गुजरात: पोस्टर पर हंगामे के बाद आनन्द यूनिवर्सिटी ने रोकी बकरियों की सेल

एनिमल एक्टिविस्ट इन पोस्टर को देखकर खासे नाराज थे और उन्होंने कृषि विश्वविद्यालय से पोस्टर हटाने की अपील की थी.

News18Hindi
Updated: August 10, 2018, 5:04 PM IST
गुजरात: पोस्टर पर हंगामे के बाद आनन्द यूनिवर्सिटी ने रोकी बकरियों की सेल
बकरियों की सेल के लिए लगाया गया पोस्टर
News18Hindi
Updated: August 10, 2018, 5:04 PM IST
मध्य गुजरात के आनन्द कृषि विश्वविद्यालयय ने एनिमल एक्टिविस्टों के विरोध के बाद शुक्रवार से बेची गई दस बकरियों को फिर से हासिल कर लिया है. पशुचिकित्सा एवं पशुपालन कॉलेज ने बकरीद के मौके पर 3 से 21 अगस्त के बीच बकरियों की सेल के पोस्टर लगाए थे. पोस्टर को देखकर लग रहा था कि बकरियों को बकरीद पर वध के लिए बेचा जा रहा है.

एनिमल एक्टिविस्ट इन पोस्टर को देखकर खासे नाराज थे और उन्होंने कृषि विश्वविद्यालय से पोस्टर हटाने की अपील की थी. गुरुवार को बैनर उतार लिए गए और कॉलेज ने स्वीकार किया कि बकरीद  के मौके पर सेल आयोजित करना डिपार्टमेंट की गलती है.

न्यूज18 से बात करते हुए कृषि विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर एनसी पटेल ने कहा, ‘विभाग द्वारा अनजाने में यह गलती हो गई जिसे जल्द ही मेरे नोटिस में लाया गया. बेची गई सभी 10 बकरियों को विश्विद्यालय ने फिर से हासिल कर लिया है और मैंने इस मामले पर विभागीय कार्रवाई भी शुरू कर दी है. बकरियों और भेड़ों को पशुशाला में भेजा जाएगा.”

यह पहला मौका था जब विश्वविद्यालय ने जानवरों को बेचने का प्रयास किया था. लगभग तीन महीने पहले भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की एक बैठक में विश्वविद्यालय परिसर में बकरियों को पालने का निर्णय लिया गया था ताकि नस्ल के विकास के लिए उन्हें किसानों को बेचा जा सके. विश्वविद्यालय को इससे राजस्व भी प्राप्त होता.

जिला कलेक्टर और आनंद नगर पालिका को भेजी गई एक रिपोर्ट में कहा गया है कि किसानों को बकरी की बिक्री केवल पालने और प्रजनन के उद्देश्य के लिए की जानी चाहिए थी न कि वध के लिए. पशुचिकित्सा और पशुपालन विभाग ने कहा कि बोर्ड गलत था, विश्वविद्यालय ने भी अपनी रिपोर्ट दर्ज की है.

विश्वविद्यालय के पशुधन उत्पादन प्रबंधन डिपार्टमेंट द्वारा पशु कल्याण अधिकारी भावेश शाह को लिए गए एक पत्र में कहा गया है, 'उपर्युक्त विषय की निरंतरता के संदर्भ में हमने जीवित जानवरों की बिक्री बंद कर दी है और भविष्य में भारत सरकार के आईसीएआर द्वारा तय किए गए प्रायोगिक लर्निंग यूनिट परियोजना में जिंदा जानवरों को बेचने का उद्देश्य आईसीएआर, भारत सरकार के पास भेजा जाएगा. कॉलेज के छात्र केवल अपने सीखने के लिए जानवरों का पालन करेंगे और बाद में जीवित जानवरों पर सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार अमल किया जाएगा. यह एएयू आनन्द के पशु चिकित्सा कॉलेज पशुधन उत्पादन प्रबंधन विभाग की तरफ से दिया गया सौम्य आश्वासन है.'

ये भी पढ़ें: क्या पैगाम देती है 'ईद-उल-जुहा' पर जानवर की कुर्बानी
पूरी ख़बर पढ़ें
अगली ख़बर