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31 साल बाद खुलेगा राज, क्या गुमनामी बाबा ही नेताजी थे? मिला ये सामान

31 साल बाद खुलेगा राज, क्या गुमनामी बाबा ही नेताजी थे? मिला ये सामान

एक तरफ नेताजी सुभाष चंद्र बोस और दूसरी तरफ गुमनामी बाबा की तस्वीर, दशकों से देश के करोड़ों लोगों के मन में ये सवाल रहा है कि ये दो तस्वीरें क्या एक ही शख्स की हैं, क्या नेताजी और गुमनामी बाबा एक ही थे।

    फैजाबाद। फैजाबाद के गुमनामी बाबा के निधन के 31 साल बाद अब पहली बार वो चीजें सार्वजनिक हो रही हैं जो उनकी रोजमर्रा की जिंदगी में शामिल थीं। जो गुमनामी बाबा ने बहुत सहेज कर रखी हुई थीं। जो गुमनामी बाबा की आखिरी निशानियां हैं। फैजाबाद के रामभवन में गुमनामी बाबा ने बेहद ही रहस्यमयी जिंदगी गुजारी। उनके जाने के बाद सस्पेंस और सवालों से जूझते हुए एक पीढ़ि बदल चुकी है। क्या देश के महान सपूत नेताजी सुभाष चंद्र बोस से गुमनामी बाबा की सिर्फ शक्ल ही मिलती थी, आखिर ऐसा क्यों था कि जिस तरह की चीजें नेताजी इस्तेमाल करते थे वैसी ही चीजें गुमनामी बाबा के पास थी।

    फैजाबाद में गुमनामी बाबा के सामान को सार्वजनिक करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। 1985 में उनके निधन के बाद उनका सामान जिला कोषागार में सील लगाकर रख दिया गया था। उनके सामान की पड़ताल से शायद इस बात का जवाब मिले की नेताजी सुभाष चंद्र बोस और उनमें क्या रिश्ता था। आपको बता दें कि फैजाबाद में अभी 32 में से जो 3 बॉक्स खोले गए हैं उनमें रोजमर्रा की चीजें और बांग्ला और अंग्रेजी की कुछ किताबें मिली हैं। बाकी सामान की लिस्टिंग का काम शनिवार को किया जाएगा।

    एक तरफ नेताजी सुभाष चंद्र बोस और दूसरी तरफ गुमनामी बाबा की तस्वीर, दशकों से देश के करोड़ों लोगों के मन में ये सवाल रहा है कि ये दो तस्वीरें क्या एक ही शख्स की हैं, क्या नेताजी और गुमनामी बाबा एक ही थे। इन सवालों का जवाब कई सालों से फैजाबाद के कलेक्ट्रेट कोषागार में बंद रहा है। डबल लॉकर यानि दो-दो दरवाजों के पीछे ये राज दफ्न रहा है। शुक्रवार को प्रशासनिक टीम की मौजूदगी में कोषागार के पहले ताले को खोला गया। अफसरों की टीम इस कमरे में पहुंची जहां बहुत सारा सामान भरा हुआ था। चंद मिनट बाद दूसरे दरवाजे को खोला गया। इसी में गुमनामी बाबा का सामन रखा है। लोहे के पुराने बक्सों में गुमनामी बाबा की चीजें रखी हैं। 24 बड़े लोहे के बॉक्स हैं। बाकी 8 छोटे, कुल मिलाकर 32 डब्बों में दो शताब्दियों का सबसे बड़ा राज छिपा हुआ है।

    फैजाबाद जिला प्रशासन के मुताबिक गुमनामी बाबा से जुड़ी चीजों को पूरी तरह सार्वजनिक करने में अभी पांच से सात दिन तक का वक्त लग सकता है। इस पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई जा रही है। आपको बता दें कि गुमनामी बाबा के निधन के बाद उनके सामान को यहीं पर सहेज कर रखा गया था। नेताजी की मौत से जुड़े रहस्य से पर्दा उठाने के लिए बने मुखर्जी कमीशन ने यहीं आकर इन सामानों की पड़ताल की थी। माना जाता है कि इन बक्सों में रोजमर्रा के इस्तेमाल की चीजें- जैसे टूथब्रश, गोल फ्रेम वाला चश्मा, गुमनामी बाबा की घड़ी, बेल्जियन टाइपराइटर, आजादी के पहले के अखबार, आजादी के बाद के अखबार, गुमनामी बाबा की टिप्पणियों की कतरनें, कुछ अंतरराष्ट्रीय किताबें, तोहफे में मिली किताबें, इटली और जर्मनी में बने सिगार, नेताजी के परिवार से जुड़ी तस्वीरें हैं।

    अब प्रशासनिक टीम बक्सों से निकले सामानों की पूरी लिस्ट बनाकर उसकी जांच करेगी। बाद में गुमनामी बाबा के सामान को अयोध्या में बनाए गए रामकथा संग्रहालय में आम जनता के लिए रखा जाएगा। गुमनामी बाबा के सामान को सार्वजनिक करने की ये पूरी कवायद इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद की जा रही है। ये आदेश नेताजी की भतीजी ललिता बोस और नेताजी मंच की दो अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई के बाद करीब तीन साल पहले जारी किया गया था। कहा जाता है कि जब ललिता बोस ने गुमनामी बाबा का सामान देखा था तो फूट-फूट कर रो पड़ीं थीं कि ये मेरे चाचाजी का सामान है।

    बावजूद इसके तीन साल से यूपी सरकार हाईकोर्ट के आदेश को ठंडे बस्ते में डालकर बैठी हुई थी। पिछले महीने 23 जनवरी को जब केंद्र सरकार ने नेताजी से जुड़ी 100 सीक्रेट फाइलें सार्वजनिक की तो उसके बाद नेताजी के परिवार ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात की थी। नेताजी के परिवार की मांग का असर हुआ और अब गुमनामी बाबा के सामानों को सार्वजनिक किया जा रहा है। मुखर्जी आयोग ने माना था कि गुमनामी बाबा के पास से मिली चीजों में और नेताजी जिन चीजों का इस्तेमाल करते थे, उनमें बहुत समानता दिखाई देती है। अब वक्त आ गया है जब दुनिया भी गुमनामी बाबा से जुड़ी चीजों को देख पाएगी।

    Tags: फैजाबाद

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