गुजरात: मोजड़ी और चेन पहनने पर 13 साल के दलित की पिटाई, पुलिस का शिकायत दर्ज करने से इनकार

गुजरात में पिछले दो सालों में दलितों से मारपीट की कई घटनाएं सामने आई हैं.

News18Hindi
Updated: June 14, 2018, 11:56 PM IST
गुजरात: मोजड़ी और चेन पहनने पर 13 साल के दलित की पिटाई, पुलिस का शिकायत दर्ज करने से इनकार
सांकेतिक तस्‍वीर
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Updated: June 14, 2018, 11:56 PM IST
गुजरात में दलित युवक की पिटाई का एक और मामला सामने आया है. पिटाई का आरोप सवर्ण युवकों पर है. घटना 12 जून को अहमदाबाद के विट्ठलापुर गांव की है जहां अच्‍छे कपड़े व गले में चेन पहनने और खुद को राजपूत बताने पर दलित युवक की पिटाई कर दी गई. पीड़ित युवक का कहना है कि पुलिस ने उसकी शिकायत भी दर्ज नहीं की. निर्दलीय विधायक और दलित नेता जिग्‍नेश मेवाणी ने जल्‍द से जल्‍द कार्रवाई करने की मांग की है.

दलित युवक भावेश ने बताया कि वह बेचारजी(पाटन) गया था. उसने आरोप लगाया कि दो राजपूत लड़कों ने उसके कपड़ों और गले में चेन देखकर धमकाया. इसके बाद वे उसे बाइक पर बैठाकर ले गए और उसकी बेरहमी से पिटाई की. घटना के 48 घंटे बाद भी पुलिस ने शिकायत दर्ज नहीं की. वहीं इस मामले पर जिग्‍नेश मेवाणी ने कहा कि 24 घंटे में आरोपियों को पकड़ा जाना चाहिए. दलितों पर हो रहे अत्याचार के मामले में अगर शिकायत नहीं भी होती है तो एसपी और आईजी को खुद से एक्शन लेने चाहिए. ऊना दलितकांड के पीडितों को अगर सजा मिली होती तो यह नौबत कभी नहीं आती.

बता दें कि गुजरात में पिछले दो सालों में दलितों से मारपीट की कई घटनाएं सामने आई हैं. इसी साल मई में 20 दलितों ने राजकोट में उनकी ज़मीन हथियाने के विरोध में आत्‍मदाह की कोशिश की थी. मई में ही बनासकांठा जिले में एक दलित पुलिस कांस्‍टेबल ने शादी के कार्ड में नाम के पीछे 'सिंह' लगाया तो सवर्णों ने काफी हंगामा किया था. ऐसा ही मामला अहमदाबाद से आया था.

भावनगर में 21 साल के दलित युवक प्रदीप राठोड़ की कथित तौर पर घोड़ा रखने पर हत्‍या कर दी गई थी. हालांकि पुलिस ने कहा था कि लड़कियों को छेड़ने के चलते पिटाई में उसकी मौत हुई. इसी साल में फरवरी में दलित एक्टिविस्ट भानुभाई वणकर ने अपनी जमीन न मिलने पर कचहरी में आत्मदाह कर लिया था.

ऊना कांड के बाद गुजरात में दलितों पर हो रहे अत्याचारों की तादाद में काफी बढ़ोतरी हुई है. आरटीआई के तहत मिली जानकारी में खुलासा हुआ है कि 2017 में ही अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति एक्ट के तहत 1515 केस दर्ज हुए. यह संख्या पिछले 17 सालों में सबसे ज्यादा है. यह आंकड़े बताते है कि समय के साथ दलितों पर हो रहे अत्याचार में और बढ़ोतरी हुई है. दलितों पर हो रहे अत्याचारों के मामले में 2017 में अकेले अहमदाबाद शहर में 121 केस दर्ज हुए.
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