OPINION| अल्पेश ठाकोर मोहरा, प्रांतवाद जरिया और स्टैच्यू ऑफ यूनिटी बनेगा मंच

विपरीत परिस्थितियों में अब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पास कल तक तो शायद कुछ नहीं था, लेकिन गुजरात से कांग्रेस विधायक अल्पेश ठाकोर ने भाजपा की मुश्किलों को मानों चुटकी में हल कर दिया है.

Sanjay Kachot
Updated: October 11, 2018, 7:30 PM IST
OPINION| अल्पेश ठाकोर मोहरा, प्रांतवाद जरिया और स्टैच्यू ऑफ यूनिटी बनेगा मंच
विपरीत परिस्थितियों में अब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पास कल तक तो शायद कुछ नहीं था, लेकिन गुजरात से कांग्रेस विधायक अल्पेश ठाकोर ने भाजपा की मुश्किलों को मानों चुटकी में हल कर दिया है.
Sanjay Kachot
Updated: October 11, 2018, 7:30 PM IST
राजनीति एक ज़बरदस्त विभावना है, जहां आम लोगों के सोचने की क्षमता खत्म होती है, वहीं से राजनीति के दांवपेंच शुरू होते हैं. बस, कुछ ऐसा ही हो रहा है आजकल गुजरात में.

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए गुजरात हमेशा से 'राजनीतिक प्रयोगशाला' रहा है. शुरुआती बैठकें, 1995 और केशुभाई पटेल की सरकार, सोमनाथ यात्रा, शंकरसिंह वाघेला और हजुरिया-खजुरियाका खेल, भूकंप की त्रासदी का अवसर में परिवर्तन, गोधरा-अनुगोधरा और तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी, विकास का मुद्दा और मोदी, आंनदीबेन और विजय रूपाणी की वाइब्रेंट सरकारों से सब परिचित हैं.

इस बार क्या होगा? आने वाले लोकसभा चुनाव में मुद्दा क्या होगा? इसे लेकर सभी सोच में है. पेट्रोलियम पदार्थों के दाम आसमान छू रहे हैं. रुपया ऐतिहासिक गिरावट पर है. आम जानता महंगाई की मार से त्रस्त है. विकास' के मुद्दे की हवा टाइट हो चुकी है और राम मंदिर बनाना लगभग मुश्किल है. इन तमाम विपरीत परिस्थितियों में अब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पास कल तक तो शायद कुछ नहीं था, लेकिन गुजरात से कांग्रेस विधायक अल्पेश ठाकोर ने भाजपा की मुश्किलों को मानों चुटकी में हल कर दिया है.

अल्पेश ठाकोर और कांग्रेस ने शायद ही यह सोचा होगा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अगले लोकसभा चुनाव के लिए प्रांतवाद के मुद्दे को आगे कर "एक भारत, श्रेष्ठ भारत" के नारे के साथ अगले लोकसभा चुनाव का प्रारम्भ कर सकती है.

अल्पेश तो सिर्फ 'मोहरा' हैं :
28 सितंबर, 2018 की घटना ने एक नई राजनैतिक स्थिति को जन्म दिया है. 14 माह की वह दुष्कर्म पीड़ित बच्ची के बारे में शायद ही कोई राजनैतिक पार्टी चर्चा कर रही है. इस मामले को हाशिए पर धकेल कर संवेदनहीन राजनेता 'परप्रांतियों' के मुद्दों के उछालने में लगे हैं. गुजरात के डिप्टी चीफ मिनिस्टर नितिन भाई पटेल ने समूचे मामले में प्रांतवाद फ़ैलाने के लिए कांग्रेस विधायक अल्पेश ठाकोर और 'ठाकोर सेना को खुलेआम दोषी ठहरा दिया. दूसरी ओर ठाकोर-ओबीसी एकता मंच ने आरोप लगाया कि नितिन पटेल मुख्यमंत्री बनने की ख्वाइश रखते हैं, इसलिए सारी बातें फैला रहे हैं.

