होम /न्यूज /राष्ट्र /OPINION: गुजरात में सिर चढ़कर बोला पीएम मोदी का जादू

OPINION: गुजरात में सिर चढ़कर बोला पीएम मोदी का जादू

गुजरात विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 156 सीटें जीत कर 37 साल पुराने कांग्रेस के र‍िकॉर्ड को तोड़कर नया इत‍िहास बनाया है.  (Photo-BJP Twitter )

गुजरात विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 156 सीटें जीत कर 37 साल पुराने कांग्रेस के र‍िकॉर्ड को तोड़कर नया इत‍िहास बनाया है. (Photo-BJP Twitter )

Gujarat Assembly Election Result: गुजरात की 182 सीटों वाली विधानसभा में बीजेपी ने 156 सीटें जीत कर 37 साल पुराने कांग्र ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

किसी भी राज्य में लगातार 27 साल के शासन के बाद बनाया जीत का नया र‍िकॉर्ड
37 साल पहले कांग्रेस ने 1985 में माधव सिंह सोलंकी के नेतृत्व में जीती थीं 149 सीटें
2017 में 100 का आंकड़ा भी नहीं छू पाई थी बीजेपी

गुजरात के चुनावी इतिहास में बीजेपी ने अब तक की सबसे बड़ी और धमाकेदार जीत दर्ज की है. 182 सीटों वाली विधानसभा में बीजेपी ने रिकॉर्ड 156 सीटें जीतकर नया इतिहास रचा है. दूसरी तरफ कांग्रेस ने अब तक का अपना सबसे खराब प्रदर्शन किया. सिर्फ 17 सीटों पर ही उसके उम्मीदवार जीत पाए हैं. पहली बार गुजरात की सियासी प्रयोगशाला में किस्मत आजमाने उतरी आम आदमी पार्टी ने 5 सीटों पर ना सिर्फ अपनी जीत दर्ज कराई है बल्कि करीब 13 फीसदी वोट पाकर राष्ट्रीय पार्टी की कतार में शामिल हो गई है. बीजेपी ने 52.5 फीसदी वोटों के साथ विधानसभा की 86 फीसदी सीटों पर कब्जा जमाया है. कांग्रेस को 27.3 फीसदी वोट तो मिले हैं लेकिन सीटें इतनी भी नहीं आई हैं कि वो नेता विपक्ष के लिए दावेदारी ठोक सके.

बीजेपी ने तोड़े जीत के सारे रिकॉर्ड
बीजेपी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के गृह राज्य गुजरात में सबसे बड़ी जीत का नया रिकॉर्ड कायम किया है. 37 साल पहले 1985 में कांग्रेस ने माधव सिंह सोलंकी के नेतृत्व में 149 सीटें जीती थीं. आज तक गुजरात में किसी भी पार्टी की ये सबसे बड़ी जीत थी लेकिन अब से ये रिकॉर्ड बीजेपी के नाम दर्ज हो गया है. बीजेपी की इस रिकॉर्ड जीत के पीछे प्रधानमंत्री मोदी की रणनीति और विपक्ष के खिलाफ मोर्चाबंदी को मुख्य वजह माना जा सकता है. दरअसल, 2017 के चुनावों में बीजेपी 100 का आंकड़ा भी नहीं छू पाई थी. बीजेपी को बहुमत के लिए जरूरी 92 से सिर्फ 7 सीटें ज्यादा मिली थीं जो 1995 के बाद से पार्टी का सबसे खराब परफॉर्मेंस था. 2017 में बीजेपी को लगे झटके के बाद खुद प्रधानमंत्री मोदी ने उन कारणों पर फोकस करना शुरू किया, जिन्हें उस वक्त जिम्मेदार माना गया था. पीएम मोदी ने खुद मोर्चा संभाला और आज प्रचंड जीत के रूप में उसका नतीजा सामने है. बीजेपी ने चौतरफा जीत हासिल की है.

