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कोरोना वैक्सीन की कमी: महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ पर बरसे हर्षवर्धन, कहा- नाकामी छिपाने की कोशिश

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन (Dr. Harsh Vardhan) ने कहा- सबसे चिंताजनक यह है कि कुछ राज्य सरकारें कोरोना वैक्सीनेशन की उम्र 18 वर्ष निर्धारित करना चाहती हैं. केंद्र सरकार द्वारा वैक्सीन की मांग और आपूर्ति को लेकर राज्य सरकारों को लगातार पारदर्शी तरीके से जानकारी दी जाती रही है. स्वास्थ्य मंत्री ने महाराष्ट्र सरकार की कोरोना के खिलाफ उठाए कदमों की आलोचना की है.

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नई दिल्ली. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन (Dr. Harsh Vardhan) ने कुछ राज्य सरकारों द्वारा 'सबको वैक्सीन देने' की मांग को गैर-जिम्मेदाराना बताया है. साथ ही उन्होंने कोरोना के खिलाफ सटीक कदम न उठाने के लिए कुछ राज्य सरकारों की खिंचाई भी की है. उन्होंने कहा कि सबसे चिंताजनक यह है कि कुछ राज्य सरकारें कोरोना वैक्सीनेशन की उम्र 18 वर्ष निर्धारित करना चाहती हैं. केंद्र सरकार द्वारा वैक्सीन की मांग और आपूर्ति को लेकर राज्य सरकारों को लगातार पारदर्शी तरीके से जानकारी दी जाती रही है. स्वास्थ्य मंत्री ने महाराष्ट्र सरकार की कोरोना के खिलाफ उठाए कदमों की आलोचना की है.

एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा है-हाल के दिनों में मैंने कई राज्य सरकारों से गैरजिम्मेदाराना बयान सुने हैं. अब चूंकि इन बयानों से आम जनता में भ्रम और पैनिक फैलेगा, इस वजह से जवाब देना जरूरी है. ऐसे वक्त में जब देश में कोरोना के मामले तेजी के साथ बढ़ रहे हैं ऐसे में यह तथ्य बताना चाहता हूं कि कई राज्य सरकारें कोरोना के खिलाफ उपयुक्त कदम उठाने में नाकाम रही है.

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वैक्सीनेशन का उद्देश्य डेथ रेट कम करना
वैक्सीनेशन के संदर्भ में सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही है कि इसे मृत्यु दर कम करने के लिए लिहाज से इस्तेमाल किया जा रहा है. इसी वजह से भारत में जब दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीनेशन कार्यक्रम शुरू हुआ तो सबसे पहले हेल्थ केयर वर्कर्स और फ्रंटलाइन वर्कर्स को वैक्सीन दी गई. इसके बाद 65 के ऊपर के सभी लोगों को और अब 45 के ऊपर के सभी लोगों को वैक्सीन दी जा रही है.

प्राथमिकता तय करना है जरूरी
वैक्सीन की आपूर्ति भी सीमित है इसलिए हमें प्राथमिकता तय करनी जरूरी है. जब राज्य 18 वर्ष की उम्र से अधिक सभी लोगों के लिए वैक्सीन की मांग करने लगते हैं तो इसका मतलब उन्होंने पहले की सभी कैटगरी में संपूर्ण वैक्सीनेशन कर लिया है. लेकिन तथ्य इसकी गवाही नहीं देते.

तथ्यों के आधार पर महाराष्ट्र की आलोचना की
महाराष्ट्र ने अभी तक सिर्फ 86 प्रतिशत हेल्थकेयर वर्कर्स का वैक्सीनेशन किया है. वो भी इन्हें सिर्फ पहली डोज दी गई है. इसी तरह दिल्ली और पंजाब में वैक्सीन की पहली डोज पाने वाले हेल्थ केयर वर्कर्स की संख्या 72 और 64 प्रतिशत है. 10 राज्य और केंद्रशासित प्रदेशों में यह आंकड़ा 90 प्रतिशत के ऊपर है. वहीं फ्रंटलाइन वर्कर्स की बात करें तो महाराष्ट्र सरकार सिर्फ 73 फीसदी वर्कर्स को वैक्सीन की पहली डोज दे पाई है. वहीं सीनियर सीटिजेन्स की बात करें तो महाराष्ट्र में सिर्फ 25 फीसदी वैक्सीनेशन हुआ है.

'छत्तीसगढ़ सरकार का गैरजिम्मेदाराना रवैया'
छत्तीसगढ़ में बीते दो-तीन सप्ताह में डेथ रेट में तेजी आई है. वहां पर ज्यादार टेस्टिंग एंटीजेन टेस्ट के बूते ही की जा रही है. वास्तविकता में राज्य सरकार ने कोवैक्सीन इस्तेमाल करने से मना कर दिया था जबकि इसे डीजीसीआई से इमरजेंसी यूज की अनुमति दी जा चुकी थी.
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