Sushma Swaraj Death: जिस आवाज़ को लोगों ने समझा सुषमा की आवाज़

अमेरिकी विदेश विभाग में डिप्लोमेटिक इंटरप्रेटर के तौर पर काम करने वाली गुरदीप कौर चावला सुषमा स्वराज को याद करते हुए संयुक्त राष्ट्रसंघ में उनके भाषण को याद करती हैं.

Anil Rai | News18Hindi
Updated: August 7, 2019, 1:30 PM IST
Sushma Swaraj Death: जिस आवाज़ को लोगों ने समझा सुषमा की आवाज़
सुषमा स्वराज अपने डिप्लोमेटिक इंटरप्रेटर गुरदीप कौर चावला के साथ
Anil Rai
Anil Rai | News18Hindi
Updated: August 7, 2019, 1:30 PM IST
बीजेपी की सरकार में चार बार केंद्रीय मंत्री रह चुकीं सुषमा स्वराज के जाने से पूरा देश गमगीन हैं. अपने ओजस्वी भाषणों में आक्रामक रहने वाली सुषमा स्वराज निजी जिंदगी में बेहद शांत, सरल और सौम्य थीं. वह दूसरों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहती थीं. लोग उनका जोरदार भाषण सुनना चाहते थे. सुषमा के भाषणों की इंटरप्रेटर भी उनकी व्यक्तित्व की बड़ी प्रशंसक रही हैं.

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अमेरिकी विदेश विभाग में डिप्लोमेटिक इंटरप्रेटर के तौर पर काम करने वाली गुरदीप कौर चावला सुषमा स्वराज को याद करते हुए संयुक्त राष्ट्रसंघ में उनके भाषण को याद करती हैं. कौर संयुक्त राष्ट्र संघ की जीएम को याद करते हुए बताती है, 'जैसे ही जीएम में सुषमा स्वराज जी का भाषण खत्म हुआ, सुषमा जी ने लोगों से मेरा परिचय कराया. वो पल मेरे लिए बहुत भावुक था. भारत की विदेश मंत्री ने लोगों से मिलाते हुए मेरा परिचय यह कहकर कराया कि कि यह मेरी आवाज़ है.'

कौर आगे बताती हैं, 'दरअसल, सुषमा स्वराज के इस भाषण का अनुवाद मैंने किया था. इस अनुवाद से सुषमा जी बेहद खुश थीं. उन्होंने कहा था कि इस अनुवाद में तुमने मेरी भावनाओं का ध्यान रखा. बाद में मैंने सुषमा जी के साथ कई फोटो भी खिंचवाई.' गुरदीप कौर चावला का कहना है कि सुषमा स्वराज एक सच्ची राजनयिक और आम लोगों की नेता थीं. उनके ज्यादा सरल राजनेता बहुत कम देखने को मिलते हैं.'


दुनिया भर के राजदूत थे सुषमा के ट्विटर डिप्लोमेसी के कायल
लंबे समय तक विदेश मंत्रालय कवर करने वाले वरिष्ठ पत्रकार विजेंद्र सिंह बताते हैं कि सुषमा स्वराज का विदेशी राजनयिकों में एक विशेष सम्मान था. सीरिया के राजदूत रियाद अब्बास से बातचीत का जिक्र करते हुए विजेंद्र बताते हैं कि रियाद सुषमा स्वराज की ट्विटर डिप्लोमेसी के कायल थे. उनसे एक बार इस मुद्दे पर कहा था कि सुषमा स्वराज ने ट्विटर डिप्लोमेसी की एक नई मिसाल कायम की है.

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विजेंद्र बताते हैं कि कई ऐसे राजदूत रहे जो मानते हैं विदेश मंत्री रहते हुए सुषमा स्वराज ने ट्विटर डिप्लोमेसी की शुरुआत की थी. उससे देश के आम लोगों को बहुत जल्द मदद मिल पाती थी. कई राजदूतों ने तो सुषमा के बाद अपने देश में भी इस तरह की ट्विटर डिप्लोमेसी की पहल की.
First published: August 7, 2019, 1:26 PM IST
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