Gujarat Election Results: वो 5 वजहें जो बताती हैं … आखिर BJP फिर क्यों जीत गई गुजरात का चुनावी रण

सौराष्ट्र में बंपर जीत
चुनाव के लिहाज से गुजरात को 4 हिस्सों में बांटकर देखा जाता है. उत्तर गुजरात, मध्य गुजरात, सौराष्ट्र और दक्षिण गुजरात. उत्तर, मध्य और दक्षिण गुजरात में पहले भी बीजेपी के लिए मुकाबला थोड़ा आसान रहा है जबकि सौराष्ट्र में कांग्रेस कड़ी टक्कर देती रही है. पीएम मोदी ने सौराष्ट्र की इस कड़ी टक्कर को साधने के लिए एक तीर से दो शिकार किए. पीएम मोदी ने पिछले साल जुलाई में ही केंद्रीय कैबिनेट में अहम फेरबदल किया और इसके लिए गुजरात के क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को साधने की कोशिश की जो कामयाब भी रही. सौराष्ट्र इलाके के 3 सांसदों को मंत्री बनाया. मनसुख मांडविया और पुरुषोत्तम रूपाला को कैबिनेट मंत्री तो महेंद्र भाई मुंजापारा को राज्य मंत्री बनाया. मांडविया और रूपाला पाटीदार समुदाय से आते हैं, एक लेउवा और दूसरे कडवा.

इसके जरिए पीएम मोदी ने पटेल-पाटीदार के साथ-साथ सौराष्ट्र के समीकरण को भी बखूबी साध लिया. जिसकी गवाही सौराष्ट्र की 54 सीटों के नतीजे भी दे रहे हैं. इस बार मोदी मैजिक के आगे कांग्रेस यहां भी सिर्फ 3 सीटों पर सिमट गई. सौराष्ट्र रीजन में 54 सीटों में से बीजेपी ने 46 पर धमाकेदार जीत दर्ज की है. जबकि 4 सीटों के साथ आम आदमी पार्टी दूसरे नंबर पर है और 3 सीटों के साथ कांग्रेस तीसरे नंबर पर है और एक सीट अन्य के खाते में है. पिछली बार सौराष्ट्र ने कांग्रेस को 30 सीटें दी थीं. जबकि बीजेपी को सिर्फ 23 सीटें मिली थीं.

इसी तरह उत्तर गुजरात में भी बीजेपी ने 32 में से 22 सीटें अपने नाम की हैं. 2017 के मुकाबले 9 सीटों के नुकसान के साथ कांग्रेस सिर्फ 8 सीटों पर सिमट गई है. मध्य गुजरात की 61 सीटों में से 55 सीटों पर कमल खिला है, जबकि कांग्रेस 17 सीटें गंवाकर सिर्फ 5 पर आ गई है. कांग्रेस की ये सभी 17 सीटें सीधे-सीधे बीजेपी के खाते में गई हैं. दक्षिण गुजरात की 35 सीटों में 33 पर बीजेपी का कब्जा हो चुका है, जबकि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने एक-एक सीट बांटी हैं.

ग्रामीण इलाकों में भी कमल खिला
182 सीटों वाली विधानसभा में आधी से ज्यादा सीटें ग्रामीण इलाकों से आती हैं. ग्रामीण इलाकों की 98 सीटों में बीजेपी ने 79 सीटों पर जीत दर्ज की है. 2017 के मुकाबले इन इलाकों में बीजेपी को 40 सीटों का बंपर फायदा हुआ है. जबकि कांग्रेस सिर्फ 11 सीटें जीत पाई है. पिछली बार कांग्रेस को ग्रामीण इलाकों से 53 सीटें मिली थीं. गुजरात में 5 सीटें जीतने वाली आम आदमी पार्टी ने अपनी 4 सीटें ग्रामीण इलाकों से ही हासिल की हैं.

कस्बाई इलाकों में भी बीजेपी पहली पसंद
विधानसभा की 31 सीटें कस्बाई इलाकों वाली मानी जाती हैं. इन 31 में से बीजेपी को 28 सीटें मिली हैं, जबकि कांग्रेस सिर्फ 2 सीटें जीत पाई है. कस्बाई इलाकों में पिछली बार के मुकाबले कांग्रेस को 13 सीटों का नुकसान हुआ है. इनमें से 12 सीटें सीधे-सीधे बीजेपी के खाते में गई हैं, जबकि एक सीट पर आम आदमी पार्टी ने कब्जा जमाया है.

शहरों में बीजेपी का जलवा बरकरार
शहरी इलाके पारंपरिक तौर पर बीजेपी का गढ़ माने जाते हैं. गुजरात में विधानसभा की 53 सीटें शहरी इलाकों वाली हैं, इनमें से 49 सीटों पर बीजेपी ने कब्जा जमाया है, जो पिछली बार के मुकाबले 5 ज्यादा हैं. ये सभी 5 सीटें कांग्रेस से छिटककर बीजेपी के पास आई हैं. कांग्रेस शहरी इलाकों में सिर्फ 4 सीटों पर सिमट गई है.

