गुजरात: नर्मदा बांध में पानी की कमी, सरकार ने कहा- फसल न उगाएं किसान

गुजरात: नर्मदा बांध में पानी की कमी, सरकार ने कहा- फसल न उगाएं किसान
पीएम मोदी ने अपने जन्मदिन के मौके पर नर्मदा नदी पर बने सरदार सरोवर बांध का उद्घाटन किया था.

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार SSNNL को पिछले सा मानसून के बाद ही इस साल पानी की कमी की भनक लग गई थी. हालांकि चुनावी साल होने के चलते सरकार ने पानी की कमी की बात को जनता से छिपाकर रखा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 9, 2018, 10:15 PM IST
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मेघदूत शैरॉन

सरदार सरोवर जलाशय के उद्घाटन के कुछ महीनों बाद ही गुजरात पानी की गंभीर समस्या से जूझ रहा है. यहां के जलाशयों में पानी का स्तर हाल के सालों में सबसे कम है. नर्मदा नदी पर बने सरदार सरोवर जलाशय का उद्घाटन दिसंबर 2017 में हुए गुजरात चुनाव से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था. इसके बाद हुई हर चुनावी रैली में पीएम मोदी समेत बीजेपी नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि गुजरात की लाइफलाइन नर्मदा ने हर किसी की जिंदगी को समृद्ध किया है. नर्मदा परियोजना ने गुजरातियों की जिंदगी में अामूलचूल परिवर्तन किए हैं.

विधानसभा चुनाव के नतीजों के डेढ़ महीने बाद अब गुजरात पानी की किल्लत से जूझ रहा है. सरदार सरोवर बांध में पानी का स्तर पिछले कुछ सालों की तुलनाम में सबसे कम है जबकि पिछले साल गुजरात में अच्छी बारिश हुई थी. इस साल जलाशय में पिछले 15 सालों के औसत स्तर से 50 प्रतिशत कम पानी है.



सिंचाई के लिए नहीं मिलेगा एक बूंद पानी
सरकार ने घोषणा कर दी है कि सिंचाई के लिए नर्मदा का एक बूंद पानी भी किसानों को नहीं दिया जाएगा. अहमदाबाद में 2 फरवरी को एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने किसानों से कहा था कि गर्मियों में फसल न उगाएं. उन्होंने कहा था, “नर्मदा बांध में पानी का स्तर बेहद कम है. राज्य सरकार की प्राथमिकता लोगों के लिए पीने का पानी उपलब्ध कराने की है. इन गर्मियों में किसानों को फसल नहीं उगाना चाहिए क्योंकि नर्मदा का पानी सिंचाई के लिए नहीं मिलेगा.”

मुख्यमंत्री की घोषणा से पहले मुख्य सचिव जेएन सिंह और सरदार सरोवर नर्मदा निगम लिमिटेड के सीएमडी एसएस राठौड़ ने कहा था कि इस साल गर्मी में इंडस्ट्रीज और शहरी क्षेत्रों में पानी की कटौती की जाएगी. सरदार सरोवर जलाशय कमिटी ने 10 जनवरी को मीटिंग कर फैसला लिया कि इस साल गुजरात को 4.7 मिलियन एकड़ फीट पानी दिया जाएगा जो पिछले साल के 9 मिलियन एकड़ फीट से लगभग आधा है.

सरदार सरोवर नर्मदा निगम लिमिटेड (SSNNL) के सीईओ ने कहा कि गुजरात सरकार ग्रीष्मकालीन फसलों के लिए पानी देने के लिए बाध्य नहीं है. हालांकि पिछले कुछ सालों में हम पानी उपलब्ध करा रहे थे क्योंकि पानी का इनफ्लो अधिक था.

सरकार ने छिपाई पानी की कमी की बात
सूत्रों की मानें तो SSNNL को पिछले साल मानसून के बाद ही इस बात की भनक लग गई थी कि इस साल पानी की कमी होने वाली है. मध्यप्रदेश में नर्मदा नदी के कैचमेंट एरिया में पिछले साल कम बारिश हुई जिसके चलते बांध में काफी कम मात्रा में पानी आया था. हालांकि चुनावी साल होने की वजह से सरकार नहीं चाहती थी कि यह बात लोगों के सामने आए.

1 दिसंबर 2017 को नर्मदा बांध में पानी का स्तर 123.02 मीटर था, वहीं दो महीनों में यह घटकर 112.22 मीटर रह गया. शुक्रवार को नर्मदा बांध का जलस्तर 111.65 मीटर था जबकि बांध में न्यूनतम जलस्तर 110.64 मीटर होना अनिवार्य है. इसका मतलब फिलहाल जलाशय से केवल एक मीटर पानी का इस्तेमाल किया जा सकता है.

किसानों को एकजुट करने के लिए पदयात्रा
गुजरात खेड़ुत मंडल (गुजरात में किसानों का संगठन) के अध्यक्ष सागर रबाड़ी ने न्यूज 18 से बातचीत में कहा, “अभी जो हालात हैं वह पूरी तरह से मैन मेड हैं और सबसे बुरा यह है कि सरकार ने वोट पाने के लिए चुनाव से पहले पानी का दुरुपयोग किया. सौराष्ट्र के आजी बांध और उसके आगे के लिए पानी छोड़ना पानी की बर्बादी के अलावा कुछ और नहीं था. जबकि जलाशय में इस बार कम पानी आया था.”

रबाड़ी सौराष्ट्र और उत्तर गुजरात के 5.5 लाख किसानों को जोड़ने के लिए सोमवार से पदयात्रा शुरू करेंगे. उन्होंने कहा कि वॉटर रिसोर्स के मिसमैनेजमेंट की वजह से किसानों को 15 मार्च से सिंचाई के लिए पानी नहीं मिलेगा.

इस बीच नर्मदा नहर नेटवर्क की नहरों में सेंध की सूचना भी है जिसकी वजह से लाखों लीटर पानी बहकर बर्बाद हो सकता है. इस सप्ताह की शुरुआत में उत्तर गुजरात के बनासकांठा जिले में नहर के किनारों से लाखों लीटर पानी बहकर आसपास के मैदान में फैल गया. शुक्रवार को मध्य गुजरात के छोटा उदेपुर में भी नहर में सेंध की वजह से कई घंटों तक पानी ऐसे ही बहता रहा.

फिलहाल नहरों की सुरक्षा के लिए गुजरात सरकार ने पुलिस और एसआरपी की तैनाती की है ताकि किसानों को पानी की चोरी करने से रोका जा सके. किसान 15 मार्च तक सिंचाई के लिए नहर से पानी ले सकते हैं इसके लिए उन्हें मामूली शुल्क चुकाना होगा. हालांकि 15 मार्च के बाद वे नहर से पानी नहीं ले पाएंगे.

वहीं कांग्रेस भी इस मामले का फायदा उठाने की कोशिश में नजर आ रही है. न्यूज 18 से बातचीत में पार्टी प्रवक्ता डॉक्टर मनीश दोशी ने कहा, "सरदार सरोवर प्रोजेक्ट का उद्घाटन पीएम ने चुनाव से ठीक पहले किया था ताकि चुनाव प्रचार में इसका फायदा उठा सकें. अब जब चुनाव खत्म हो गए हैं तो राज्य पानी की कमी से जूझ रहा है."
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