक कंपनियां इस डेटा को लीक कर जानकारियां चीनी कम्युनिस्ट पार्टी और एजेंसियों के साथ साझा कर रही थी.' हालांकि, अधिकारी ने माना कि भारत के वीआईपी जैसे राष्ट्रपति कोविंद, पीएम मोदी, सीजेआई का डेटा भले ही ओपन सोर्स से उठाया गया हो, लेकिन चीन जैसा दुश्मन देश इसका गलत इस्तेमाल कर सकता है.
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