दलित-मुस्लिम बहुल इलाकों में बीजेपी बेहतर
गुजरात विधानसभा की 10 सीटों पर दलित समुदाय और 12 सीटों पर मुस्लिम समुदाय के वोटर्स निर्णायक भूमिका निभाते हैं. दलित बहुल 10 सीटों में से 8 पर बीजेपी ने जीत दर्ज की है. पिछली बार इन इलाकों में बीजेपी को सिर्फ 6 सीटें मिली थीं. जबकि मुस्लिम बहुल 12 सीटों में से बीजेपी को 10 सीटों पर जीत मिली है. यहां बीजेपी को 4 सीटों का फायदा हुआ है. ये चारों सीटें कांग्रेस के खाते से निकलकर बीजेपी के पास आई हैं.

ओबीसी वोटर्स का बढ़ा भरोसा
गुजरात की 75 सीटों पर ओबीसी वोटर्स हार-जीत तय करते हैं. पिछली बार भी बीजेपी को इन इलाकों में आधी से ज्यादा सीटें मिली थीं. 2017 में बीजेपी ने ऐसी 39 सीटें जीती थीं जबकि 34 सीटें कांग्रेस के खाते में आई थीं. लेकिन इस बार के नतीजों में ओवीसी वोटर्स ने एकतरफा कमल का बटन दबाया है. ओबीसी बहुल 64 सीटों पर बीजेपी ने जीत दर्ज की है, जबकि कांग्रेस 26 सीटें गंवाकर 8 पर पहुंच गई है. यहां एक सीट पर आम आदमी पार्टी की मौजूदगी भी दिखी है.

पाटीदार इलाके में बीजेपी
गुजरात की मोर्चेबंदी में पीएम मोदी ने विरोधियों पर इस तरह प्रहार किया कि ना सिर्फ विरोधियों के हौसले पस्त हुए बल्कि विपक्ष की सारी रणनीति धराशायी हो गई. 2017 के बाद से ही बीजेपी ने उन नेताओं को अपने पाले में लाने की कोशिशें तेज कर दी थीं जो भविष्य में खतरा साबित हो सकते थे और कांग्रेस को फायदा पहुंचा सकते थे. पाटीदार आंदोलन से सबक लेकर बीजेपी ने हार्दिक पटेल और अल्पेश ठाकोर को अपने साथ मिलाया. कांग्रेस के कई नेताओं को भी बीजेपी तोड़कर साथ मिलाने में कामयाब रही. 2017 चुनाव के बाद तो कांग्रेस में जैसे भगदड़ ही मच गई थी, कुंवरजी बवलिया, जवाहर चावड़ा, जीतू चौधरी, अक्षय पटेल, जेवी काकड़िया, प्रद्युम्न सिंह जडेजा… और भी कई कांग्रेसी नेता एक-एक कर कांग्रेस से इस्तीफा देकर बीजेपी में शामिल हुए. इन नेताओं के जरिए बीजेपी क्षेत्रीय और जातिगत समीकरणों को बड़ी आसानी से साधने में कामयाब रही. इस कामयाबी का असर नतीजों पर भी साफ दिख रहा है.

39 सीटें ऐसी हैं जहां पाटीदार निर्णायक भूमिका निभाते हैं. इन 39 सीटों में से बीजेपी ने इस बार 34 सीटों पर जीत दर्ज की है, जो पिछली बार के मुकाबले 12 ज्यादा हैं. जबकि कांग्रेस ऐसी 15 सीटें हार गई है, जहां पिछली बार उसने बीजेपी को पटखनी दी थी. कांग्रेस इस बार पाटीदार बहुल इलाकों में सिर्फ 2 सीटों पर सिमट गई है. हालांकि, इन्हीं इलाकों में आम आदमी पार्टी ने 3 सीटें हासिल की हैं.

द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति बनाकर आदिवासियों को साधा
इस बार के चुनावों में बीजेपी ने आदिवासी बहुल क्षेत्रों के लिए विशेष रणनीति बनाई थी. खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसकी अगुआई की. इसी साल अप्रैल में पीएम मोदी आदिवासी बहुल जिले दाहोद में एक कार्यक्रम में शिरकत की थी, जहां वो एक आदिवासी जैकेट और टोपी पहने नजर आए थे. यहीं पर एक अन्य कार्यक्रम में उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा और आजादी के अन्य आदिवासी नायकों की शहादत को याद किया. समुदाय का भरोसा हासिल करने के लिए मोदी सरकार दूसरे कार्यकाल में आदिवासी समूहों और संगठनों के विरोध के बाद भारतीय वन अधिनियम-1927 और सिगरेट व अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम 2003 में संशोधनों को वापस ले लिया. साथ ही केंद्र सरकार ने आदिवासी कल्याण पर बजट खर्च भी बढ़ाया और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया. साथ ही राष्ट्रपति पद के लिए द्रौपदी मुर्मू का नाम प्रस्तावित करना और उनकी जीत सुनिश्चित करना भी आदिवासी समुदाय को साधने की बीजेपी की कोशिशों के तौर पर देखा जा सकता है.

