इस नौजवान नेता की हुंकार पर आ जाती है 5 लाख की भीड़

गुजरात का असरदार पाटीदार यानी पटेल समाज सड़कों पर उतर आया है। मांग है आरक्षण की। इस मांग को आंदोलन की शक्ल दी है 22 साल के एक पटेल नौजवान ने जिसका नाम है हार्दिक पटेल।

News18India
Updated: August 20, 2015, 12:28 AM IST
इस नौजवान नेता की हुंकार पर आ जाती है 5 लाख की भीड़
गुजरात का असरदार पाटीदार यानी पटेल समाज सड़कों पर उतर आया है। मांग है आरक्षण की। इस मांग को आंदोलन की शक्ल दी है 22 साल के एक पटेल नौजवान ने जिसका नाम है हार्दिक पटेल।
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Updated: August 20, 2015, 12:28 AM IST
नई दिल्ली। गुजरात का असरदार पाटीदार यानी पटेल समाज सड़कों पर उतर आया है। मांग है आरक्षण की। इस मांग को आंदोलन की शक्ल दी है 22 साल के एक पटेल नौजवान ने जिसका नाम है हार्दिक पटेल। इस आंदोलन को हल्के में ले रही गुजरात सरकार तब सकते में आ गई, जब सूरत की रैली में करीब पांच लाख पटेल जुट गए।

अब आंदोलन के मुखिया 22 साल के हार्दिक पटेल ने 25 अगस्त को अहमदाबाद में आर या पार रैली का आह्वान किया है, जिसमें 15 लाख से ज्यादा पटेलों के शामिल होने का दावा किया जा रहा है। घबराई गुजरात सरकार ने रैली को मंजूरी देने से इनकार कर दिया है। अब पटेल समाज की नजर अपने नौजवान नेता पर है।

गुजरात के सूरत में 17 अगस्त 2015 को सड़कों पर भारी मात्रा इकट्ठी हुई। इसे देख गुजरात की सरकार सकते में आ गई। 15 किलोमीटर लंबी रैली और 5 लाख लोग। इस महारैली का अगुवा नेता जानते हैं कौन है, महज 22 साल का ये नौजवान। इसकी उम्र पर मत जाइए, क्योंकि इस कम उम्र लड़के के पीछे 200 लाख लोगों की शक्ति है। ये 200 लाख लोग हैं गुजरात के ताकतवर पटेल या पाटीदार ।

पटेल समाज अपने लिए आरक्षण की मांग लंबे वक्त से करता रहा है। आरक्षण ओबीसी कोटे के तहत इस 22 साल के लड़के ने उस मांग को जिस अंदाज में हवा दी है, अपने समाज पर जिस तेजी से और जिस मजबूती से पकड़ बनाई है, वो अचंभित करने वाली है।

हार्दिक पटेल के मुताबिक पाटीदारों की हालत पिछले दस सालों में बेहद खराब हुई है। हमारी मांग है कि ओबीसी कोटे से हमें आरक्षण मिले।

उत्तर गुजरात के विसनगर और विजापुर से शुरू हुए इस आंदोलन ने इस कदर जोर पकड़ा है कि आज की तारीख में गुजरात का कोई भी कस्बा कोई भी शहर ऐसा नहीं जहां पाटीदारों के लिए आरक्षण से जुड़ी रैली न हुई हो।

इस आंदोलन को भांपने में गच्चा खा चुकी गुजरात सरकार ने पाटीदारों की मांगों के मद्देनजर सात सदस्यीय कमेटी बनाई है जो आंदोलनकारियों से बात कर रही है। सोमवार को पाटीदार समाज के प्रतिनिधिमंडल से सरकारी कमेटी की बातचीत में कोई बात नहीं बनी है।

गुजरात सरकार के कैबिनेट मंत्री नितिन पटेल के मुताबिक संविधान को भी ध्यान मैं रखना है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश को भी ध्यान मैं रखना है। बीच का रास्ता कैसे निकलता है, यह देखना है।

