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गुजरात: MLA के बेटे से बहस के बाद जिला बदर हुआ शख्स! हाईकोर्ट की एसडीएम को फटकार

जिला बदर करने वाले 7 जिलों में पंचमहल, महिसागर, दाहोद, छोटा उदयपुर, वडोदरा (ग्रामीण और शहरी), खेड़ा और आणंद का नाम शामिल है. (सांकेतिक तस्वीर: Shutterstock)

जिला बदर करने वाले 7 जिलों में पंचमहल, महिसागर, दाहोद, छोटा उदयपुर, वडोदरा (ग्रामीण और शहरी), खेड़ा और आणंद का नाम शामिल है. (सांकेतिक तस्वीर: Shutterstock)

Gujarat High Court on externment order: चरण के खिलाफ 14 जून के गोधरा तालुका पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज होने के बाद एसडीएम ने 24 जून को जिलाबदर के आदेश जारी किए थे. इस आदेश में चरण को 7 जिलों से बाहर रखा गया था.

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    अहमदाबाद. गुजरात हाईकोर्ट ने विधायक के बेटे के साथ कथित रूप से बहस के बाद एक शख्स के खिलाफ जारी किए गए जिला बदर के आदेश पर आपत्ति जताई है. इस मामले में कोर्ट ने गोधरा विधायक सीके रउलजी (CK Raulji) को भी पार्टी बनाया है और पूछा है कि क्या वे व्यक्ति के खिलाफ इस आदेश का समर्थन करते हैं. साथ ही कोर्ट ने तड़ीपार के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है. दरअसल, चुनौती देने वाले प्रवीण चरण के खिलाफ एसडीएम (SDM) की तरफ से जिला बदर के आदेश जारी किए गए थे. इस आदेश के खिलाफ चरण ने हाईकोर्ट का रुख किया था.

    चरण के खिलाफ 14 जून के गोधरा तालुका पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज होने के बाद एसडीएम ने 24 जून को जिलाबदर के आदेश जारी किए थे. इस आदेश में चरण को 7 जिलों से बाहर रखा गया था. गोधरा थाने में उनके खिलाफ FIR भारतीय जनता पार्टी के विधायक रउलजी के बेटे की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई थी. इस दौरान अदालत ने एसडीएम को भी नोटिस जारी किया है.

    जस्टिस परेश उपाध्याय ने कहा, ‘अगर स्थानीय विधायकों के खिलाफ नागरिक की शिकायतों से इस तरह से निपटा जाएगा, तो इस मामले में केवल नागरिक को ही सुरक्षा की जरूरत नहीं होगी, बल्कि संबंधित विधायक से भी प्रतिक्रिया लेनी होगी कि क्या वे ऐसे किसी आदेश का समर्थन करते हैं.’ कोर्ट ने 14 जून की एफआईआर के जरिए पाया कि ऐसा प्रतीत होता है कि याचिकाकर्ता ने शिकायत की थी कि विधायक लोगों का काम क्यों नहीं कर रहे हैं. इसके बाद चरण और विधायक के बेटे मालवदीपसिंह के बीच काफी बहस हुई.

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    अदालत ने कहा कि जिलाबदर आदेश का आधार बनाई गई साल 2017 और 2049 की दो अन्य FIR भी पुरानी हैं. कोर्ट ने कहा कि उक्त दोनों FIR के आधार पर जिला बदर आदेश दिया जा सकता है या नहीं, यह अपने आप में एक पहलू है, जिसपर कोर्ट में विचार किया जा सकता है. अदालत ने कहा, ‘यह साफ है कि गोधरा एसडीएम ने याचिकाकर्ता को आणंद जिला से भी बाहर करने का विवादित आदेश दिया है. जबकि, यह उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है.’

    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चरण को जिलाबदर करने वाले 7 जिलों में पंचमहल, महिसागर, दाहोद, छोटा उदयपुर, वडोदरा (ग्रामीण और शहरी), खेड़ा और आणंद का नाम शामिल है. जस्टिस उपाध्याय की अदालत ने कहा है कि इस आदेश का कोई कानूनी आधार नहीं है.

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