तीन तलाक बिल पास कराने का सरकार के पास आखिरी मौका आज, राज्यसभा में हंगामे के आसार

पिछले साल दिसंबर में तीन तलाक बिल (2018) को लोकसभा ने पारित कर दिया था. इस बिल को लेकर सदन में लंबी बहस हुई थी

News18Hindi
Updated: February 13, 2019, 8:31 AM IST
तीन तलाक बिल पास कराने का सरकार के पास आखिरी मौका आज, राज्यसभा में हंगामे के आसार
सांकेतिक तस्वीर
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Updated: February 13, 2019, 8:31 AM IST
आज राज्यसभा में ट्रिपल तलाक बिल पेश किया जाएगा. समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद इस बिल को सदन के पटल पर रखेंगे. ये बिल पहले ही लोकसभा से पारित हो चुका है. आशंका है कि विपक्ष राज्यसभा में इस विधेयक पर हंगामा कर सकता है. आज बजट सत्र का आखिरी दिन है. ऐसे में सरकार के लिए इसे पास कराना मुश्किल चुनौती होगी.

विपक्ष की मांग है कि मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक 2018 को सेलेक्ट कमिटी को भेजा जाए. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने भी तीन तलाक से संबंधित विधेयक के महिला विरोधी होने का आरोप लगाया है.





ट्रिपल तलाक में सज़ा का प्रावधान
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इस प्रस्तावित कानून के तहत एक बार में तीन तलाक देना गैरकानूनी और अमान्य होगा और ऐसा करने वाले को तीन साल तक की सजा हो सकती है. यह अपराध तब संज्ञेय होगा जब विवाहित मुस्लिम महिला या फिर उसका करीबी रिश्तेदार उस व्यक्ति के खिलाफ सूचना देगा, जिसने तत्काल तीन तलाक दिया है.

लोकसभा में पास हो चुका है ये बिल
पिछले साल दिसंबर में तीन तलाक बिल (2018) को लोकसभा ने पारित कर दिया था. इस बिल को लेकर सदन में लंबी बहस हुई थी. बिल में जरूरी संशोधन को लेकर कांग्रेस और एआईएडीएमके समेत कई दलों ने सदन से वॉक आउट किया था. हालांकि, इसके बाद भी बिल पर वोटिंग कराई गई. सदन में मौजूद 256 सांसदों में से 245 सदस्यों ने इसके पक्ष में मतदान किया, जबकि 11 सदस्यों ने इसके खिलाफ अपना वोट दिया था. इससे पहले दिसंबर 2017 में भी लोकसभा से तीन तलाक बिल को मंजूरी मिल गई थी, लेकिन राज्यसभा में ये गिर गया था. इसके बाद सरकार को तीन तलाक पर अध्यादेश लाना पड़ा था. बाद में सरकार ने एक बार फिर से निचले सदन में संशोधित बिल पेश किया था.

क्या कहा था सुप्रीम कोर्ट?
सुप्रीम कोर्ट ने 22 अगस्त, 2017 को तीन तलाक को असंवैधानिक घोषित किया था. कोर्ट ने कहा था कि इस तरीके से दिए गए तलाक को कानूनी रूप से तलाक नहीं माना जाएगा. हालांकि इस फैसले में महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के संबंध में कोई गाइडलाइन तय नहीं किये गए थे. कोर्ट ने निर्देश दिया था कि केंद्र सरकार इस संबंध में बिल तैयार करे और संसद में उसे पास करवाकर कानून बनाए. पिछले साल मानसून सत्र में राज्यसभा में बिल पास करवाने में असफल रहने के बाद के केंद्र सरकार इस मुद्दे पर अध्यादेश लेकर आई.

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