आंदोलनकारी पाटीदारों की एक ही मांग है आरक्षण, लेकिन सरकार संविधान का हवाला दे रही है। पटेलों को दूसरी सहूलियतें देने की बात कर रही है। इस पर इस आंदोलन के नेता और पाटीदार अनामत आंदोलन के संयोजक हार्दिक पटेल का कहना है कि ये सब आंदोलन खत्म करने के लिए सरकारी पैंतरेबाजी है। हार्दिक पटेल ने साफ कह दिया है कि जबतक आरक्षण नहीं मिलेगा आंदोलन जारी रहेगा।

1 - गुजरात में पटेल समुदाय कुल आबादी का करीब 27 फीसदी है।

2 - ये वोट बैंक फिलहाल बीजेपी के साथ है।

3- अक्टूबर में गुजरात में जिला पंचायत, ग्राम पंचायत और नगर निगम चुनाव होने हैं।

ऐसे में पटेलों की नाराजगी बीजेपी को भारी पड़ सकती है। इसलिए माना जा रहा है कि 25 अगस्त को अहमदाबाद की रैली इस मामले में निर्णायक साबित हो सकती है। लेकिन गुजरात की आनंदीबेन पटेल सरकार के लिए परेशानी यहीं खत्म नहीं होगी। पटेलों के आंदोलन को देखते हुए अब ब्रह्मण और राजपूत समाज भी आरक्षण की मांग के साथ मैदान में उतर आए हैं। राजपूत समाज के करण सिंह चावड़ा ने कहा है कि आरक्षण आर्थिक आधार पर होना चाहिए। सरकार से अनुरोध है की इसे जल्दी सुलझाएं नहीं तो सड़कों पर सैलाब आएगा।

अब अगर मौजूदा आरक्षण पर नजर डालें तो पटेलों को ओबीसी कोटे में आरक्षण मिलने की गुंजाइश नहीं दिखती।

1- कुल आरक्षण की सीमा है 49 फीसदी

2- एसटी के तहत 14 फीसदी

3- एससी के तहत 7 फीसदी

4- ओबोसी कोटे के तहत 27 फीसदी

5- ओबीसी कोटे में है 146 जाति

कौन है हार्दिक पटेल?

यह नौजवान ग्रेजुएट है, उम्र भी कम है, सिर्फ 22 साल लेकिन उसके पीछे खड़े हैं 2 करोड़ पटेल। आखिर चंद महीने में गुजरात का एक मामूली नौजवान कैसे बन गया राज्य के सबसे असरदार पटेल समुदाय का नेता, कैसे उसने पटेलों की आपसी दूरी को पाटा और देखते ही देखते सरकार के लिए बन गया चुनौती।

अहमदाबाद के विरमगांव के चंद्रपुर में 20 जुलाई 1993 को जन्मा है हार्दिक पटेल। एक मध्यम वर्गीय परिवार में पैदा हुए हार्दिक को भी इस बात का अंदाजा नहीं होगा कि इतनी कम उम्र में वो अपने समाज का नेता बनेगा और एक ऐसे आंदोलन का अगुवा बनेगा जिसने सरकार को हिला कर रख दिया है। जिसके एक इशारे पर 5 लाख लोग इकट्ठा हो जाते हैं। जिसने राज्यभर में 82 रैली कर पूरे गुजरात के करीब 2 करोड़ पटेलों को जोड़ा।

तीन साल पहले बीकॉम खत्म करने के बाद हार्दिक ने नौकरी न मिलने पर पानी सप्लाई का काम शुरू किया, लेकिन समाज के लिए कुछ करने की चाह में हार्दिक ने बिजनेस को अलविदा कह दिया और समाजसेवा में जुट गया। हार्दिक ने पटेल समुदाय के लिए पाटीदार आरक्षण समिति के बैनर तले आरक्षण की पुरानी मांग को हवा दी। मेहसाणा से महज महीने भर पहले आंदोलन की शुरुआत की और देखते ही देखते पूरा राज्य के पटेल हार्दिक के साथ जुड़ गए।

इस आंदोलन को शक्ल देने और पटेलों के आरक्षण की मांग को मजबूत करने में पटेल समुदाय के रिटायर्ड अफसरों का भी अहम रोल रहा है। सरकार चलाने वाले इन आईएएस और आईएफएस अफसरों ने रणनीति बनाने में अहम भूमिका निभाई। बिल्कुल उस तर्ज पर जैसे इंडिया अगेंस्ट करप्शन की मुहिम चली थी।
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