सरकार ने सौराष्‍ट्र के डॉन के साम्राज्य को खत्‍म करने के लिए IPS दीपन भद्रन को स्‍पेशल मिशन पर भेजा

गैंगस्टर के साम्राज्य के ख़ात्मे की ठानी सरकार ने, एक कर्मठ IPS अधिकारी को भेजा स्पेशल मिशन पर
गैंगस्टर के साम्राज्य के ख़ात्मे की ठानी सरकार ने, एक कर्मठ IPS अधिकारी को भेजा स्पेशल मिशन पर

Gujarat: गैंगस्‍टर जयेश पटेल (Gangster Jayesh Patel) एक छोटा बदमाश, लेकिन राजनीतिक मदद के साथ वो पहले इलाके का, फिर शहर का और अब सौराष्ट्र का डॉन बन गया. पहली बार 100 करोड़ की जमीन को गैरकानूनी रूप से हथियाने के मामले में सुर्खियों में आया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 22, 2020, 5:25 PM IST
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अहमदाबाद. 19 सितंबर को देर शाम गांधीनगर (Gandhinagar) से 3 पुलिस अधिकारियों के तबादले के आर्डर दिए गए. इसमें अहमदाबाद क्राइम ब्रांच से डीसीपी दीपन भद्रन (DCP Deepan Bhadran) का प्रमुख नाम था. 2007 बैच के इस IPS अफसर ने अंडरवर्ल्ड हो चाहे ऑर्गेनाइज्ड क्राइम हो, इसकी कमर तोड़ी है. जो मिशन हाथ में लिया उसे पूरा किया. करोड़ों के ड्रग्स का ही जखीरा क्यों ना हो, गुजरात ATS के साथ मिलकर उसके तार खोल दिये.

इस अधिकारी की काम के प्रति ईमानदारी ही कह लीजिए की क्राइम ब्रांच के डीसीपी के तौर पर साढ़े पांच साल से थे. ऐसे में अचानक उनका तबादला जामनगर क्यों? पुलिस हलकों मैं इस तबादले को लेकर खूब चर्चा उठी. हालांकि बाद में तस्वीर साफ हुई कि पॉलिटिकल मास्टर्स ने एक विशेष मिशन के साथ उन्हें जामनगर भेजा है. तबादले के साथ उसकी जानकारी भी उन्हें दी गई.

'मिशन जयेश' के साम्राज्य का ख़ात्मा
जयेश पटेल एक छोटा बदमाश, लेकिन राजनीतिक मदद के साथ वो पहले इलाके का, फिर शहर का और अब सौराष्ट्र का डॉन बन गया. पहली बार 100 करोड़ की जमीन को गैरकानूनी रूप से हथियाने के मामले में सुर्खियों में आया. जाने-माने वकील किरीट जोशी ने कानूनी लड़ाई कुछ ऐसी लड़ी की जयेश पटेल तिलमिला उठा. जोशी की 2018 में हत्या हो गयी, मामला हाई प्रोफाइल था जिसकी जांच जामनगर से 300 किलोमीटर दूर अहमदाबाद क्राइम ब्रांच को सौंपी गई.
गैंगस्‍टर जयेश पटेल




दीपन भद्रन और उनकी टीम ने साजिश का भंडाफोड़ करते शूटर्स पकड़े. जांच में खुलासा हुआ कि जयेश पटेल ने ही कॉन्ट्रैक्ट किलर से हत्या करवाई. जयेश तक पुलिस पहुंचे उससे पहले वो दुबई भाग निकला था.

समय के साथ जयेश और ताकतवर होता गया. किरीट जोशी की हत्या के बाद फ़िरौती वसूलने के धंधा शुरू किया. 50 लाख से लेकर 10 करोड़ की फ़िरौती मांगता गया. जामनगर के ही एक प्रोफेसर ने 1 करोड़ रुपया फ़िरौती देने से इनकार किया तो उनके घर पर फायरिंग करवायी. आखिर प्रोफेसर ने अपनी जमीन बेचकर फ़िरौती दी. इससे जयेश की हिम्मत और खुलती गयी और दुबई में बैठकर उसने अपना साम्राज्य फैला दिया. पैसे दो वरना गोली खाओ.

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जहां हाथ रखा वो जमीन उसकी, गैर कानूनी रूप से जमीन हथियाने का भी धंधा शुरू किया. जयेश और उसके गुर्गो पर अब तक 41 मामले दर्ज हैं. कहा जाता है जयेश जामनगर से तड़ीपार था तब वह राजनीतिक मदद से पुलिस के सामने ही जामनगर में रहता था और दूसरे जुर्म करता था. एक वक्त पोरबंदर और कुछ हद तक सौराष्ट्र के बाकी जिलों में गॉड मदर संतोक बेन जडेजा का साम्राज्य था. लेकिन बीजेपी के शासन में कानून व्यवस्था पर ज्यादा जोर दिया गया और धीरे धीरे सारे गैंग और सारे साम्राज्य गिरा दिए गए. लोगों को सुरक्षा का अहसास कराया गया और बीजेपी की लगातार जीत में यह भी एक प्रमुख कारण रहा.

हालांकि जामनगर में कुछ समय से स्थिति बदल रही थी. अमीर, रसूख वाले लोग घर पर बजती फोन की घंटी से थरथराते थे. मामला दिल्‍ली तक पहुंचा. दिल्‍ली से इस मामले की जानकारी मांगी गई. मामला संगीन और गंभीर लगा फिर फैसला लिया गया कि हर हाल में जयेश का साम्राज्य तोड़ने के लिए मजबूत पुलिस अधिकारी को जामनगर भेजना होगा. दिल्‍ली से अहमदाबाद क्राइम ब्रांच के डीसीपी दीपन भद्रन का नाम सूचित किया गया और उनके बाद उन्हें यह विशेष मिशन सौंपा गया है.

जयेश फिलहाल दुबई से निकल कर अफ्रीका के अलग-अलग देशों में छुपता रहता है. जयेश के साम्राज्य की कमर तोड़ने के लिए उसके गुर्गों को पकड़ना और उसका प्रत्यर्पण करना सबसे बड़ी प्राथमिकताए हैं. जयेश के फैलते साम्राज्य के पीछे रही राजनीतिक ताकतों को ढूंढकर पहले उसे ही तोड़ना होगा. बाकी तो मिशन पर भेजे गए अधिकारी को पता ही है आगे क्या करना है.
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