पारंपरिक तौर पर गुजरात के आदिवासी बाहुल्य सीटों पर कांग्रेस की पकड़ मजबूत मानी जाती रही है. भले ही वो 1995 से सत्ता से बाहर है लेकिन 2017 में आदिवासी बाहुल्य 30 सीटों में से 15 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि 2 सीटें उसकी सहयोगी भारतीय ट्राइबल पार्टी ने जीती थीं. लेकिन इस बार के नतीजों में आदिवासी बाहुल्य इलाकों से भी कांग्रेस का सूपड़ा साफ होता दिख रहा है. इन 30 सीटों में से 26 सीटों पर बीजेपी ने जीत दर्ज की है, जो 2017 के मुकाबले 14 सीटें ज्यादा हैं. आम आदमी पार्टी ने भी यहां एक सीट पर अपना खाता खोला है. इन इलाकों के नतीजे मोदी सरकार के कामकाज पर मुहर के तौर पर देखे जा सकते हैं.

." isDesktop="true" id="5024949" >

खत्म की एंटी-इन्कंबैंसी की हवा
गुजरात हमेशा से बीजेपी के लिए राजनीतिक प्रयोगशाला रही है. प्रधानमंत्री मोदी ने 2021 में केंद्रीय कैबिनेट में फेरबदल के जरिए पाटीदारों की नाराजगी खत्म करने के साथ सौराष्ट्र को साधने की कोशिश की. कुछ ही दिनों बाद उनके एक चौंकाने वाले फैसले सरकार विरोधी लहर की हवा का रुख ही मोड़ दिया. अचानक गुजरात में विजय रूपाणी की अगुआई वाली पूरी सरकार बदल दी गई. सीएम विजय रूपाणी से इस्तीफा लिया गया. पाटीदार समुदाय से आने वाले भूपेंद्र पटेल को नया मुख्यमंत्री बनाया गया. पटेल को पूरी नई कैबिनेट दी गई. पाटीदारों को ज्यादा प्रतिनिधित्व मिला, युवा चेहरों के तवज्जो दी गई. इससे 27 वर्षों से सत्ता में चली आ रही बीजेपी के खिलाफ जो थोड़ी बहुत सत्ता विरोधी लहर की आशंका थी, उसे पूरी तरह खत्म कर दिया गया. बाकी जो कुछ कसर बची थी, वो बीजेपी ने चुनावों से पहले टिकट बंटवारे में पूरी कर दी. बीजेपी ने अपने 38 सीटिंग विधायकों के टिकट काट दिए. विजय रूपाणी, नितिन पटेल, भूपेंद्र चुडास्मा जैसे दिग्गज नेताओं की जगह नए-नए चेहरों को मैदान में उतारा और नतीजा आज सामने है.

अगर नतीजों के एक नजर में समझने की कोशिश की जाए तो कहा जा सकता है कि गुजरात में प्रधानमंत्री मोदी का करिश्मा और उनके प्रति समर्थन बरकरार है. बीजेपी ने पूरे गुजरात में बेहतर चुनावी रणनीति अपनाई और बूथ प्रबंधन किया. कांग्रेस और आम आदमी पार्टी सरीखे विपक्ष के लिए सबसे बड़ी परेशानी संगठन का कमजोर होना या ना होना रही. कांग्रेस और आम आदमी पार्टी से कोई भी बड़ा नेता मैदान में नहीं था. साथ ही कांग्रेस के अब तक के सबसे खराब प्रदर्शन में आम आदमी पार्टी ने भी बड़ी भूमिका निभाई है. आम आदमी पार्टी को जो 12.92 फीसदी वोट मिले हैं वो सीधे-सीधे कांग्रेस के खाते से निकले हैं.
बीजेपी की जीत तारीफ के काबिल है. किसी भी राज्य में लगातार 27 साल के शासन के बावजूद जीत का नया रिकॉर्ड बनाना अपने आप में कई संकेत देता है. गुजरात के चुनावी नतीजे ये बताने के लिए काफी हैं कि मोदी हैं तो जीत मुमकिन है.

Tags: Gujarat Election Result 2022, Gujarat Elections, Opinion, PM Modi

टॉप स्टोरीज
अधिक पढ़ें