पुलवामा में पुलिस चौकी पर ग्रेनेड हमला, 3 पुलिसकर्मी घायल

पुलवामा में पुलिस चौकी पर ग्रेनेड हमला, 3 पुलिसकर्मी घायल
जम्मू-कश्मीर में आतंकियों ने एक पुलिस चौकी पर ग्रेनेड से हमला किया (सांकेतिक फोटो)

आतंकवादियों (Terrorists) ने पुलिस चौकी (Police chowki) की ओर गोलियां भी चलाईं, जिससे तीन कर्मियों (personnel) को मामूली रूप से घायल हो गये.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 4, 2020, 11:04 PM IST
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श्रीनगर. जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) के पुलवामा जिले (Pulwama District) में मंगलवार को एक पुलिस चौकी पर आतंकवादियों (Terrorists) के ग्रेनेड हमले में तीन पुलिसकर्मी मामूली रूप से घायल हो गये. पुलिस अधिकारी (Police officer) ने बताया कि पुलवामा जिले के वानपोरा में रात करीब 9.10 बजे आतंकवादियों ने एक पुलिस बंकर (Police Bunker) पर ग्रेनेड (Granade) फेंका.

उन्होंने बताया कि आतंकवादियों (Terrorists) ने पुलिस चौकी की ओर गोलियां भी चलाईं, जिससे तीन कर्मी मामूली रूप से घायल हो गये. एक अन्य घटना में आतंकवादियों ने दक्षिण कश्मीर (South Kashmir) के कुलगाम के अकरन मीर बाजार इलाके में आसिफ अहमद सरपंच पर गोलियां चलाईं. उन्हें भी अस्पताल में भर्ती कराया गया (Hospitalised) है.

पिछले साल अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से आई हिंसा में कमी
वैसे जम्मू कश्मीर से पिछले साल अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद पथराव की घटनाओं में कमी और अलगाववादी नेताओं की लगातार धरपकड़ केंद्रशासित प्रदेश में हिंसा में लगातार कमी आने के प्रमुख कारक हैं.
अधिकारियों ने सोमवार को कहा कि पिछले साल संवैधानिक बदलाव किए जाने के बाद से एकत्र आंकड़ों के तुलनात्मक विश्लेषण से पता चलता है कि जो अलगाववादी नेता कश्मीर में हड़ताल का आह्वान किया करते थे, वे शासन के कठोर कदमों से हताश हैं क्योंकि सरकार ने अलगाववादियों के बैंक खातों को सील करने और आतंकवाद के लिए मिलने वाले पैसे से अर्जित उनकी संपत्तियों को कुर्क करने जैसे कदम उठाए हैं.



पिछले साल 5 अगस्त को खत्म किया गया था अनुच्छेद 370
केंद्र ने संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू कश्मीर को प्रदत्त विशेष प्रावधान को पिछले साल पांच अगस्त को खत्म कर दिया था और राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों-जम्मू कश्मीर तथा लद्दाख में विभाजित कर दिया था.

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पिछले एक साल में अलगाववादी समूहों ने नामामत्र को ही किसी बंद का आह्वान किया है. अलगाववादी समूहों के अनेक मुख्य नेताओं की गिरफ्तारी के बाद ये समूह निष्क्रिय हो गए हैं. सरकार ने जेकेएलएफ के यासीन मलिक को गिरफ्तार किया है जो 1990 में हुई भारतीय वायुसेना के कर्मियों की हत्या के मामले में आरोपी है. जम्मू कश्मीर डेमोक्रेटिक फ्रीडम पार्टी के नेता शब्बीर शाह को भी गिरफ्तार किया गया है जो 2007 के धनशोधन के एक मामले में आरोपी है.
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