प्रमोशन में दलितों को आरक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट जाएगी सरकार: पासवान

रामविलास पासवान ने पत्रकारों से कहा कि प्रमोशन में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षण पर रोक लगाने वाले फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में सरकार याचिका दायर करेगी.

News18Hindi
Updated: April 17, 2018, 7:19 PM IST
प्रमोशन में दलितों को आरक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट जाएगी सरकार: पासवान
रामविलास पासवान की फाइल फोटो
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Updated: April 17, 2018, 7:19 PM IST
केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने बताया कि सरकार अनुसूचित जातियों (दलितों) को प्रमोशन में आरक्षण दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख करेगी. पासवान का यह कदम दलितों के बीच अपनी पैठ बनाने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है.

पीटीआई के मुताबिक, पासवान ने दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि प्रमोशन में इन समुदायों के लिए आरक्षण पर रोक लगाने वाले फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में सरकार याचिका दायर करेगी.

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ने इससे पहले कहा था कि एम नागराज केस पर 2006 में दिए गए फैसले पर पुनर्विचार की याचिका पर पांच जजों की बेंच विचार करेगी.

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने तब कहा था कि अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षण में लागू होने वाली क्रिमी लेयर की नीति सरकारी नौकरियों के लिए अनुसूचित जाति और जनजाति (दलितों और आदिवासियों) के लिए आरक्षण के मामले में नहीं लगाई जा सकती.

सुप्रीम कोर्ट में वकील नरेश कौशिक और सुयश मोहन गुरु ने जब इस मामले का जिक्र करते हुए बड़ी बेंच से इस पर सुनवाई कराने की मांग की, तो बेंच ने कहा, 'बेंच गठित करने में थोड़ा वक्त लगेगा.'

शीर्ष अदालत ने तरक्की में SC/ST कर्मचारियों के लिए कोटे की मांग वाली तमाम याचिकाओं को एकसाथ मिला दिया था. इसमें मध्य प्रदेश सरकार की तरफ से हाईकोर्ट की उस फैसले के खिलाफ याचिका भी शामिल थी, जिसमें कोर्ट ने मध्य प्रदेश लोक सेवा (एमपीएससी) प्रमोशन नियम, 2002 को संविधान के लिए खतरनाक बताया था.

सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच इस सभी मामलों को एकसाथ कर प्रधान न्यायधीश के पास भेज दिया था, ताकि इन मामलों पर सुनवाई के लिए बड़ी बेंच गठित की जा सके.

इस बेंच ने प्रधान न्यायाधीश के पास इन मामलों को भेजते हुए वर्ष 1992 के इंदिरा साहनी और अन्य बनाम भारत सरकार वाले मामले और वर्ष 2005 के ईवी चिन्नैया बनाम आंध्र प्रदेश सरकार के मामले पर फैसले का भी जिक्र किया. यहां पहले वाला फैसला मंडल आयोग और दूसरा ओबीसी आरक्षण में क्रिमी लेयर की छटनी से जुड़ा फैसला था.
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