इस पुरे घटनाक्रम के बीच गुजरात में एक सोची समझी चाल के के तहत परप्रांतियों और खासकर यूपी-बिहारियों के ज़बरदस्त डर का माहौल फैला दिया गया. यह डर किसने फैलाया, यह शोध का विषय है या फिर इसे बहुत सरलता से समझा जा सकता है. इस डर के कारण एक तरफ यूपी-बिहारियों का गुजरात से पलायन होना शुरू हुआ तो दूसरी ओर नेताओं ने राजनीति के ताने बाने बुनने शुरू कर दिए.

परप्रांतीय बने 'माध्यम': हिंसक हमले हुए, क्या कोई घायल भी हुआ?
गुजरात सरकार और अन्य माध्यमों ने हल्ला मचाया कि परप्रांतियों पर हमले हो रहे हैं. उन्हें डराया धमकाया जा रहा है, किन्तु किसी ने यह सवाल नहीं किया इस पूरे घटनाक्रम में कितने लोग घायल हुए? अगर कोई घायल हुआ भी उसका इलाज कहां हुआ? कितने लोग घायल हुए? 28 सितंबर से लेकर आज तक क्या कोई भी ऐसा केस सामने आया? यह एक विचारणीय मुद्दा है. मतलब साफ़ है कि सरकार ने परप्रांतियों के पलायन का मुद्दा आगे कर एक नया दांव खेल लिया, जिसके परिणाम आने वाले दिनों में देखने को मिलेंगे.

'स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी' बनेगा राजकीय मंच:
31 अक्टूबर, 2014 को जब 'स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी' की नींव रखी गई, तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि आने वाले चार साल के बाद याने, 31 अक्टूबर, 2018 को इस 182 फीट ऊंची सरदार पटेल की प्रतिमा का राजनैतिक मंच के लिए उपयोग किया जाएगा.

याद रहे, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं इस प्रतिमा के अनावरण के लिए 31 अक्टूबर को गुजरात आ रहे है. सूत्रों के मुताबिक, प्रांतवाद के बीज को बोने के बाद इसके फल को प्राप्त करने के लिए 'स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी' का भरपूर उपयोग होगा. इससे पहले गुजरात में 'समरसता यात्रा' निकालने का आयोजन भी है. साथ ही देशभर और खासकर हिंदी भाषी राज्यों से लाए जाने वाले करीब 5000 मजदूरों-कामदारों द्वारा सरदार पटेल की इस प्रतिमा की पूजा करवाई जाएगी. नरेंद्र मोदी यहीं से प्रांतवाद और कांग्रेस की 'फूट डालो, राज करो' की नीति पर प्रहार करेंगे और भाजपा प्रांतवाद के खिलाफ है, यह जताकर "एक भारत, श्रेष्ठा भारत" का चुनावी नारा देंगे.

गुजरात में बनेगी दुनिया की सबसे बड़ी मूर्ती 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी', 31 अक्टूबर को PM मोदी करेंगे लोकार्पण

इस कार्यक्रम मे सम्मिलित होने के लिए हिंदी भाषी राज्यों के मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेताओं को आमंत्रित करने की योजना है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहले से ही इस कार्यक्रम में शामिल होने की सहमति दे दी है.

"एक भारत, श्रेष्ठ भारत" का आगाज़, अब अंजाम देखिए
10 अक्टूबर को 'वाइब्रंट नवरात्रि' के विधिवत प्रारम्भ के साथ ही गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने अपने वक्तव्य में 'एक भारत, श्रेठ भारत' का आगाज़ कर दिया. उन्होंने स्पष्ट किया कि समाज की विघटनकारी शक्तियों के सामने लड़ने की शक्ति देने वाला त्यौहार है नवरात्रि. हम ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’की भावना में विश्वास करते हैं.

'स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी' के अनावरण में अभी 20 दिन बाकी हैं. इस दौरान गुजरात सरकार कई समरसता पदयात्राएं करेगी. प्रांतवाद के विरुद्ध कार्यक्रम करेगी और भारत को एक और श्रेठ बनाने के प्रयास में जुट जाएगी. लोकसभा चुनाव का असली प्रारम्भ अब 'स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी' से "एक भारत, श्रेष्ठ भारत' से ही होगा.

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं. लेख के व्यक्त उनके निजी है.)
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