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मेलानिया ट्रंप को गिफ्ट की जाएगी खास तरह की साड़ी, 6 महीने में होती है तैयार, हैरान कर देगी कीमत

जनक दवे | News18Hindi
Updated: February 20, 2020, 7:48 PM IST
मेलानिया ट्रंप को गिफ्ट की जाएगी खास तरह की साड़ी, 6 महीने में होती है तैयार, हैरान कर देगी कीमत
साड़ी पहनने के बाद आपका लुक परफेक्ट नजर आएगा और लोग आपकी तारीफ करते नहीं थकेंगे.

मेलानिया ट्रंप (Melania Trump) को पाटन की प्रसिद्ध पटोला साड़ी (Patola Saree) गिफ्ट की जाएगी. इस साड़ी की पहली खासियत ये है कि उसे पूरी तरह हाथ से बुना जाता है. 4 से 6 लोगों को एक पटोला साड़ी (Patola Saree) तैयार करने में करीब 6 महीने का समय लगता है.

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  • Last Updated: February 20, 2020, 7:48 PM IST
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अहमदाबाद. भारत यात्रा पर अहमदाबाद पहुंच रहे डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) और मेलानिया ट्रंप (Melania Trump) के स्वागत को लेकर जोरदार तैयारियां चल रही हैं. कयास हैं कि इस यात्रा के दौरान मेलानिया ट्रंप को यादगार उपहार दिया जाएगा. ये शानदार होने के साथ ही विश्व प्रसिद्ध भी होगा. सूत्रों के मुताबिक मेलानिया को पाटन की प्रसिद्ध साड़ी जिसे पटोला (Patola Saree) के नाम से जाना जाता है, गिफ्ट की जाएगी. पटोला कितनी लोकप्रिय है इसका अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि गुजरात (Gujarat) के लोकगीतों में पटोला साड़ी की गूंज सुनाई देती है. इस साड़ी की पहली खासियत ये है कि इसे पूरी तरह हाथ से बुना जाता है. 4 से 6 लोगों को एक पटोला साड़ी (Patola Saree) तैयार करने में करीब 6 महीने का समय लगता है.

उसमें लगने वाले कलर में कोई केमिकल नहीं होता. पटोला बनाने वाले वनस्पति से खास प्रक्रिया के तहत प्राकृतिक रंग तैयार किए जाते हैं. सिल्क से बनने वाली पटोला साड़ी सिर्फ गुजरात के पाटन में ही तैयार होती है. पटोला का कपड़ा फट जाता है, लेकिन इसका रंग कभी फीका नहीं पड़ता.

6 लाख तक होती है इसकी कीमत
हाथ से तैयार होने वाली पटोला साड़ी की कीमत डेढ़ लाख से लेकर 6 लाख तक होती है. इसे तैयार करने वाले मास्टर राहुल साल्वी कहते हैं कि एक साड़ी की कीमत लाखों में इसलिए होती है, क्योंकि इसे तैयार करने में न तो किसी मशीन का इस्तेमाल होता है और न ही डिजाइन के लिए कम्प्यूटर की मदद ली जाती है. पाटन में इसको तैयार करने वाले केवल 5 मास्टर वीवर्स बचे हैं. इसकी कोई इंडस्ट्री नहीं है. पूरा कारोबार केवल ऑर्डर पर चलता है.



एक ही परिवार बनाता है पाटन में पटोला


900 साल पुरानी इस कला के खरीदार देश ही नहीं विदेश में भी हैं. इसके अलावा पाटन में पटोला साड़ी की कोई इंडस्‍ट्री नहीं है. पटोला बनाने वाला एक ही परिवार पाटन में है, जो 30 पीढ़ियों से इसी कारोबार में जुड़ा हुआ है. इसकी एक और विशेषता यह है कि दुनिया की एकमात्र ऐसी साड़ी है, जिसे तैयार करने के बाद ऊपर से रंग (प्रिंटिंग) नहीं लगाया जाता. बल्कि रंग लगाए हुए धागे को ही बुनकर उसे डिजाइन में ढाला जाता है. यानी पहले धागा प्रिन्ट होता है फिर उसकी बुनाई की जाती है. इसी कारण पटोला बनाने की प्रक्रिया बहुत ही जटिल है. अगर एक भी धागा इधर-उधर हो जाए तो पूरी साड़ी खराब हो जाती है.

दोनों ओर से पहना जा सकता है पटोला को
पटोला साड़ी को बनाने की खास तकनीक के कारण उसे दोनों तरफ से पहना जा सकता है. तैयार करने के लिए डबल इकत प्रणाली अपनाई जाती है, जिसमें धागे को लंबाई और चौड़ाई दोनों तरह से आपस में क्रॉस करते हुए बुनाई होती है. इसके चलते साड़ी में ये अंतर करना मुश्किल है कि इसकी कौन सी साइड सीधी है और कौन सी उल्टी. इस जटिल बुनाई के चलते हर कोई इसे तैयार नहीं कर सकता. हर महिला चाहती है कि एक बार उसे पाटन की पटोला साड़ी पहनने को मिले.

इंदिरा गांधी से अमिताभ बच्चन भी इसके मुरीद
बता दें कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, अमिताभ बच्चन और सोनिया गांधी भी पाटन से कई बार पटोला साड़ी को ऑर्डर कर मंगवा चुके हैं. पीएम मोदी जब गुजरात के सीएम थे तो कई कार्यक्रमों में पटोला की पगड़ी के साथ नजर आ चुके हैं. साल्वी परिवार को इस हस्तकला के लिए देश और दुनिया के कई अवॉर्ड भी हासिल हो चुके हैं. एक समय था जब पाटन का पटोला इंडोनेशिया और मलेशिया में प्रमुख तौर पर एक्सपोर्ट होता था. हाल के समय में भी विदेशों से इसकी डिमांड रहती है, लेकिन उसे ऑर्डर के आधार पर ही तैयार किया जाता है.

900 साल पुराना है पटोला का इतिहास
पाटन की पटोला साड़ी का इतिहास 900 साल पुराना है. 12वीं सदी में सोलंकी वंश के राजा कुमारपाल पूजा-पाठ में बैठने के लिए पटोला धारण करते थे. उस वक्त पटोला महाराष्ट्र के जालना में तैयार होता था. बाद में राजा कुमारपाल ने महाराष्ट्र के जालना से 700 पटोला वीवर्स को पाटन में बसने के लिए बुलाया, वहीं से पाटन में पटोला परंपरा शुरू हुई.

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First published: February 20, 2020, 7:14 PM IST
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