कश्मीर में ग्रेनेड हमला आतंकवादियों की बौखलाहट का नतीजा!

घाटी में रविवार को हुए ताजा ग्रेनेड हमले की बात करें तो जैश आतंकी संगठन ने इसकी जिम्मेदारी ली है. इस साल की शुरुआत से अब तक 20 से भी ज्यादा आतंकी घाटी में मारे गए हैं.

अमित पांडेय | News18Hindi
Updated: February 11, 2019, 11:37 AM IST
कश्मीर में ग्रेनेड हमला आतंकवादियों की बौखलाहट का नतीजा!
प्रतीकात्मक फोटो
अमित पांडेय
अमित पांडेय | News18Hindi
Updated: February 11, 2019, 11:37 AM IST
घाटी में इस साल की शुरुआत से अब तक छोटे-बड़े मिलाकर करीब 15 ग्रेनेड हमले हुए हैं. ताजा ग्रेनेड हमला 10 फरवरी की शाम श्रीनगर में हुआ जिसमें 10 लोग घायल हो गए. घायलों में सीआरपीएफ जवान, जम्मू कश्मीर पुलिस के जवान और आम नागरिक भी शामिल हैं. इस साल की शुरुआत से अब तक श्रीनगर, कुपवाड़ा, बारामुला, अनंतनाग और शोपियां में ग्रेनेड हमले किए गए हैं. सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों के मुताबिक, किसी बड़ी वारदात को अंजाम नहीं होता देख आतंकी इस तरीके के ग्रेनेड हमले कर सुरक्षाबलों के बीच अपनी उपस्थिति दर्ज कराना चाहते हैं.

घाटी में हुए ग्रेनेड हमलों की जिम्मेदारी लश्कर से लेकर जैश या हिजबुल तक सभी आतंकी संगठनों ने ली है. इन हमलों का एक ही पैटर्न है, ये भीड़भाड़ वाली जगह या फिर सिक्योरिटी पोस्ट को टारगेट करते हैं. क्योंकि इन दोनों जगहों पर सुरक्षाबलों की मौजूदगी होती है. इस हमले को चंद मिनटों में अंजाम दिया जाता है, बाइक सवार युवक टारगेट के पास आता है और ग्रेनेड फेंककर वहां से फरार हो जाता है.

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सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों के मुताबिक, आतंकी संगठन इस पूरी प्रक्रिया को बेहद पेशेवर तरीके से अंजाम दे रहे है. युवाओं को इसके लिए बकायदा पैसे दिए जाते हैं, इसके साथ ही उन्हें टारगेट दिया जाता है. आमतौर पर एक हमले के लिए 500 से 1000 रुपये तक युवाओं को दिए जाते हैं. यह ग्रेनेड चाइनीज होते हैं जिनकी सप्लाई पिछले कुछ महीनों से पाकिस्तान की तरफ से आतंकी संगठनों को हो रही है. चाइनीज ग्रेनेड महज 2 सेकंड में फट जाता है. जितनी तेजी से हमले को अंजाम दिया जाता है उतनी ही तेजी से हमलावर फरार हो जाते हैं.

घाटी में रविवार को हुए ताजा ग्रेनेड हमले की बात करें तो जैश आतंकी संगठन ने इसकी जिम्मेदारी ली है. इस साल की शुरुआत से अब तक 20 से भी ज्यादा आतंकी घाटी में मारे गए हैं. घाटी में 5 फरवरी को कश्मीर सॉलिडेरिटी डे था, 9 फरवरी को अफजल गुरु की डेथ एनिवर्सरी थी और 11 फरवरी को मकबूल भट्ट की डेथ एनिवर्सरी है.

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आतंकी संगठन, अलगाववादी संगठनों ने इन सारे दिनों में कश्मीर बंद और हड़ताल का आह्वान किया था. इन सबके बीच आतंकी ऐसे हमलों से एक बार फिर अपनी उपस्थिति दर्ज कराना चाहते हैं. पिछले कुछ सालों से ग्रेनेड हमले न के बराबर थे. हाल के दिनों में जिस तरीके से लगातार हमले हो रहे हैं उनसे बेशक अभी तक कोई बड़ा नुकसान हनीं हुआ है लेकिन सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क रहने की जरूरत है कि कहीं इसकी आड़ में आतंकी बड़े हमले की प्लानिंग तो नहीं कर रहे हैं.
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