कोरोना पर राज्य सरकार के हलफनामे का जमीनी हकीकत से लेना-देना नहीं: गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट. (फाइल फोटो)

गुजरात हाईकोर्ट. (फाइल फोटो)

हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस विक्रमनाथ (CJ Vikram Nath) और जस्टिस भार्गव डी. कारिया (Justice Bhargav D. Karia) की बेंच ने कहा है कि कोरोना हर मरीज को इलाज मिलना चाहिए.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 27, 2021, 11:35 PM IST
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अहमदाबाद. गुजरात में कोरोना (Covid-19) की बिगड़ी स्थिति पर स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई कर रहे हाईकोर्ट ने कहा है कि राज्य सरकार के दावे जमीनी हकीकत को नहीं दर्शाते. ये आंकड़े सिर्फ रोज़ी पिक्चर यानी काल्पनिक तस्वीर पेश करते हैं. हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस भार्गव डी. कारिया की बेंच ने कहा है कि कोरोना के हर मरीज को इलाज मिलना चाहिए.

सुनवाई के दौरान इस बात को लेकर भी चर्चा हुई कि अस्पताल उन मरीजों को एडमिट नहीं कर रहे हैं जो प्राइवेट वाहन से पहुंच रहे हैं. अस्पताल उन्हीं मरीजों को भर्ती कर रहे हैं जो सरकार की एंबुलेंस सेवा 108 के जरिए आ रहे हैं. कोर्ट ने कहा-ये कोई मुद्दा ही नहीं है कि मरीज किस वाहन से अस्पताल पहुंच रहे हैं. आखिर डॉक्टर ये कैसे कह सकते हैं कि आप 108 एंबुलेंस से नहीं आए हैं तो हम आपका इलाज नहीं करेंगे.

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कोर्ट ने कहा था-राज्य कोरोना की सुनामी झेल रहा है
करीब एक हफ्ते पहले कोरोना पर ही सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि राज्य कोरोना की सुनामी झेल रहा है क्योंकि कोर्ट और केंद्र की सलाहों पर ध्यान नहीं दिया गया. हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ ने राज्य सरकार के बेड, टेस्टिंग सुविधाओं, मेडिकल ऑक्सीजन और रेमिडिविजिर इंजेक्शन की उपलब्धता पर दिए गए आंकड़ों पर भी संशय जाहिर किया था.

कोर्ट ने कहा था- ऐसी आशंका पहले से जाहिर की जा रही थी कि भविष्य में हालात बिगड़ सकते हैं. इस कोर्ट ने फरवरी महीने में कुछ सुझाव दिए थे. हमने आपसे कहा था कि कोरोना समर्पित अस्पताल तैयार करवाएं, पर्याप्त बेड की व्यवस्था की जाए, टेस्टिंग बढ़ाई जाए. लेकिन ऐसा नहीं हुआ.
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