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गुजरातः सोमनाथ मंदिर के नीचे 'L' शेप इमारत, पुरातत्व विभाग और IIT गांधीनगर ने लगाया पता

रिपोर्ट के मुताबिक पुरातत्व विभाग ने 32 पेजों की एक रिपोर्ट सोमनाथ ट्रस्ट को सौंपी है.
रिपोर्ट के मुताबिक पुरातत्व विभाग ने 32 पेजों की एक रिपोर्ट सोमनाथ ट्रस्ट को सौंपी है.

मौजूदा मंदिर देश के पहले गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल (Sardar Vallabhbhai Patel) की देन है. जिन्होंने जुलाई 1947 में इसे फिर से बनाने का आदेश दिया था. नया मंदिर 1951 में बनकर तैयार हुआ.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 29, 2020, 9:37 PM IST
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नई दिल्ली. गुजरात के सोमनाथ मंदिर के नीचे एक और तीन मंजिला इमारत होने का पता चला है. आईआईटी गांधीनगर, पुरातत्व विभाग (ऑर्कियोलॉजी) और 3 सहयोगी संस्थाओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कहने पर इसका पता लगाया है. प्रधानमंत्री सोमनाथ मंदिर के ट्रस्टी भी हैं. एक साल पहले प्रधानमंत्री ने दिल्ली में हुई एक मीटिंग में ऑर्कियोलॉजी विभाग को सोमनाथ मंदिर के नीचे दबे रहस्यों का पता लगाने को कहा था.

ऑर्कियोलॉजी विभाग के मुताबिक सोमनाथ मंदिर के नीचे एक "L" शेप की इमारत है. साथ ही सोमनाथ मंदिर के दिग्विजय द्वार से कुछ दूरी पर स्थित सरदार वल्लभ भाई पटेल के स्टेच्यू के पास बौद्ध गुफाएं मौजूद हैं. दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक पुरातत्व विभाग ने 32 पेजों की एक रिपोर्ट सोमनाथ ट्रस्ट को सौंपी गई है.

सोमनाथ मंदिर के नीचे क्या है? इस बात का पता लगाने के लिए ऑर्कियोलॉजी विभाग ने जमीन के 12 फीट नीचे तक जांच की और जीपीआर इंवेस्टिगेशन के जरिए ये पता चला कि मंदिर के नीचे एक पक्की इमारत और प्रवेश द्वार भी है.



बता दें कि मौजूदा मंदिर देश के पहले गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की देन है. जिन्होंने जुलाई 1947 में इसे फिर से बनाने का आदेश दिया था. नया मंदिर 1951 में बनकर तैयार हुआ. इतिहासकारों की माने तो इस मंदिर को लगभग 17 बार नष्ट किया गया है और हर बार इसका पुननिर्माण कराया गया.
प्राचीन भारत और आधुनिक भारत के इतिहास में सोमनाथ मंदिर को वर्ष 1024 में महमूद गजनवी ने तहस नहस कर दिया था. मूर्ति तोड़ने से लेकर यहां चढ़ाए गए सोने-चांदी के सभी आभूषणों को हमलावरों ने लूट लिया था.

6 बार टूटने के बाद मंदिर को 7वीं बार कैलाश महामेरू प्रसाद शैली में बनाया गया. 1995 में इसे राष्ट्र को समर्पित किया गया.
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