बंगालः बोलपुर में अनिर्बन बनाम 'अनुब्रत', गांगुली बोले- 'सोमनाथ' हैं पहचान, TMC का आतंक नहीं

अपने चुनावी अभियान में अनिर्बन गांगुली का जोर शांति निकेतन और विश्व भारती विश्वविद्यालय की वजह से बोलपुर की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को रेखांकित करने पर है. फाइल फोटो

अपने चुनावी अभियान में अनिर्बन गांगुली का जोर शांति निकेतन और विश्व भारती विश्वविद्यालय की वजह से बोलपुर की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को रेखांकित करने पर है. फाइल फोटो

Anirban Ganguly Vs Anubrata Mandal in Bolpur: न्यूज18 के साथ बातचीत में अनिर्बन कहते हैं, "बोलपुर की पहचान सोमनाथ चटर्जी जैसे नेता रहे हैं. वे सात बार यहां से चुने गए थे. वे मुझसे ज्यादा ज्ञानी, उदार और शिक्षित थे."

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  • Last Updated: April 18, 2021, 5:31 AM IST
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अमन शर्मा, बोलपुर से 

नई दिल्ली. रवींद्रनाथ टैगोर और शांति निकेतन की धरती, बोलपुर धर्म संकट में फंसा दिख रहा है. वीरों की धरती बीरभूम जिले का ये इलाका पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, नोबेल विजेता अमर्त्य सेन और पूर्व लोकसभा स्पीकर सोमनाथ चटर्जी से जुड़ा है, मतलब कि बंगाली भद्रलोक का शिखर... लेकिन, वक्त के सांचे पर अब बोलपुर की पहचान टीएमसी नेता अनुब्रत मंडल (Anubrata Mandal) भी हैं. मंडल बीरभूम जिले की 11 विधानसभा सीटों में से किसी पर भी उम्मीदवार नहीं हैं, लेकिन उनकी छाया हर सीट है. दूसरी ओर बोलपुर में बीजेपी की उम्मीदों का भार डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन के डायरेक्टर अनिर्बन गांगुली पर है. न्यूज18 के साथ बातचीत में अनिर्बन कहते हैं, 'बोलपुर की पहचान सोमनाथ चटर्जी जैसे नेता रहे हैं. वे सात बार यहां से चुने गए थे. वे मुझसे ज्यादा ज्ञानी, उदार और शिक्षित थे. बोलपुर से शुरुआत में चुने गए नेताओं में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के सचिव अनिल चंदा थे. मुझमें बोलपुर की जनता उन्हीं नेताओं की छवि देखेगी, जो ज्यादा शिक्षित और उदार थे, जिन्होंने बोलपुर का प्रतिनिधित्व किया.'

माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 24 अप्रैल को बोलपुर में अपने चुनावी अभियान की आखिरी रैली को संबोधित करेंगे और इससे अनिर्बन गांगुली की बोलपुर में दावेदारी बड़ा बल मिलेगा. पिछले एक महीने से ज्यादा समय से बोलपुर लॉज अनिर्बन का घर बना हुआ और इसके बाहर टीएमसी के झंडे और अनुब्रत मंडल के झंडे लहरा रहे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि इस बार लड़ाई अच्छाई और बुराई की है, जबकि ज्यादातर लोग अनुब्रत मंडल के खिलाफ बोलने से परहेज करते हैं. टीएमसी नेता और पार्टी के मौजूदा विधायक चंद्र नाथ सिन्हा ने गांगुली को बाहरी करार दिया. दूसरी ओर बीजेपी का चुनावी अभियान राजनीतिक हत्या, पंचायत स्तर पर भ्रष्टाचार, खराब सड़कें और पीने के पानी की समस्या पर फोकस है. इन सबके साथ बीजेपी की कोशिश अनिर्बन गांगुली बनाम अनुब्रत मंडल को भी दिखाने की है, अपराध और गुंडई के खिलाफ साफ और स्पष्ट छवि का उम्मीदवार...

