गुजरात के किसानों पर Pepsi Co. ने किया केस, मांगा एक करोड़ का हर्जाना

यह मामला किसानों की ओर से आलू की एक ऐसी किस्म को उगाने और बेचने के संबंध में है जो कंपनी ने रजिस्टर करवा रखा है

News18Hindi
Updated: April 24, 2019, 9:19 PM IST
गुजरात के किसानों पर Pepsi Co. ने किया केस, मांगा एक करोड़ का हर्जाना
फाइल फोटो
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Updated: April 24, 2019, 9:19 PM IST
गुजरात के किसान नेता और एक्टिविस्ट इन दिनों अमेरिका की फूड और ब्रेवरेज जाइंट पेप्सिको के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं. दरअसल पेप्सिको ने प्रदेश के नौ किसानों पर मामला दर्ज करवा दिया है. यह मामला किसानों की ओर से आलू की एक ऐसी किस्म को उगाने और बेचने के संबंध में है जो कंपनी ने रजिस्टर करवा रखा है. पेप्सिको का कहना है कि यह उसका पूर्ण अधिकार है कि वो इस किस्म के आलू को उगाएं. कंपनी इस किस्म के आलू से अपने चिप्स के ब्रांड लेज का निर्माण करती है. इस दौरान कंपनी ने हर किसान से एक करोड़ रुपये का हर्जाना मांगा है.

यह सभी नौ किसान साबरकांठा और अरवल्ली जिले के हैं और सभी के पास तीन से चार एकड़ भूमि है. इस संबंध में अहमदाबाद के एक कोर्ट ने पिछले सप्ताह छबीलबाई पटेल, विनोद पटेल और हरीभाई पटेल नाम के तीन किसानों को यह आदेश दिया था कि वे 26 अप्रैल तक इस आलू की खेती और बिक्री को बंद कर दें. साथ ही कोर्ट ने तीनों किसानों से जवाब भी मांगा है कि उन्होंने ऐसा क्यों किया. वहीं पेप्सिको की अपील पर कोर्ट ने इस संबंध में जांच कर रिपोर्ट बनाने के लिए कोर्ट कमिश्नर के तौर पर वकील पारस सुखवानी को नियुक्त किया है.

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कौन सा है ये आलू

पेप्सिको इंडिया होल्‍डिंग प्राइवेट लिमिटेड ने कोर्ट को बताया कि कंपनी एफएल 2027 नामक आलू का इस्तेमाल करती है जो एफ एल 1867 की हाईब्रिड प्रजाति है. इस किस्म को कंपनी ने प्रोटेक्‍शन ऑफ प्लांट वैराइटीज एंड फार्मर राइट्स एक्ट 2001 के अंतर्गत रजिस्टर करवा रखा है. इस किस्म का पहली बार व्यापारिक तौर पर इस्तेमाल 2009 में हुआ था और इसका ट्रेडमार्क है एफसी 7. कंपनी ने बताया कि इस किस्म के आलू को उगाने के लिए पंजाब के कुछ किसानों को लाइसेंस दे रखा है और उनके साथ बायबैक प्रणाली के तहत करार किया हुआ है. इस संबंध में जब न्यूज 18 ने पेप्सिको के अधिकारियों से संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि क्योंकि यह मामला कोर्ट में है ऐसे में किसी भी तरह की टिप्पणी करना उचित नहीं होगा.


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जनवरी से हो रही है खेती
कंपनी ने बताया कि उसे यह पता चला है कि गुजरात में किसान बिना लाइसेंस के इस किस्म की खेती जनवरी माह से कर रहे हैं. इस बात का पता चलने के बाद कंपनी ने कुछ सैंपल इकट्ठे कर अपनी लैब में चेक करवाए, साथ ही शिमला स्थित सेंट्रल पटेटो रिसर्च इंस्टीट्यूट को भी डीएनए टेस्ट के लिए भेजा. वहां से आए परिणामों से यह स्पष्ट हो गया कि यह एफएल 2027 आलू ही है.

इसके बाद कोर्ट ने सुखवानी को आदेश दिया कि इनके और सैंपल लेकर सरकारी लैब में भेज कर रिपोर्ट तैयार करें. इसके साथ ही कोर्ट ने पुलिस को आदेश दिया कि सुखवानी को सुरक्षा प्रदान करें क्योंकि वह मौके पर जाकर विडियोग्राफी और फोटोग्राफी करेंगे.

इस संबंध में वडोदरा के जतन ट्रस्ट के कपिल शाह ने कहा कि हमें पता चला है कि नौ किसानों के खिलाफ कंपनी ने केस दायर किया है. उन्होंने कहा कि यह एक गंभीर विषय है क्योंकि अन्य किसान भी ऐसी खेती कर सकते हैं. इस समय हमें यह नहीं पता है कि किसानों को यह बात पता थी या नहीं कि जिस किस्म का आलू वे उगा रहे हैं वो उगाना गैरकानूनी है. लेकिन अगर ऐसा है भी तो भी यह उनके अधिकारों के सामने कुछ नहीं है.

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कंपनी ने करवाई थी जासूसी
पेप्सिको को जब इस खेती के संबंध में पता चला था तो उसने निजी जासूसों को इस बात का पता लगाने के लिए कहा था. इन लोगों ने खरीदार के तौर पर किसानों से संपर्क किया और इस दौरान वीडियोग्राफी करने के साथ ही सैंपल भी इकट्ठे किए.

कंपनी ने मांगा 1 करोड़ का हर्जाना
कंपनी ने इस संबंध में हर किसान से एक करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की है. मामले के सामने आने के बाद राज्य की एक किसान बॉडी ने प्रोटेक्‍शन ऑफ प्लांट वैराइटी एंड फार्मर राइट्स के अधिकारियों को पत्र लिख कर कहा है कि यह किसानों का उत्पीड़न है क्योंकि वे इस बात से अनजान हैं कि उनके अधिकार क्या हैं.

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