गुरुदेव की कर्मभूमि
अनिर्बन बताते हैं कि बोलपुर की पहचान गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर और उनकी साधना से रही है, उन्होंने यहां बैठकर राष्ट्रीय जीवन के लिए तप किया. बोलपुर विधानसभा क्षेत्र शांति निकेतन और विश्व भारती विश्व विद्यालय के लिए जाना जाता रहा है, जिसकी स्थापना टैगोर ने की तो, बोलपुर की पहचान महाकवि जयदेव भी रहे हैं, जिन्होंने गीत गोविंदम की रचना की. गांगुली ने न्यूज18 से कहा, "अनुब्रत मंडल, उन चीजों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो टैगोर की लीगेसी के उलट है, बोलपुर की जनता की समग्र चेतना के खिलाफ है. पिछले 10 सालों से बीरभूम राजनीतिक हत्याओं और राजनीतिक साजिश से जुड़ा रहा है, जोकि अपने माइंडसेट में अलोकतांत्रिक है और संवैधानिक भारत में इसकी कोई जगह नहीं है. टीएमसी के मौजूदा विधायक की अपनी कोई पहचान ही नहीं है."

अपने चुनावी अभियान में गांगुली का जोर शांति निकेतन और विश्व भारती विश्वविद्यालय की वजह से बोलपुर की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को रेखांकित करने पर है. गांगुली कहते हैं, "टीएमसी ने बोलपुर के माहौल को नकारात्मक बनाकर रखा है, जिसकी वजह से बोलपुर का विकास रुका हुआ है. अगर आप बोलपुर के क्षेत्रों में घूमने जाते हैं, तो देखते हैं कि संस्कृति और पर्यटन की बातें होती ही नहीं, सिर्फ दबंगई और राजनीति लड़ाई झगड़ों की बात होती है." इसके उलट एक टीएमसी नेता ने कहा कि सच ये है कि बीजेपी लोगों को भड़का रही है और तृणमूल के लोगों को गुंडा बता रही है, टीएमसी ने बीरभूम के लिए बहुत कुछ किया है,

बीजेपी की चुनौतियां



2016 में टीएमसी ने बोलपुर सीट पर आसान जीत दर्ज की थी. टीएमसी और लेफ्ट के उम्मीदवार को पूर्ण वोट का करीब 82% मत मिले थे. ये दोनों दल इस बार भी मैदान में हैं और यहां गांगुली को कड़ी चुनौती मिल रही है. गांगुली ने कहा, '2016 के गुजरे वक्त बीत चुका है. 2019 में हमने बोलपुर में 2016 की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया था और अंतर काफी कम रहा. 2019 से यहां की फिजा बदल गई है. यहां की जनता को पीएम के गर्वनेंस एजेंडा पर भरोसा है और वे यहां के नुमाइंदों द्वारा भुला देने से भी काफी नाराज हैं. इस बार चीजें बिल्कुल अलग होंगी.' उन्होंने कहा कि जनता अब खुलकर बोल रही है. वे यहां की फिजा को बदलना चाहते हैं.

उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता पीएम मोदी से सीधे जुड़ाव महसूस करती है और उसकी तरह का गर्वनेंस यहां चाहती है. गांगुली ने कहा, 'मोदी ने उनसे अपील करते हैं, उनसे जुड़ते हैं और कहते हैं. यहां की जनता भी उनको आकांक्षा भरी नजरों से देख रहे हैं.' इस सीट पर 27% मुस्लिम वोटर और ये टीएमसी के साथ मजबूती से खड़े दिख रहे हैं. पर गांगुली कहते हैं कि मुस्लिमों को पता चल गया है कि टीएमसी ने उनका फायदा उठाया है. उन्होंने कहा, 'उनका (मुस्लिमों) का इस्तेमाल केवल वोट बैंक के तौर पर हुआ है. उनसे कई वादे किए गए लेकिन उन्हें कुछ भी नहीं मिला. हमारे कई कार्यकर्ता मुस्लिम हैं और उनपर हमले हो रहे हैं क्योंकि वे बीजेपी वर्कर हैं. बोलपुर में स्थिति साफ है.'





ह पूछने पर कि क्या बीजेपी की जीत के बाद वह भी सीएम के चेहरे होंगे, गांगुली ने इस रेस में होने से साफ इनकार किया. गांगुली ने कहा, 'यहां 294 कैंडिडेट हैं और मुझे उम्मीद है कि हम 200 से ज्यादा सीटें जीतेंगे. उनमें कई लोगों के पास राजनीतिक और प्रशासनिक अनुभव होगा.'
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